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गंगा में मूर्ति विसर्जन का मामला, काशी में साधुओं का काला दिवस मनाने का ऐलान

Sun, 11 Sep 2016 12:15 AM IST
varanasi
varanasi Updated Sun, 11 Sep 2016 12:15 AM IST
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Idol immersion issue: the saints announced black Day on 22 September in Kashi
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

साधु-संत काशी में प्रतिमा विसर्जन विवाद को लेकर संतों-बटुकों पर लाठीचार्ज का दिन काला दिवस के रूप में याद करेंगे। शनिवार की दोपहर द्वारका-शारदा, ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मौजूदगी में साधु-संतों ने 22 सितंबर को गोदौलिया चौराहे पर काला दिवस मनाने का एलान किया। इसमें देश भर से संतों, महंतों और महामंडलेश्वरों से शामिल होने की अपील की जा रही है। संतों ने कहा कि शास्त्रोक्त परंपरा से गंगा में प्रतिमा विसर्जन का अपना अधिकार हासिल करके ही वे दम लेंगे। इसके लिए न्याय न मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा। 

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय में प्रतिमा विसर्जन मामले पर सुनवाई 14 सितंबर को है। कई पूजा समितियों का कहना है कि हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद15 सितंबर को वह गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगी।
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 केदार घाट स्थित श्री विद्यामठ में शनिवार की दोपहर पत्रकारों से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रदेश की अखिलेश सरकार हिंदू भावनाओं को आहत करने पर तुली है। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय ने गंगा में प्रतिमा विसर्जन के सवाल पर दाखिल जनहित याचिका स्वीकार कर ली है। इस पर प्रदेश सरकार से तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए उच्च न्यायालय की ओर से कहा गया था लेकिन अभी तक सरकार जवाब नहीं दे सकी है।
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नगर विकास मंत्री मो. आजम खां ने हाल में ही विद्यामठ में संतों को भरोसा दिलाया था कि वह सीएम से वार्ता कर फर्जी मुकदमे वापस कराएंगे और जल्द ही कोर्ट में जवाब दाखिल कराने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अलबत्ता 27 जुलाई काशी के पांच संतों को लखनऊ बुलाकर उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात करा दी। तब सीएम ने तीन दिन में जवाब दाखिल कराने का भरोसा दिलाया था लेकिन अब तक 44 दिन बीत चुके हैं और 14 सितंबर को इस मामले की उच्च न्यायालय में सुनवाई है।

'कुंडों-तालाबों में मूर्ति विसर्जन काशी को स्वीकार नहीं'

Idol immersion issue: the saints announced black Day on 22 September in Kashi
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गणेश प्रतिमा गंगा में विसर्जित कराने की मांग को लेकर धरना दे रहे संतों-बटुकों के साथ ब्रिटिश हुकूमत जैसा क्रूर बर्ताव इस सरकार के इशारे पर अफसरों ने किया था। उस दिन को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि सनातनधर्मियों को निराश होने की जरूरत नहीं है। गंगा में प्रतिमा विसर्जन के लिए संघर्ष जारी रखा जाएगा। इस मौके पर महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा, पातालपुरी पीठाधीश्वर बालक दास महाराज समेत तमाम साधु-संत उपस्थित थे।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भय दिखाकर कराया जाने वाला कार्य शास्त्र सम्मत नहीं होता। धर्मशास्त्रों में यह बात स्पष्ट रूप से कही गई है। जिला प्रशासन पूजा समितियों को भय दिखाकर कुंडों, तालाबों में प्रतिमाओं का विसर्जन करा रहा है। इससे यह साबित नहीं होता कि सनातन धर्मी समाज ने शास्त्रीय पद्धति छोड़कर इस मनमानी और अशास्त्रीय व्यवस्था को स्वीकार कर लिया है। काशी की जनता गंगा की प्रवाहमान धारा में ही प्रतिमाओं का विसर्जन करना चाहती है।

पिछले साल 22 सितंबर की रात हुआ था लाठीचार्ज

गोदौलिया चौक पर बीते वर्ष 22 सितंबर को आधी रात में गणेश प्रतिमा के गंगा में विसर्जन की मांग को लेकर धरना दे रहे संतों-बटुकों पर लाठीचार्ज किया गया था। इसमें अविमुक्तेश्वरानंद, बालक दास समेत 40 से अधिक संत-बटुक घायल हुए थे।
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