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उम्मीद: अब पानी के लिए नई हाइड्रोजेल प्रणाली, 10 गुना तेज; हवा की मदद से रेगिस्तान में भी मिलेगा पानी
Fri, 23 May 2025 08:52 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 23 May 2025 08:52 AM IST
सार
जल संकट से निपटने को लेकर वैज्ञानिकों को उम्मीद की नई किरण दिखी है। अब नई हाइड्रोजेल प्रणाली से 10 गुना तेजी से हवा से पानी निकाला जा सकेगा। वैज्ञानिकों ने जो समाधान खोजा है, इसकी मदद से रेगिस्तान में भी पानी मिलेगा।
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अब नई हाइड्रोजेल प्रणाली से 10 गुना तेजी से हवा से निकाल सकेंगे पानी
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
जल संकट से जूझती दुनिया के लिए उम्मीद की एक नई किरण दिखाई दी है। अमेरिका, चिली और आयरलैंड के इंजीनियरों की टीम ने ऐसा अभिनव तरीका खोज निकाला है, जिससे हवा से पहले की तुलना में 10 गुना तेज गति से पानी निकाला जा सकता है। शोध ‘डिवाइस’ नामक वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
पहले की तुलना में यह तरीका 10 गुना तेज
शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक हाइड्रोजेल प्रणाली विकसित की है। इस नई हाइड्रोजेल को विशेष क्रॉस-लिंक्ड पॉलीएक्रिलामाइड पॉलीमर से बनाया गया है, जिसमें लिथियम क्लोराइड मिलाया गया है ताकि वह ज्यादा नमी सोख सके। इस नवाचार से हवा से पानी अवशोषित करने की प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। पहले की तुलना में यह तरीका 10 गुना तेज है। यह तकनीक रात के समय वातावरण में मौजूद अधिकतम नमी को अवशोषित करती है और फिर दिन में सौर ऊर्जा के माध्यम से उस नमी को तरल पानी में बदलकर एक संग्रहण कंटेनर में एकत्रित करती है।
सूखे क्षेत्रों में भी मिली सफलता
शोधकर्ताओं ने चिली के अटाकामा रेगिस्तान में परीक्षण किया, जिसे दुनिया के सबसे सूखा क्षेत्र माना जाता है। परीक्षणों में यह प्रणाली 11% से भी कम आर्द्रता के स्तर पर सफलतापूर्वक पानी निकालने में सक्षम पाई गई। इतना ही नहीं जब वातावरण में नमी 30% थी, तब यह प्रणाली एक दिन में प्रति वर्ग मीटर दो लीटर तक पानी निकालने में सफल रही।
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2050 तक 1.8 अरब लोग जूझेंगे जल संकट से...
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पानी के वर्तमान स्रोतों का अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन इसी तरह जारी रहा, तो 2050 तक दुनिया में 1.8 अरब से अधिक लोग मध्यम से गंभीर जल अभाव वाले क्षेत्रों में रहने को विवश होंगे। इसमें से लगभग 80% लोग विकासशील देशों में होंगे।
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पहले की तुलना में यह तरीका 10 गुना तेज
शोधकर्ताओं ने एक अत्याधुनिक हाइड्रोजेल प्रणाली विकसित की है। इस नई हाइड्रोजेल को विशेष क्रॉस-लिंक्ड पॉलीएक्रिलामाइड पॉलीमर से बनाया गया है, जिसमें लिथियम क्लोराइड मिलाया गया है ताकि वह ज्यादा नमी सोख सके। इस नवाचार से हवा से पानी अवशोषित करने की प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। पहले की तुलना में यह तरीका 10 गुना तेज है। यह तकनीक रात के समय वातावरण में मौजूद अधिकतम नमी को अवशोषित करती है और फिर दिन में सौर ऊर्जा के माध्यम से उस नमी को तरल पानी में बदलकर एक संग्रहण कंटेनर में एकत्रित करती है।
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सूखे क्षेत्रों में भी मिली सफलता
शोधकर्ताओं ने चिली के अटाकामा रेगिस्तान में परीक्षण किया, जिसे दुनिया के सबसे सूखा क्षेत्र माना जाता है। परीक्षणों में यह प्रणाली 11% से भी कम आर्द्रता के स्तर पर सफलतापूर्वक पानी निकालने में सक्षम पाई गई। इतना ही नहीं जब वातावरण में नमी 30% थी, तब यह प्रणाली एक दिन में प्रति वर्ग मीटर दो लीटर तक पानी निकालने में सफल रही।
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2050 तक 1.8 अरब लोग जूझेंगे जल संकट से...
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पानी के वर्तमान स्रोतों का अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन इसी तरह जारी रहा, तो 2050 तक दुनिया में 1.8 अरब से अधिक लोग मध्यम से गंभीर जल अभाव वाले क्षेत्रों में रहने को विवश होंगे। इसमें से लगभग 80% लोग विकासशील देशों में होंगे।