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मानव तस्करी केस: एनआईए कोर्ट ने आठ बांग्लादेशी नागरिकों समेत नौ को दी उम्रकैद की सजा; क्या है पूरा मामला?

Fri, 18 Sep 2026 12:21 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: जितेंद्र भारद्वाज Updated Fri, 18 Sep 2026 12:21 PM IST
सार

हैदराबाद में स्पेशल एनआईए कोर्ट ने मानव तस्करी के मामले में आठ बांग्लादेशी नागरिकों समेत 9 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। ये लोग अच्छी नौकरी का लालच देकर महिलाओं को भारत लाते थे। इसके बाद महिलाओं को जबरन वेश्यावृत्ति में धकेल दिया जाता था। आखिर 2019 में शुरू हुए इस पूरे तस्करी नेटवर्क का खुलासा कैसे हुआ? पढ़िए रिपोर्ट

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human trafficking case nia court sentences life imprisonment including  bangladeshi nationals
अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

हैदराबाद में एनआईए मामलों की स्पेशल कोर्ट ने 17 सितंबर को दिए अपने आदेश में, 2019 के मानव तस्करी के एक मामले में 8 बांग्लादेशी नागरिकों समेत 9 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला बांग्लादेशी महिलाओं की तस्करी करके उन्हें भारत लाने और बाद में जबरन वेश्यावृत्ति में धकेलने से जुड़ा था। कोर्ट ने दोषी आरोपियों पर कुल ₹1,37,000 का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर तीन महीने की साधारण कैद की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया है।
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यह मामला मानव तस्करी के एक ऐसे नेटवर्क से जुड़ा है, जो अच्छी नौकरी और ठीक-ठाक वेतन का लालच देकर बांग्लादेशी महिलाओं को भारत लाता था। फिर उन्हें जबरन वेश्यावृत्ति में धकेल देता था। यह मामला मूल रूप से तेलंगाना पुलिस ने हैदराबाद के पहाड़ी शरीफ पुलिस स्टेशन में दर्ज किया था। इस केस में सितंबर 2019 में कार्रवाई की गई थी, जिसके दौरान जलपल्ली गांव में चल रहे एक वेश्यालय से 3 बांग्लादेशी महिलाओं को और हैदराबाद के बालापुर इलाके की महमूद कॉलोनी के एक घर से एक अन्य महिला को बचाया गया था।
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इसके बाद एनआईए ने जांच अपने हाथ में ली और 12 अक्टूबर 2019 को इस मामले को RC-03/2019/NIA/HYD के तौर पर फिर से दर्ज किया। जांच के दौरान, तस्करी नेटवर्क में आरोपियों की भूमिका साबित हुई, जिसके बाद एनआईए ने 17 अक्तूबर 2020 को ए1 से ए12 तक के आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इनमें फरार आरोपी ए1, ए3 और ए7 भी शामिल थे।

जांच के दौरान, 2019 और 2020 में पश्चिम बंगाल और तेलंगाना समेत अलग-अलग जगहों से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इन आरोपियों- रूहूल अमीन ढाली (ए2), मो. यूसुफ खान उर्फ़ मो. इमरान (ए4), बिथी बेगम उर्फ खदीजा शेख (ए5), इमामुल गाजी उर्फ मो. राणा हुसैन (ए6), मोहम्मद अल मामून (ए8), सोजिब शेख (ए9), सुरेश कुमार दास उर्फ सागर (ए10), मो. अब्दुल्ला मुंशी उर्फ अब्दुल सरकार (ए11) और मो. अयूब शेख (ए12)- पर आईपीसी, फॉरेनर्स एक्ट, 1946 और इमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट, 1956 की अलग-अलग धाराओं के तहत मुकदमा चलाया गया।
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