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Tariff War: टैरिफ वॉर से भारत को कितना नुकसान, इस चुनौती से कैसे निपटेगा देश? समझिए सभी समीकरण

Thu, 03 Apr 2025 01:00 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Thu, 03 Apr 2025 01:00 PM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत अन्य देशों पर जवाबी टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है। ट्रंप ने भारत से आयात होने वाली वस्तुओं पर 26 फीसदी शुल्क लगाने की घोषणा की है। कंबोडिया से आयातित वस्तुओं पर 49 फीसदी और चीन से आयात होने वाले सामान पर 34 फीसदी शुल्क लगाने का एलान किया गया है।

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How much loss will India face due to Donald Trump tariff war, how will the country deal with this challenge?
Donald Trump - फोटो : PTI

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो अप्रैल से पूरी दुनिया के देशों पर भारी टैरिफ वॉर थोप दिया है। इसमें कंबोडिया पर 49 प्रतिशत, मेडागास्कर पर 47 प्रतिशत, वियतनाम पर 46 प्रतिशत और थाईलैंड पर 36 प्रतिशत जैसी ऊंची दरें थोपी गई हैं तो ब्रिटेन, सिंगापुर, इजिप्ट, यूएई और न्यूजीलैंड जैसे अनेक देशों पर टैरिफ वॉर की सबसे कम दर यानी 10 प्रतिशत का टैक्स लगाया गया है। 

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भारत में अमेरिकी सामानों के आयात पर औसतन 52 प्रतिशत टैक्स लगता है। इसकी तुलना में अमेरिका ने अपने यहां भारत से आयात होने वाली वस्तुओं पर 26 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है। यानी आज की स्थिति में भी भारत अमेरिका की तुलना में आधा टैक्स ही ले रहा है। अमेरिका ने भारत को कोई विशेष रियायत नहीं दी है क्योंकि उसने इसी तरह अपने देश के सामानों पर दूसरे देशों में लगने वाले टैक्स की तुलना में लगभग आधा टैक्स कई दूसरे देशों (जापान, चीन, स्विटजरलैंड, ताईवान, साउथ कोरिया, थाईलैंड सहित अनेक देश) पर भी लगाया है। ऐसे में यह अकेले भारत के लिए कोई बड़ी छूट नहीं है। 
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इसके बाद भी इसका एक संकेत यह भी माना जा रहा है कि अमेरिका ने भारत के सामने विकल्प खुले रखे हैं। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई देश अपने उचित तर्क उसके सामने रखता है तो वह अपनी दरों में संशोधन पर विचार कर सकता है। ट्रंप के टैरिफ वॉर की घोषणा के बाद जिस तरह भारत ने अपनी तरफ से अमेरिकी वस्तुओं पर टैक्स दरें कम की हैं, और भारतीय अधिकारी अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में हैं और दरों को नीतिसंगत बनाने पर विचार किया जा रहा है, माना जा रहा है कि दोनों देश इस मामले में एक उचित स्थिति में पहुंच सकते हैं। 

अमेरिका द्वारा भारत की तुलना में आधी टैक्स दरें लगाने के बाद भी यह निर्णय भारत के व्यापार को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। इसका बड़ा कारण यह है कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है। वर्ष 2024 में भारत-अमेरिका के बीच 129 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार हुआ था। यह व्यापार बहुत हद तक भारत के पक्ष में झुका हुआ है। टैक्स लगाने से भारतीय वस्तुओं के अमेरिका में महंगा होने से उनकी बिक्री पर असर पड़ सकता है। 


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हालांकि, दूसरे देशों पर भी समान रूप से टैरिफ बढ़ाए गए हैं, ऐसे में यह असर केवल भारतीय वस्तुओं पर ही नहीं होगा और अंततः सभी वस्तुओं की कीमतें लगभग एक समान रूप से बढ़ेंगी। लेकिन वस्तुओं के महंगे होने से उनकी खपत कम हो जाती है, इसका सीधा नुकसान भारतीय निर्यातकों को हो सकता है। भारतीय व्यापारियों का अनुमान है कि इस निर्णय से उन्हें सीधे तौर पर नौ अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। वे अमेरिका के खिलाफ कठोर कदम उठाने और अमेरिकन वस्तुओं के बहिष्कार की बात भी कर रहे हैं। 


भारत अमेरिका के कुल व्यापार में बहुत छोटी हिस्सेदारी रखता है। वह अपनी आवश्यकता की सबसे अधिक चीजों को चीन, मेक्सिको, कनाडा और यूरोपीय देशों से पूरा करता है। ऐसे में भारत के व्यापारी अपने उत्पादों को गुणवत्ता की दृष्टि में बेहतर बनाए रखते हुए चुनौती को झेलने में सफल हो सकते हैं। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ वॉर का मिलाजुला असर हो सकता है। 

बचा रहेगा यह क्षेत्र
ट्रंप के कोप से भारत का केवल एक क्षेत्र बचा हुआ है। वह है भारत का फार्मास्युटिकल क्षेत्र जो अमेरिकी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारी मात्रा में सर्जिकल आइटम भेजता है। अमेरिका में स्वास्थ्य सेवाएं पहले ही बहुत महंगी हैं। अमेरिकी नागरिक स्वास्थ्य इंश्योरेंस के बिना अस्पतालों का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं हैं। यदि अमेरिका फार्मास्युटिकल वस्तुओं पर भी टैक्स लगाता तो इसका सीधा असर पूरे अमेरिका पर होता और इससे अमेरिका में इंस्योरेंश की दरें भी बढ़ सकती थीं। यही कारण है कि अमेरिका ने इस सेक्टर को फिलहाल टैरिफ वॉर से बाहर रखा है। भारत इसका बेहतर लाभ उठा सकता है।

टैक्स वापस ले अमेरिका: CTI 
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अधिकारी बृजेश गोयल ने कहा कि ट्रंप के इस टैरिफ वॉर से भारत को लगभग 7 अरब डॉलर वार्षिक का नुकसान हो सकता है। इसका असर हमारे सामान्य कृषि उत्पादकों, श्रमिकों, धातुओं, आभूषण, चमड़ा और सूती वस्त्र उद्योग में काम कर रहे लोगों पर पड़ सकता है। प्री-ऑर्डर को लेकर भी ट्रेडर्स दुविधा में हैं। बिजनेस में अनिश्चितता का माहौल है। व्यापारी संगठन अमेरिकी सामानों के खिलाफ कैंपेन शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। 

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