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लोंगेवाला युद्ध में पाकिस्तान की उम्दा योजना आखिर क्यों हुई फेल? वायुसेना प्रमुख ने किया खुलासा
Thu, 18 Feb 2021 03:46 PM IST
दीप्ति मिश्रा
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: दीप्ति मिश्रा
Updated Thu, 18 Feb 2021 03:46 PM IST
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वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया
- फोटो : ANI
लोंगेवाला की निर्णायक लड़ाई को याद करते हुए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया ने गुरुवार को कहा कि टैंकों के साथ हमला करने की पाकिस्तानी सेना की योजना जबरदस्त थी, लेकिन वह भारत की वायु ताकत को शायद भूल गए थे।
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भदौरिया ने कहा कि पाकिस्तानी फौज यह भूल गई कि जैसलमेर में तैनात हंटर विमानों का आधा स्क्वाड्रन क्या कर सकता है और शायद यही उनकी एकमात्र गलती थी। भारत 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर जीत के 50वीं वर्षगांठ मना रहा है।
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वायुसेना प्रमुख पालम में भारतीय वायुसेना के संग्रहालय में "द एपिक बेटल ऑफ लोंगेवाला" के विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह किताब एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) भरत कुमार ने लिखी है। कार्यक्रम के मंच और कुर्सियां खुले मैदान के बीचो-बीच लगाई गई थीं। साथ में पाकिस्तानी सेना के क्षतिग्रस्त दो टी-59 टैंक और हंटर, कृषक और अन्य विमान वहां खड़े थे। इन विमानों ने लड़ाई के दौरान अहम भूमिका निभाई थी।
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Pak Army's plan of armoured thrust was brilliant. But they didn't factor in airpower & thought what would half a squadron sitting in Jaisalmer would do, it was their mistake. Airpower can bring asymmetric results if time&place are chosen correctly:IAF chief on Battle of Longewala https://t.co/TBhvpXj6Oi pic.twitter.com/FlvR3poSH9
— ANI (@ANI) February 18, 2021
भदौरिया ने कहा कि लोंगेवाला की लड़ाई के बारे में बहुत कुछ कहा गया है। लोंगेवाला-जैसलमेर के इलाके को देखते हुए पाकिस्तानी सेना की टैंकों के साथ हमला करने की योजना अपने आप में जबरदस्त थी। उन्होंने कहा कि अगर यह कामयाब हो जाती, तो यह पश्चिमी मोर्चे पर और युद्ध के अंतिम परिणाम की दिशा ही बदल देती।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान की सेना ने शायद एक ही बात को भुला दिया, वह थी भारत की वायु शक्ति। उन्होंने सोचा कि जैसलमेर में तैनात हंटर विमानों का आधा स्क्वाड्रन क्या कर सकता है और शायद यही उनकी एक मात्र गलती थी।
उन्होंने कहा कि लोंगेवाला की लड़ाई एक परिदृश्य पर प्रकाश डालती है कि यदि समय और स्थान को सही ढंग से चुना जाए तो वायु शक्ति असीमित परिणाम ला सकती है।
भदौरिया ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि बहादुरी की कहानियों को किताबों में संजोया जाए और अगली पीढ़ी को बताया जाए।