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आरटीआई एक्ट: एक साल में कितने CAPF जवानों को मिली 100 दिनों की छुट्टी, गृह मंत्रालय ने सूचना देने से किया इंकार
Tue, 30 Mar 2021 02:41 PM IST
Harendra Chaudhary
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 30 Mar 2021 02:41 PM IST
सार
दिसंबर 2019 को सीआरपीएफ की नई बिल्डिंग का नींव का पत्थर रखने पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था, ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिसके अंतर्गत केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान 100 दिनों की छुट्टी अपने परिजनों के साथ बिता सकेंगे...
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श्रीनगर में सीआरपीएफ जवान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा आरटीआई एक्ट के तहत मांगी गई वह सूचना देने से मना कर दिया है, जिसमें यह पूछा गया था कि केंद्रीय सुरक्षा बलों के कितने जवानों को एक साल में 100 दिन की छुट्टी मिली है। एसोसिएशन ने दूसरी आरटीआई में सीआईएसएफ से जवानों के वार्षिक अवकाश को लेकर जानकारी मांगी थी, संबंधित बल ने भी यह सूचना देने से इंकार कर दिया।
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एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि दोनों ही मामलों में आरटीआई एक्ट 2005 की धारा-24 व सब सेक्शन-2 को ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया गया। इस एक्ट में कहा गया है कि सुरक्षा बलों को भ्रष्टाचार व मानव अधिकारों के अतिक्रमण को छोड़कर अन्य सूचना देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। रणबीर सिंह ने भारत सरकार से मांग की है कि केंद्रीय सुरक्षा बलों में जवानों द्वारा आत्महत्या करने के मामले बढ़ते जा रहे हैं, इस बाबत श्वेत पत्र जारी किया जाए।
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एसोसिएशन के मुताबिक, यह आरटीआई दिनांक 28 जनवरी 2021 को लगाई गई थी। दिसंबर 2019 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जब सीआरपीएफ की नई बिल्डिंग का नींव पत्थर रखने पहुंचे थे, तो उस दौरान उन्होंने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों के लिए एक अहम घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिसके अंतर्गत केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान 100 दिन की छुट्टी अपने परिजनों के साथ बिता सकेंगे।
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इन बलों में सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी व असम राइफल्स शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय में लगाई गई आरटीआई के जरिए यह पूछा गया कि कितने जवानों को वर्ष 2020 के दौरान 100 दिन का वार्षिक अवकाश दिया गया है। सीआईएसएफ से यह जानना चाहा कि मौजूदा समय में जवानों को मात्र 30 दिन का वार्षिक अवकाश मिलता है, तो ऐसे में सौ दिन की छुट्टी कैसे संभव होगी। इसके लिए जवानों को पहले 60 दिन का वार्षिक अवकाश देना पड़ेगा। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का तर्क है, अगर यह नहीं किया जाता है तो सीआईएसएफ जवानों को 100 दिन का अवकाश देना भी संभव नहीं हो सकेगा।
रणबीर सिंह कहते हैं, भारतीय सेनाओं के तीनों अंगों व केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में (सीआईएसएफ को छोड़कर) 60 दिन का वार्षिक अवकाश मिलता है। अगर आकस्मिक छुट्टियों की बात की जाए तो सेना के तीनों अंगों में 30 दिन का आकस्मिक अवकाश दिया जाता है। दूसरी तरफ, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों को मात्र 15 दिन का आकस्मिक अवकाश देने का प्रावधान है। आरटीआई के माध्यम से यह भी पूछा गया कि क्या सीआईएसएफ जवानों को 30 दिन की बजाय 60 दिन का वार्षिक अवकाश दिया जाएगा।
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा इस तरह की व्यवस्था लागू करने के लिए एक ज्ञापन केंद्रीय गृह मंत्रालय व सीआईएसएफ हैडक्वार्टर को सौंपा गया था। इस पर कोई कार्रवाई हुई है, यह जानकारी मांगी गई थी। दिनांक 25 मार्च 2021 को आरटीआई के जवाब में सीआईएसएफ मुख्यालय ने उपरोक्त जानकारी देने में असमर्थता जताई। यहां पर संबंधित बल ने आरटीआई एक्ट 2005 की धारा-24 व सबसेक्शन-2 को ढाल के तौर पर इस्तेमाल है। ये वही एक्ट है, जिसमें लिखा है कि केंद्रीय सुरक्षा बलों में भ्रष्टाचार व मानवाधिकारों के अतिक्रमण को छोड़कर अन्य कोई सूचना देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
एसोसिएशन के महासचिव का कहना है कि यह सीधे तौर पर मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मामला है। केंद्रीय सुरक्षा बलों में कम छुट्टियों, अफसरशाही का गलत रवैया व अन्य घरेलू कारणों के चलते इन सुरक्षा बलों में पिछले छह वर्षों के दौरान 700 कार्मिकों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले सामने आए हैं। यह बहुत खेदजनक है कि इन बलों के जवानों के कल्याण से संबंधित आरटीआई का जवाब तक नहीं दिया गया। इससे वह घोषणा बेमानी लगने लगती है, जिसमें जवानों को अपने परिवार के साथ सौ दिन बिताने की बात कही गई थी। शक होने लगता है कि कहीं वह घोषणा झूठ तो नहीं थी।
बतौर रणबीर सिंह, जवान अपने परिवार के बीच सौ दिन गुजारेंगे, अब वह घोषणा कहीं एक जुमला साबित न हो जाए। पिछले एक साल से कोरोना महामारी, किसान आंदोलन, असम, पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की अधिकता के चलते जवान अपना सालाना अवकाश भी पूरी तरह नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में 100 दिन अवकाश का फार्मूला लागू करना तो दूर की बात है।