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रुपानी के सीएम बनने से पहले क्या हुआ था उस कमरे में?
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 06 Aug 2016 04:20 PM IST
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विजय रुपानी।
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बीते सोमवार की देर रात गुजरात की सीएम आनंदीबेन पटेल सोशल साइट्स पर इस्तीफे की पेशकश करती हैं। उनका पोस्ट वायरल हो जाता है। मंगलवार की सुबह बीजेपी के सभी बड़े नेता इस पर स्टेटमेंट देने से बचते हैं। दोपहर में वैंकेया नायडु सामने आते हैं और बताते हैं कि बीजेपी पार्लियामेंट्री बोर्ड इस पर अंतिम निर्णय लेगा। शाम को प्रधानमंत्री के घर पर बोर्ड की मीटिंग होती है और आनंदीबेन पटेल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है। अमित शाह का बयान आता है कि गुजरात में नया सीएम कौन होगा इसका निर्णय विधायक दल की मीटिंग के बाद होगा। यह नाटकीय घटनाक्रम यहीं नहीं खत्म होता...
मंगलवार से गुरुवार तक नए सीएम के लिए नितिन पटेल, विजय रुपानी और भूपेंद्र सिंह चूड़ासमा के नाम पर लोगों में असमंजस था। इनमें नरेंद्र मोदी और अमित शाह के करीबी नितिन पटेल का नाम सबसे ऊपर था। शुक्रवार की सुबह से लेकर दोपहर तक यह बात सामने आती रही कि नितिन पटेल ही सीएम बनेंगे। आनंदीबेन पटेल भी उनकी पैरवी कर रही थीं। इसकी खबर मिलते ही नितिन पटेल अपने सीएम एजेंडे पर मीडिया में इंटरव्यू देने लगे। उनके घर पर पूजा होने लगी।
शाम चार बजे के करीब अमित शाह के घर पर मीटिंग शुरू होती है। मीटिंग के शुरुआती दौर में नितिन का ही नाम सबसे आगे रहता है। मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक, नितिन गडकरी, दिनेश शर्मा, संयुक्त संगठन महासचिव वी. सतीश और सरोज पांडेय पर्यवेक्षक के रूप में अपनी बात रख रहे होते हैं इसी बीच वी. सतीश के मोबाइल पर किसी का फोन आता है। वह बाहर जाते हैं और उनके अंदर लौटते ही अप्रत्याशित तौर पर गुजरात के सीएम के लिए विजय रुपानी के नाम का ऐलान हो जाता है। नितिन पटेल को डिप्टी सीएम बनाया जाता है।
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विजय रुपानी गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष हैं। उन्हें अमित शाह का करीबी माना जाता है। यह भी कहा जाता है कि साल 2010 में जब अमित शाह गुजरात से बाहर रहते थे तो वह उस समय राज्यसभा सांसद रहे विजय रुपानी के घर पर ही रुकते थे। यह भी कहा जा रहा है कि विजय के सीएम बनने से शाह गुजरात को अपने हिसाब से चला सकते हैं।
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मंगलवार से गुरुवार तक नए सीएम के लिए नितिन पटेल, विजय रुपानी और भूपेंद्र सिंह चूड़ासमा के नाम पर लोगों में असमंजस था। इनमें नरेंद्र मोदी और अमित शाह के करीबी नितिन पटेल का नाम सबसे ऊपर था। शुक्रवार की सुबह से लेकर दोपहर तक यह बात सामने आती रही कि नितिन पटेल ही सीएम बनेंगे। आनंदीबेन पटेल भी उनकी पैरवी कर रही थीं। इसकी खबर मिलते ही नितिन पटेल अपने सीएम एजेंडे पर मीडिया में इंटरव्यू देने लगे। उनके घर पर पूजा होने लगी।
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शाम चार बजे के करीब अमित शाह के घर पर मीटिंग शुरू होती है। मीटिंग के शुरुआती दौर में नितिन का ही नाम सबसे आगे रहता है। मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक, नितिन गडकरी, दिनेश शर्मा, संयुक्त संगठन महासचिव वी. सतीश और सरोज पांडेय पर्यवेक्षक के रूप में अपनी बात रख रहे होते हैं इसी बीच वी. सतीश के मोबाइल पर किसी का फोन आता है। वह बाहर जाते हैं और उनके अंदर लौटते ही अप्रत्याशित तौर पर गुजरात के सीएम के लिए विजय रुपानी के नाम का ऐलान हो जाता है। नितिन पटेल को डिप्टी सीएम बनाया जाता है।
