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ICMR: बौनापन-कुपोषण खत्म करने के लिए बाल पोषण में होगा बदलाव, वैज्ञानिकों की टीमों का होगा गठन

Sat, 07 Oct 2023 05:27 AM IST
जलज मिश्रा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 07 Oct 2023 05:27 AM IST
सार

यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और विश्व बैंक समूह की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार 2020 में 18.7% भारतीय बच्चे पोषक तत्वों की कमी के कारण कमजोरी से प्रभावित थे। दुनिया भर में कमजोर बच्चों में से आधे भारत में रहते हैं।

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ICMR Says To cure dwarfism and malnutrition changes in child nutrition
आईसीएमआर - फोटो : Social media

विस्तार

केंद्र सरकार ने बाल पोषण में बदलाव के लिए नए सिरे से वैज्ञानिक तथ्यों के साथ नीति बनाने का फैसला लिया है। इसके लिए जल्द ही वैज्ञानिकों की एक टीम बनेगी जो तीन चरणों में अध्ययन करेगी।

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इस टीम में प्रत्येक राज्य का एक सदस्य होगा ताकि भौगोलिक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित रह सके। सरकार ने छह से 36 माह की उम्र के शिशुओं को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान योजना के तहत वैज्ञानिकों को जिम्मेदारी सौंपी है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य शिशुओं में बौनापन, कुपोषण और कमजोरी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करना है। सरकार से अनुमति मिलने के बाद नई दिल्ली स्थित भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक पत्र भी जारी किया है जिसमें देश भर के शोधकर्ताओं से इस अध्ययन में न सिर्फ जुड़ने की अपील की है। साथ ही कहा है, प्रभाव डालने के लिए तैयार हो जाइए।

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बौनेपन में आई कमी
इसी तरह, भारत में 2022 में बौनेपन की दर 31.7% पाई गई, जो एक दशक पहले 2012 में 41.6% थी। 2022 में दुनिया भर में पांच साल से कम उम्र के लगभग 14.81 करोड़ बच्चे बौनेपन से प्रभावित मिले। इनमें 52% बच्चे भारत सहित एशिया और अफ्रीकी देशों में रहते हैं।

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06 से 24 माह की उम्र वृद्धि के लिए बेहतर
डॉक्टरों के अनुसार, छह से 24 माह की उम्र किसी भी शिशु के लिए वृद्धि और विकास के लिए सबसे बेहतर होती है। यह एक ऐसा पड़ाव होता है जो बच्चे के भविष्य की शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देता है। हालांकि देश में बौनापन और अल्पपोषण का जोखिम भी काफी है जिसकी वजह से सालाना लाखों मासूम बच्चे चपेट में आ रहे हैं। अगर भौगोलिक स्थिति के आधार पर देखें तो अधिकांश मामलों में शिशु के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होना है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में खराब भोजन प्रथाएं, देरी से पूरक आहार देना भी एक कारण है।

दुनिया के आधे कमजोर बच्चे भारत में  
यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और विश्व बैंक समूह की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार 2020 में 18.7% भारतीय बच्चे पोषक तत्वों की कमी के कारण कमजोरी से प्रभावित थे। दुनिया भर में कमजोर बच्चों में से आधे भारत में रहते हैं। 2022 में वैश्विक स्तर पर पांच साल से कम उम्र के अनुमानित 4.5 करोड़ बच्चे (6.8%) कमजोरी से प्रभावित थे, जिनमें से 1.36 करोड़ बच्चे गंभीर रूप से पीड़ित थे।

घर पर राशन...जमीन पर असर कम
सरकार बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में पोषण की कमी दूर के लिए टेक होम राशन प्रदान करती है जिसे आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए उपलब्ध कराया जाता है लेकिन आईसीएमआर का मानना है कि जमीनी स्तर पर खराब पूरकता की वजह से योजना का असर कम दिखाई दे रहा है। आईसीएमआर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकार के इस राष्ट्रीय कार्यक्रम पर दोबारा गौर करने और नई नीति के साथ-साथ गांव-गांव तक पहुंचने की जरूरत है।

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