{"_id":"5ed927b77ec364773603d123","slug":"how-much-political-parties-contribute-to-pm-care-fund","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएम केयर्स फंड पर जानकारी साझा करने से पीएमओ का इनकार","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
पीएम केयर्स फंड पर जानकारी साझा करने से पीएमओ का इनकार
Thu, 04 Jun 2020 10:26 PM IST
मुकेश कुमार झा
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Thu, 04 Jun 2020 10:26 PM IST
विज्ञापन
पीएम मोदी
- फोटो : ANI
कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए हर वर्ग के लोग प्रधानमंत्री केयर्स फंड में अपना योगदान दे रहे है। लेकिन इस फंड में राजनीतिक दलों ने कितना योगदान दिया है इसकी जानकारी साझा करने से प्रधानमंत्री कार्यालय ने साफ मना कर दिया है। जानकारी नहीं मिलने से मायूस अनिल गलगली ने आशंका जताई है कि शायद ही किसी दल ने पीएम केयर फंड में योगदान दिया हो।
विज्ञापन
मुंबई के आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने पीएम केयर्स फंड को लेकर एकसाथ चार विभिन्न विषयों पर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में चार विभिन्न प्रकार का आरटीआई आवेदन भी किया था। इनकी सभी आरटीआई को यह कहकर खारिज किया गया कि पीएम केयर्स फंड आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2 (एच) के अंतर्गत एक सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है। हालांकि, पीएम केयर्स फंड के संबंध में प्रासंगिक जानकारी वेबसाईट pmcares.gov.in पर देखी जा सकती है।
विज्ञापन
अनिल गलगली ने दूसरे आरटीआई में विभिन्न लोगों द्वारा जमा चेक की स्थिती और बाउंस होने की स्थिति में की गई कारवाई का ब्यौरा मांगा था। जबकि तीसरी आरटीआई में उन्होंने पीएम केअर फंड से कोविड-19 के तहत राज्यों को आबंटित धनराशि की जानकारी मांगी थी। गलगली का मानना हैं कि हर राज्य पीएम केयर फंड से आस लगाए बैठा हैं। यह जानकारी महत्वपूर्ण होने के बावजूद पीएमओ ने साझा नहीं किया। चौथी आरटीआई में पीएम केअर फंड में दानदाताओं द्वारा जमा धनराशि और उससे कोविड-19 के नियंत्रण और रोकथाम पर किए गए खर्च का ब्यौरा मांगा था। दरअसल, कोविड पर काम करनेवाले सभी प्रकार के लोगों को पीपीई किट्स, मास्क नहीं मिलने की शिकायत हैं। कई अस्पतालों में उपकरणों की किल्लत हैं। ऐसे में यह जानकारी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन इसकी जानकारी भी साझा नहीं की गई।
विज्ञापन
वेबसाइट भी छुपाती हैं जानकारी
अनिल गलगली के चारों आरटीआई में से एक का भी जबाब नहीं मिला। वेबसाइट पर भी जमा धनराशि और खर्च का ब्यौरा नहीं है। जबकि सार्वजनिक प्राधिकरण न होते हुए भी वेबसाइट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर दिख रही थी। अनिल गलगली ने मांग की हैं कि जमा धनराशि दान से आने से इसका हिसाब वेबसाइट पर अपलोड करना चाहिए ताकि किसी को आरटीआई करने की आवश्यकता न हो।