वैचारिक विस्तार: राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले 12.70 करोड़ परिवारों से संपर्क करेगा संघ
आरएसएस मानता है कि राम मंदिर निर्माण के लिए योगदान देने वाले हर परिवार के मन में हिंदुत्व के लिए विशेष प्रेम है। इसीलिए संघ अब इन सभी परिवारों तक पहुंच कायम करेगा। चित्रकूट बैठक में यह निर्णय लिया गया।
विस्तार
अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए देश के लगभग 12.70 करोड़ परिवारों ने आर्थिक योगदान दिया है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) का मानना है कि राम मंदिर निर्माण के लिए एक भी रूपये का योगदान देने वाला परिवार या व्यक्ति किसी न किसी रूप में हिंदुत्व की विचारधारा से प्रभावित है। इसीलिए संघ इन परिवारों और लोगों के बीच अपने वैचारिक विस्तार की संभावनाएं देख रहा है। जल्दी ही संघ एक अभियान चलाकर इन परिवारों से संपर्क कर उन्हें किसी न किसी रूप में अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेगा।
संघ की चित्रकूट बैठक में इसकी रूपरेखा बना ली गई है। संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने अमर उजाला से कहा कि संघ यह मानकर चल रहा है कि राम मंदिर निर्माण के लिए योगदान देने वाला हर व्यक्ति हिंदुत्व की विचारधारा से सहमत है। संघ का मानना है कि राम मंदिर के लिए चंदा देने वाले परिवार की हिंदुत्व की परिकल्पना संघ की हिंदुत्व की परिकल्पना से थोड़ी भिन्न अवश्य हो सकती है, लेकिन उसमें वैचारिक समानता जरूर खोजी जा सकती है। इस वैचारिक साम्यता को एक स्वरूप प्रदान करते हुए संघ इन परिवारों को अपने साथ जोड़ने के लिए काम करेगा।
संघ के नेता के मुताबिक, आरएसएस हिंदुत्व की ऐसी कोई परिकल्पना नहीं रखता है, जिसमें समाज का कोई वर्ग अपने आप को जोड़ न सके। इसमें समाज के सभी वर्गों की अपनी मूल विशेषताओं का पालन करते रहते हुए संघ की विचारधारा से जुड़ने की संभावनाएं मौजूद हैं। संघ इन वर्गों की विशेषताओं को उचित सम्मान देते हुए अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।
राष्ट्र की अखंडता के लिए सबको जोड़ने की कोशिश
आरएसएस नेता के मुताबिक, संघ मानता है कि देश की अखंडता के लिए समाज के सभी वर्गों को आपस में जोड़ने वाला एक तंत्र होना चाहिए तभी देश को अखंड रखा जा सकता है। उसे लग रहा है कि हिंदुत्व इसी तंत्र का काम कर सकता है। लेकिन इसके लिए हिंदुत्व की ऐसी विचाऱधारा से सबको जोड़ना होगा जिसमें समाज के सभी वर्ग अपनी मूल सोच को सम्मान देते हुए भी अपने आपको जोड़ सकें। संघ इसी दृष्टि पर काम कर रहा है।
अगर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बार-बार मुस्लिम समुदाय को हिंदुत्व से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं तो इसके पीछे मंतव्य यही है कि वे (मुस्लिम) अपने आपको इस संस्कृति के मूल के साथ जोड़ सकें, जिससे देश की अखंडता सुरक्षित रखी जा सके। इसमें मुस्लिमों के साथ-साथ समाज के अन्य वर्ग भी शामिल हैं।
कितने रामभक्तों ने दिया योगदान
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने अमर उजाला को बताया कि 3 अप्रैल 2021 तक अयोध्या में भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए लगभग 3500 करोड़ की समर्पण निधि (चंदा) एकत्र हो चुकी है। देश के 6.73 लाख गांवों में से 5.37 लाख गांवों तक पहुंचकर विहिप कार्यकर्ताओं ने समर्पण अभियान को आगे बढ़ाया।
15 जनवरी से 27 फरवरी 2021 तक चले इस समर्पण अभियान में विहिप ने देश के 12.70 करोड़ परिवारों तक पहुंच बनाई और चंदा एकत्र किया। इन परिवारों के 65 करोड़ लोगों ने इस अभियान में अपना योगदान दिया। इस अभियान में विहिप के 20.21 लाख कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, जिसमें 1.87 लाख महिलाएं भी शामिल रहीं। इसके लिए विहिप कार्यकर्ताओं की 1.75 लाख टोलियां बनाई गई थीं।
100 रुपये के 7.10 करोड़ कूपन काटे गए
समर्पण अभियान में सबसे ज्यादा 100 रूपये मूल्य के 7.10 करोड़ कूपन काटे गए। इसके अलावा 10 रूपये मूल्य के 4.5 करोड़ कूपन और 1000 रूपये मूल्य के 80 लाख कूपन काटे गए। इसके अलावा 30 लाख कूपन अलग-अलग मूल्य के काटे गए।
धनुष ऐप से चेक से मिले चंदे पर पूरी नजर रखी
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा की 4200 शाखाओं में धन जमा किया गया। इन शाखाओं में धन जमा करने के लिए 38,185 विशेष टोली प्रमुख बनाए गए थे। धनुष ऐप बनाकर इस पर चेक द्वारा प्राप्त पूरे योगदान की जानकारी रखी गई।
विश्व का सबसे बड़ा अभियान
विनोद बंसल ने कहा कि राम मंदिर के लिए योगदान जुटाना विश्व का सबसे बड़ा समर्पण अभियान है। इसकी व्यापकता और करोड़ों लोगों के विश्वास को देखने के बाद भी कुछ लोग इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिंह खड़ा करने की कोशिश करते हैं। यह उनकी संकुचित और कपटपूर्ण विचारधारा का प्रमाण है। पूरे समर्पण अभियान और रामभक्तों के एक-एक पैसे के सदुपयोग को लेकर श्रीराममंदिर ट्रस्ट पूरी तरह सजग है।