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विजय रुपानी गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष हैं। उन्हें अमित शाह का करीबी माना जाता है। यह भी कहा जाता है कि साल 2010 में जब अमित शाह गुजरात से बाहर रहते थे तो वह उस समय राज्यसभा सांसद रहे विजय रुपानी के घर पर ही रुकते थे। यह भी कहा जा रहा है कि विजय के सीएम बनने से शाह गुजरात को अपने हिसाब से चला सकते हैं।
अमित शाह-आनंदीबेन में हुई बहस: सूत्र
विजय रुपानी
बताया जा रहा है कि मीटिंग के दौरान ही शाह और आनंदीबेन में बहस भी हुई। आनंदीबेन खुलकर नितिन पटेल का समर्थन कर रही थीं, लेकिन शाह इस पर सहमत नहीं थे। आनंदीबेन ने शाह पर भी कई तरह के आरोप भी लगाए। लेकिन, वी. सतीश को आए फोन ने पूरे सीनेरियो को बदल दिया और विजय रुपानी के नाम का ऐलान हो गया। वहीं, नितिन को डिप्टी सीएम बनाने का फार्मूला अपनाया गया।
सीएम के लिए फंसे पेंच को इसी तरह देखा जा सकता है कि विजय रुपानी के नाम का ऐलान होने के बाद भी नितिन पटेल के लिए संभावनाएं देखी गई। 22 साल बाद गुजरात में डिप्टी सीएम बनाया गया। इससे पहले साल 1994-95 में नरहरि अमीन वहां के डिप्टी सीएम थे। कुछ लोग बता रहे हैं कि यह प्रदेश में पटेलों की मजूबत स्थिति और पाटिदार आंदोलन के बाद की स्थिति के मद्देनजर ही यह निर्णय लिया गया।
सीएम के लिए फंसे पेंच को इसी तरह देखा जा सकता है कि विजय रुपानी के नाम का ऐलान होने के बाद भी नितिन पटेल के लिए संभावनाएं देखी गई। 22 साल बाद गुजरात में डिप्टी सीएम बनाया गया। इससे पहले साल 1994-95 में नरहरि अमीन वहां के डिप्टी सीएम थे। कुछ लोग बता रहे हैं कि यह प्रदेश में पटेलों की मजूबत स्थिति और पाटिदार आंदोलन के बाद की स्थिति के मद्देनजर ही यह निर्णय लिया गया।
महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में भी मोदी ले चुके हैं अप्रत्याशित फैसला
विजय रुपानी।
यह पहला मौका नहीं है जब नरेंद्र मोदी ने अपने निर्णय से लोगों को चौंकाया हो। इससे पहले महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में भी इसी तरह अप्रत्याशित तौर पर सीएम बनाए जा चुके हैं। इन राज्यों में मोदी जातीय समीकरण को खारिज करते हुए नया चेहरा सामने लेकर आए थे।
विजय लंबे अरसे से पार्टी की राजनीति और संगठन को देखते आ रहे हैं। 1987 में उन्होंने बतौर कॉरपोरेटर अपना करियर शुरू किया था। इसके बाद वह मेयर बने। साल 2006 में उन्हें गुजरात पर्यटन का अध्यक्ष बनाया गया। इसी साल उन्हें राज्यसभा में चुना गया और वह 2012 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। बताया जा रहा है कि इसी दौरान उनकी अमित शाह से नजदीकी बढ़ी। 2013 में नरेंद्र मोदी ने उन्हें म्युनिसिपल फाइनेंस का प्रेसिंडेट बनाया। इसके बाद 2015 में वह पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़े और जीते।
विजय लंबे अरसे से पार्टी की राजनीति और संगठन को देखते आ रहे हैं। 1987 में उन्होंने बतौर कॉरपोरेटर अपना करियर शुरू किया था। इसके बाद वह मेयर बने। साल 2006 में उन्हें गुजरात पर्यटन का अध्यक्ष बनाया गया। इसी साल उन्हें राज्यसभा में चुना गया और वह 2012 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। बताया जा रहा है कि इसी दौरान उनकी अमित शाह से नजदीकी बढ़ी। 2013 में नरेंद्र मोदी ने उन्हें म्युनिसिपल फाइनेंस का प्रेसिंडेट बनाया। इसके बाद 2015 में वह पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़े और जीते।