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ISRO: अंतरिक्ष में जीवन कैसे काम करता है? ये पता लगाने के लिए इसरो का 'POEM' तैयार

Sun, 22 Dec 2024 09:09 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नितिन गौतम Updated Sun, 22 Dec 2024 09:09 AM IST
सार

पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के अगले प्रक्षेपण में एक नहीं, बल्कि तीन जैविक प्रयोग किए जाएंगे, जिनमें तीन अलग-अलग जीवित कोशिकाओं को अंतरिक्ष के शून्य में भेजा जाएगा। जिन जीवित कोशिकाओं को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, उनमें पालक, लोबिया और आंत के बैक्टीरिया शामिल हैं। 

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how life works in space study Isro drafts POEM for experiments with living cells
इसरो का पीएसएलवी - फोटो : एक्स/इसरो
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विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो जल्द ही नया स्पेस मिशन लॉन्च करने जा रही है। इस मिशन में ये पता लगाया जाएगा कि अंतरिक्ष में जीवन कैसे काम करता है। इस मिशन के तहत इसरो अपने पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) की मदद से जैविक प्रयोग करेगा, जिसमें जीवित कोशिकाओं (Living Cells) को रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और फिर ये देखा जाएगा कि ये जीवित कोशिकाएं अंतरिक्ष के माहौल में जीवित रह पाती हैं या नहीं। 
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पालक, लोबिया और आंत के बैक्टीरिया की कोशिकाएं अंतरिक्ष में भेजी जाएंगी
पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के अगले प्रक्षेपण में एक नहीं, बल्कि तीन जैविक प्रयोग किए जाएंगे, जिनमें तीन अलग-अलग जीवित कोशिकाओं को अंतरिक्ष के शून्य में भेजा जाएगा। जिन जीवित कोशिकाओं को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, उनमें पालक, लोबिया और आंत के बैक्टीरिया शामिल हैं। इसरो के इस मिशन को नाम दिया गया है पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल-4 (POEM-4)। अंतरिक्ष में किसी भी कोशिका का जीवित रहना मुश्किल है। इसरो के मिशन के तहत एक छोटे सीलबंद बक्से में तीनों जीवित कोशिकाओं को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा और फिर उनके परिणाम जुटाए जाएंगे। पीएसएलवी के चौथे चरण को अकादमिक रिसर्च के लिए उपलब्ध कराया गया है। 
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कुल 24 पेलोड अंतरिक्ष में भेजेगा इसरो
इसरो के अध्यक्ष डॉ. एस सोमनाथ ने कहा, 'भारत से अंतरिक्ष में जैविक प्रयोग का यह पहला प्रयास है। हमें जल्द ही खगोल जीव विज्ञान पर अध्ययन शुरू करना होगा, और अब इसरो PSLV की मदद से इसकी शुरुआत कर रहा है। इससे भारतीय जीवविज्ञानियों को पता चलेगा कि अंतरिक्ष के प्रतिकूल वातावरण में जीवन कैसे काम करता है।' इसरो ने अभी इस प्रक्षेपण की तारीख नहीं बताई है, लेकिन कहा है कि जल्द ही लॉन्च किया जाएगा। इस लॉन्च में स्पेस डॉकिंग परीक्षण भी किया जाएगा, जिसमें इसरो पहली बार अंतरिक्ष में किसी सैटेलाइट को डॉक और अनडॉक करने का परीक्षण करेगा। स्पेस डॉकिंग परीक्षण के अलावा इसरो पीएसएलवी के चौथे चरण में कुल 24 पेलोड अंतरिक्ष में भेजेगा, जो मुख्यतः रिसर्च और अकादमिक उद्देश्य से भेजे जाएंगे।
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आंत के बैक्टीरिया से मिल सकती है अहम जानकारी
अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन पर बड़े पैमाने पर जैविक प्रयोग किए जा रहे हैं, लेकिन भारत ने भी इस दिशा में पहल शुरू कर दी है। मुंबई में एमिटी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक अंतरिक्ष के शून्य गुरुत्वाकर्षण में पालक की कोशिका की ग्रोथ पर परीक्षण कर रहे हैं। इसी तरह बंगलूरू के एक इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा आंत के बैक्टीरिया को लेकर परीक्षण किया जा रहा है कि वह अंतरिक्ष में कैसे काम करता है। अंतरिक्ष में आंत के बैक्टीरिया की जीन रेगुलेशन पर भी नजर रखी जाएगा। इससे अंदाजा लग सकता है कि अंतरिक्ष में इंसानी शरीर को लेकर अहम जानकारी मिल सकती है। इसरो के तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस स्टेशन में लोबिया का शून्य गुरुत्वाकर्षण में परीक्षण किया जा रहा है। 
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