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बडगाम चॉपर क्रैश में शहीद सभी 6 जवानों को वीरता पुरस्कार देने की सिफारिश
Wed, 30 Oct 2019 10:38 PM IST
अमित मंडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Wed, 30 Oct 2019 10:38 PM IST
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एमआई-17 हेलिकॉप्टर क्रैश
- फोटो : ani
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भारतीय वायुसेना द्वारा पीओके में अंजाम दिए गए सर्जिकल स्ट्राइक के अगले दिन एक चॉपर क्रैश में शहीद हुए छह अफसरों को वीरता पुरस्कार देने की सिफारिश की है। ये सभी अफसर 27 फरवरी को श्रीनगर में आपसी गलतफहमी के चलते मिसाइल हमले में शहीद हो गए थे। इससे एक दिन पहले भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ठिकानों को तबाह किया था।
एमआई-17 वीएस हेलिकॉप्टर को स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ उड़ा रहे थे उनके साथ दूसरे पायलट थे निनाद मांडवगने। इसके अलावा क्रू मेंबर में कुमार पांडे, सार्जेंट विक्रांत सहरावत, कॉरपोरल दीपक पांडे और पंकज कुमार भी हेलिकॉप्टर में सवार थे।
एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि दोनों पायलटों को वायु सेना मेडल देने और बाकी चार अफसरों का वीरता के लिए विशिष्ट जिक्र करने की सिफारिश की गई है। सभी को युद्ध के दौरान वीरता पदक देने की सिफारिश की गई है क्योंकि सभी ऑपरेशन को अंजाम देने के काम में जुटे थे।
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बता दें कि इस हेलिकॉप्टर को वायुसेना अधिकारियों ने दुश्मन का हेलिकॉप्टर समझकर मिसाइल से गिरा दिया था। इसपर जांच भी बिठाई गई थी। इसके बाद वायु सेना ने दो अधिकारियों का कोर्ट मार्शल किया गया। वहीं चार अधिकारियों के ऊपर प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
जांच में पता चला था कि हेलिकॉप्टर को भारतीय वायुसेना के श्रीनगर एयर बेस से स्पाइडर एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के जरिए निशाना बनाया गया था।
सिस्टम को हैंडल करने वाले वायुसेना अधिकारियों को लगा कि वह अपना हेलिकॉप्टर नहीं, बल्कि दुश्मन की तरफ से छोड़ी गई मिसाइल है। हेलिकॉप्टर ने 10 मिनट पहले ही उड़ान भरी थी। उसके मलबों के विडियो में जले हुई लाशें और वहां उठता हुआ धुआं देखा गया था।
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एमआई-17 वीएस हेलिकॉप्टर को स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ उड़ा रहे थे उनके साथ दूसरे पायलट थे निनाद मांडवगने। इसके अलावा क्रू मेंबर में कुमार पांडे, सार्जेंट विक्रांत सहरावत, कॉरपोरल दीपक पांडे और पंकज कुमार भी हेलिकॉप्टर में सवार थे।
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एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि दोनों पायलटों को वायु सेना मेडल देने और बाकी चार अफसरों का वीरता के लिए विशिष्ट जिक्र करने की सिफारिश की गई है। सभी को युद्ध के दौरान वीरता पदक देने की सिफारिश की गई है क्योंकि सभी ऑपरेशन को अंजाम देने के काम में जुटे थे।
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बता दें कि इस हेलिकॉप्टर को वायुसेना अधिकारियों ने दुश्मन का हेलिकॉप्टर समझकर मिसाइल से गिरा दिया था। इसपर जांच भी बिठाई गई थी। इसके बाद वायु सेना ने दो अधिकारियों का कोर्ट मार्शल किया गया। वहीं चार अधिकारियों के ऊपर प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
जांच में पता चला था कि हेलिकॉप्टर को भारतीय वायुसेना के श्रीनगर एयर बेस से स्पाइडर एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम के जरिए निशाना बनाया गया था।
सिस्टम को हैंडल करने वाले वायुसेना अधिकारियों को लगा कि वह अपना हेलिकॉप्टर नहीं, बल्कि दुश्मन की तरफ से छोड़ी गई मिसाइल है। हेलिकॉप्टर ने 10 मिनट पहले ही उड़ान भरी थी। उसके मलबों के विडियो में जले हुई लाशें और वहां उठता हुआ धुआं देखा गया था।