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Ameen Sayani: लोकप्रिय रेडियो होस्ट अमीन सयानी का 91 साल की उम्र में निधन, बिनाका गीतमाला से दिलों पर किया राज
Wed, 21 Feb 2024 11:33 AM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Wed, 21 Feb 2024 11:33 AM IST
सार
अमीन सयानी देश के ऐसे पहले रेडियो स्टार रहे हैं, जिनका बड़े-बड़े फिल्म स्टार भी सम्मान करते थे। एक जमाना था जब अपने ‘बिनाका गीत माला’ कार्यक्रम के माध्यम से आवाज के इस शहंशाह ने अपने नाम और काम की धूम मचा दी थी।
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Ameen sayani
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
'नमस्कार भाइयों और बहनों, मैं आपका दोस्त अमीन सयानी बोल रहा हूं' अब यह परिचय फिर कभी नहीं सुना जा सकेगा। अपनी जादुई आवाज और मस्त अंदाज से बरसों दुनिया के कई देशों के श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाले सयानी का निधन हो गया है। 91 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। रेडियो की दुनिया में आवाज के जादूगर कहे जाने वाले दिग्गज के निधन की पुष्टि उनके बेटे रजिल सयानी ने की है।
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बिनाका गीत माला से मिली पहचान
अमीन सयानी देश के ऐसे पहले रेडियो स्टार रहे हैं, जिनका बड़े-बड़े फिल्म स्टार भी सम्मान करते थे। एक जमाना था जब अपने ‘बिनाका गीत माला’ कार्यक्रम के माध्यम से आवाज के इस शहंशाह ने अपने नाम और काम की धूम मचा दी थी। हालांकि, पिछले कुछ बरसों से सयानी की तबियत सही नहीं थी।
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सदमे में परिवार
अमीन सयानी की मौत से उनके बेटे रजिल सायानी गहरे सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि सयानी को मंगलवार रात को दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें तुरंत एचएन रिलायंस अस्पताल ले जाया गया। शाम करीब सात बजे उनका निधन हो गया। राजिल ने कहा कि उनके पिता का अंतिम संस्कार कल किया जाएगा और परिवार जल्द ही एक बयान जारी करेगा।
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महज 13 वर्ष की उम्र में लिखना शुरू कर दिया था
रेडियो सुनने का शौक रखने वालों के कानों में आज भी सयानी की आवाज में 'नमस्कार बहनों और भाइयो, मैं आपका दोस्त अमीन सयानी बोल रहा हूं' गूंजता है। कार्यक्रम ‘बिनाका गीतमाला’ ने उन्हें काफी लोकप्रियता दिलाई। उनका जन्म 21 दिसंबर, 1932 को मुंबई में हुआ था। उन्हें बचपन से ही लिखने का शौक था और महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी मां की पाक्षिक पत्रिका 'रहबर' के लिए लिखना शुरू कर दिया था। यही वह उम्र थी जब वह अंग्रेजी भाषा में एक कुशल प्रस्तोता बन गए थे और उन्होंने आकाशवाणी मुंबई की अंग्रेजी सेवा में बच्चों के कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू कर दिया था।
गुजराती लहजा होने के कारण नहीं हुआ चयन
हालांकि, जब सयानी ने ‘हिंदुस्तानी’ में प्रस्तुति देने के लिए ऑडिशन दिया तो उनकी आवाज में हल्का गुजराती लहजा होने के कारण उनका चयन नहीं किया गया। जब तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री बी वी केसकर ने आकाशवाणी से हिंदी गानों पर प्रतिबंध लगा दिया तो रेडियो सीलोन लोकप्रिय होने लगा। सयानी को दिसंबर 1952 में रेडियो सीलोन पर 'बिनाका गीतमाला' पेश करने का मौका मिला और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। यह शो 1952 से 1994 तक 42 वर्षों तक भारी लोकप्रियता हासिल करता रहा।