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संकट: आईसीएमआर रिपोर्ट में खुलासा, एंटीबायोटिक दवाओं के ज्यादा प्रयोग से बढ़ रहा सुपरबग का खतरा

Wed, 26 May 2021 03:42 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रियंका तिवारी Updated Wed, 26 May 2021 03:42 PM IST
सार

कोविड-19 के इलाज में दवाइयों की कमी के बीच डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग को बढ़ावा देने पर मजबूर हो रहे हैं, जिसके खतरनाक परिणाम ब्लैक फंगस के रूप में देखने को मिल रहे हैं।

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ICMR report reveals that due to an increase in the use of antibiotics the risk of superbugs increased
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देश में कोरोना वायरस के प्रसार के बाद से ही एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग बढ़-चढ़कर किया जा रहा है। इस बीच एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल को लेकर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। दरअसल, आईसीएमआर के नए प्रकाशित शोध में कहा गया है कि कोविड-19 मरीजों में एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग से सुपरबग (दवा के विरुद्ध वायरस का पहले से खतरनाक और मजबूत होना) का खतरा बढ़ रहा है।

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रिपोर्ट में क्या लिखा है?
जून से अगस्त 2020 के बीच भारत में कोविड-19 की पहली लहर के दौरान किए गए अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि कोरोना की पहली लहर में ही हल्के संक्रमण पर भी मरीजों को उच्च स्तर के एंटीबायोटिक दवाइयां दी गईं। यह एंटीबायोटिक्स अक्सर वायरस के खिलाफ सुरक्षा की अंतिम पंक्ति होती हैं। आईसीएमआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह साबित करने के लिए कोई डाटा नहीं है कि यह एंटीबायोटिक्स कोविड-19 के खिलाफ प्रभावी हैं। कोरोना के इलाज में स्वास्थ्य सुविधाओं और दवाइयों की कमी के कारण डॉक्टर मरीजों को शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग की सलाह देने लगे, जो खतरनाक साबित हुआ।
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डब्ल्यूएचओ ने भी किया था सतर्क
डब्ल्यूएचओ का भी इस मामले पर कहना है कि कोविड-19 बीमारी से पहले भी एंटीबायोटिक प्रतिरोध खतरनाक स्तर तक बढ़ रहा था, जिससे हमारी कई दवाएं अप्रभावी हो गईं। सुपरबग्स को लेकर भारत पहले से ही चिंता का एक क्षेत्र रहा है। 2017 में डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट ने जिन तीन सुपरबग्स को महत्वपूर्ण प्राथमिकता के रूप में चिह्नित किया था, उन्हीं सुपरबग्स को आईसीएमआर के शोधकर्ताओं ने भारत के कोविड मरीजों में पाया। इसका उदाहरण ब्लैक फंगस है, जैसे वह मुख्य रूप से स्टेरॉयड का दुरुपयोग किए जाने से फैला। ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी में मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर संजय सेनानायके ने कहा कि भारत में महंगी एंटीबायोटिक दवाओं तक पहुंच होने के साथ-साथ शायद अब यहां मृत्यु दर की स्थिति भी बहुत खराब है।

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