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रंगों से होती है भगोड़े अपराधियों के जुर्म की पहचान, ऐसे जारी होता है इंटरनेशनल वारंट

Sun, 09 Sep 2018 11:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 09 Sep 2018 11:22 AM IST
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How Interpol and its notice helps for the arrests of international criminals

आजकल नीरव मोदी और माल्या जैसे अपराधी सुर्खियों में बने हुए हैं। वह भारतीय बैंकों को चूना लगाकर विदेशों में छिपकर बैठे हैं। तो ऐसे में लोगों के जहन में ये सवाल उठना लाजमी है कि क्या अपराध करने के बाद भी वह आजादी से रह सकते हैं? और उन्हें पकड़ने के लिए क्या कोई रास्ता नहीं है? तो आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं। ऐसे अपराधियों को पकड़ने के लिए भी दुनियाभर के दोशों ने पुख्ता इंतजाम किए हुए हैं। इसके लिए एक संस्था है जिसका नाम है इंटरपोल। ये संस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुलिस के बीच समन्वय का काम करती है।

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इंटरपोल (इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन) नामक संस्था उन्हीं देशों के बीच समन्वय का काम करती है जो इसके सदस्य हैं। इस वक्त इस संस्था के कुल 192 देश सदस्य हैं। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराधियों को पकड़ने के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं। नियमों में सबसे प्रमुख ये है कि एक देश का अपराधी अगर दूसरे देश में जाकर छिप जाता है तो पहले देश वाली पुलिस उसे वहां जाकर नहीं पकड़ सकती। ऐसे ही खतरनाक और भगोड़े अपराधियों को पकड़ने के लिए ये संस्था काम करती है।
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हर देश में होते हैं इसके कर्मचारी

भागे हुए अपराधियों को पकड़ने के लिए हर देश में इंटरपोल के कर्मचारी होते हैं। इसके साथ ही दुनिया के विभिन्न देशों की राजधानियों में हर साल इसके सदस्यों की बैठक भी होती है। इसकी वेबसाइट पर भी लिखा मिलेगा 'कनेक्टिंग पुलिस फॉर अ सेफर वर्ल्ड'। यानि एक सुरक्षित दुनिया के लिए पुलिस को जोड़ना। इंटरपोल की वेबसाइट पर विभिन्न देशों में हो रहे अपराधों के बारे में भी खबरें मिल जाएंगी। साथ ही इसकी वेबसाइट पर मोस्ट वांटेड लोगों की सूची में 160 भारतीयों के नाम हैं। 

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8 प्रकार के नोटिस जारी करने का है अधिकार

How Interpol and its notice helps for the arrests of international criminals

इंटरपोल के पास आठ तहर के नोटिस जारी करने का अधिकार है। इसके ये नोटिस अपने रंगों से पहचाने जाते हैं और सूचना के आदान प्रदान की प्रक्रिया की तहत इस्तेमाल किए जाते हैं। जब संस्था का कोई सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग का आवेदन करता है तो नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के आग्रह पर इंटरपोल का जनरल सेक्रेटरी नोटिस जारी करता है।  

कई बार हम लाल नोटिल, नीला नोटिस आदि के बारे में सुनते हैं लेकिन इनका मतलब समझने में दिक्कत भी होती है। तो चलिए आपको इन विभिन्न प्रकार के नोटिस के बारे में बताते हैं जो कि अपने रंगों से जाने जाते हैं-

- लाल नोटिस

लाल नोटिस किसी अपराधी को गिरफ्तार करने और उसके प्रत्यपर्ण के लिए जारी होता है। हाल ही में नीरव मोदी के सहयोगी मिहिर भंसाली की भारत में वापसी कराने के लिए इंटरपोल ने रेड कार्नर नोटिस यानि लाल नोटिस जारी किया है। संस्था ने अपने सभी सदस्य देशों से उसे गिरफ्तार करने को कहा है।

- नीला नोटिस

नीले नोटिस को किसी व्यक्ति के बारे में अतिरिक्त सूचना देने या फिर पाने के लिए जारी किया जाता है।

- हरा नोटिस

कई बार अपराधी एक देश में अपराध कर दूसरे देशों में भाग जाते हैं और उस देश में भी अपराध करने लगते हैं। तो ऐसे लोगों को गिरफ्तार करने के लिए हरे नोटिस को जारी किया जाता है। हरे नोटिस के जरिए ऐसे व्यक्ति के बारे में चेतावनी दी जाती है कि वह एक देश में तो अपराध कर चुका है और आशंका है कि दूसरे देश में जाकर भी अपराध कर सकता है।

- पीला नोटिस

कई बार बच्चों या महिलाओं का अपहरण कर या तस्करी कर उन्हें दूसरे देशों में भेजा जाता है। ऐसे लापता लोगों के बारे में सूचनाएं देने के लिए पीले नोटिस को जारी किया जाता है।

- काला नोटिस

काला नोटिस किसी लाश की शिनाख्त न होने पर जारी किया जाता है।

- नारंगी नोटिस

नारंगी नोटिस बमों, पार्सल बमों आदि के बारे में सूचना देने के लिए जारी किया जाता है।

- बैंगनी नोटिस

यह नोटिस अपराधियों द्वारा बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों के लिए जारी किया जाता है। 

इंटरपोल द्वारा वारंट जारी करना

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इंटरपोल मुख्य रूप से तीन अपराधों के लिए अपनी पुलिस क्षमताओं का इस्तेमाल करती है। इनमें पहला है काउंटर आतंकवाद, दूसरा है साइबर अपराध और तीसरा है संगठित अपराध। भारत 69 साल पहले यानि 1949 में इसका सदस्य बना था। इसका सालाना बजट 942 करोड़ रुपये है। इसकी शुरुआत 1923 में हुई थी।

20 देशों की सदस्यता से शुरू हुआ था इंटरपोल

जब इंटरपोल की स्थापना हुई तब इसके केवल 20 देश ही सदस्य थे। इसकी शुरुआत प्रथम विश्व युद्ध के बाद की गई। उस समय अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही थी और अपराधी भी बचने के लिए दूसरे देशों की शरण लेने लगे। जिसके बाद ऑस्ट्रिया के वियना में पुलिस अधिकारियों की एक बैठक हुई और 20 देशों ने इसकी स्थापना की। इंटरपोल का संविधान 1956 में बनाया गया।

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