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Education Policy: 34 साल बाद कैसे तैयार हुई भारत की नई शिक्षा नीति,भाजपा सांसद वीडी शर्मा ने गिनाईं ये खूबियां
Tue, 17 Dec 2024 04:50 PM IST
शुभम कुमार
डिजिटल ब्यूरो
डिजिटल ब्यूरो
Published by: शुभम कुमार
Updated Tue, 17 Dec 2024 04:50 PM IST
सार
भाजपा सांसद वीडी शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति से छात्रों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के साथ शिक्षा स्तर में सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। केद्र सरकार का नई एजुकेशन पॉलिसी का उद्देश्य शिक्षा को रोजगार के साथ जोड़ना है, ताकि विद्यार्थियों को आवश्यक कौशल व ज्ञान मिल सके।
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और खजुराहो से सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने मंगलवार को राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लेकर प्रेस वार्ता की। शर्मा ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। आज हम वर्ष 2013-2014 में शिक्षा व्यवस्था से बहुत आगे बढ़ चुके हैं। देश की आजादी के बाद मैकाले की शिक्षा पद्धति चल रही थी। हम लोग वर्षों से मांग कर रहे थे, शिक्षा पद्धति में बदलाव किया जाए। प्रधानमंत्री मोदी ने नई शिक्षा नीति को लागू करते शिक्षा को समावेशी, सुलभ और वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने की निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया है।
नई शिक्षा नीति के उद्देश्य पर डाला प्रकाश
वीडी शर्मा ने कहा, नई शिक्षा नीति से छात्रों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के साथ शिक्षा स्तर में सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। केद्र सरकार का नई एजुकेशन पॉलिसी का उद्देश्य शिक्षा को रोजगार के साथ जोड़ना है, ताकि विद्यार्थियों को आवश्यक कौशल व ज्ञान मिल सके। जिससे छात्रों को कई विकल्प व अवसर मिल सके। विश्वविद्यालय के छात्रों को अब कई विकल्प मिल रहे हैं। अब 1 साल में सर्टिफिकेट, 2 साल में डिप्लोमा और 3 साल में डिग्री प्राप्त होगी।
शर्मा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, नई शिक्षा नीति में वह सब कुछ है, जो वर्तमान परिदृश्य में छात्रों को आज जानने की आवश्यकता है। शिक्षा तंत्र को सुधार कर वैश्विक बनाने के लिए यह नीति लाई गई है। गरीब, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का पूरा प्रयास किया गया है। लड़कियों, दिव्यांगों के लिए भी अलग से प्रावधान किए गए हैं। 1986 के बाद 34 वर्षों बाद नई शिक्षा नीति लाने की प्रक्रिया को प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने शुरू किया। आज प्रधानमंत्री पीएम मोदी विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थान के निर्माण की प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं।
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नई शिक्षा नीति लाने की प्रक्रिया 2015 से शुरू हुई थी, जिसमें ढाई लाख ग्राम पंचायतों, 6600 विकासखंड, 6000 नगरीय निकाय और 6 हजार 76 जिलों से करीब दो लाख सुझावों के बाद यह नई शिक्षा नीति लाने का कार्य किया गया है। नई शिक्षा नीति व्यक्ति के समग्र विकास, सभी को सुलभ शिक्षा देने और भारत में ज्ञान आधारित समाज बनाने की परिकल्पना को साकार करने के लिए बनाया गया है। केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति में खेल आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
एनसीईआरटी द्वारा तैयार किया गया ढांचा
उन्होंने कहा, एनसीईआरटी द्वारा नई शिक्षा नीति के तहत जो पाठ्यक्रम, शिक्षा ढांचा तैयार किया गया है, वह बदलते समय के साथ छात्रों को शिक्षा देने के अनुकूल करने और 21वीं सदी की आवश्यकताओं को पूरा करने का कार्य करेगा। इनमें कला, विज्ञान, मानविकी विज्ञान को स्थान मिला है। इसमें मातृभाषा आधारित शिक्षा के महत्व को स्वीकार किया गया है। शिक्षा मातृभाषा, स्थानीय भाषा और क्षेत्रीय भाषा में स्किल डेवलपमेंट का पूरा समायोजन किया गया है। 2022 में उच्च शिक्षा संस्थानों में कुल फैकल्टी की संख्या में 12.1 प्रतिशत की वृद्धि एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही महिला फैकल्टी की संख्या में 29.1 की वृद्धि भी हुई है। 2014-15 में उच्च शिक्षा में 3.2 करोड़ नामांकन था, जो वर्ष 2022 में बढ़कर 4.6 करोड़ हुआ है। महिला नामांकन में 30.4 प्रतिशत की वृद्धि होना यह दर्शाता है कि नई शिक्षा नीति लैंगिक समानता में भी वृद्धि हुई है।
नई शिक्षा नीति से छात्रों की संख्या में वृद्धि
भाजपा सांसद ने कहा कि इस शिक्षा नीति के लागू होने से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की संख्या में भी 50.1 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। नई शिक्षा से अनुसूचित जाति की महिला नामांकन में 61 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति में नामांकन में 75 और कुल महिला नामांकन में 96.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पूर्वांचल के क्षेत्र में भी महिलाओं की नामांकन संख्या में लगभग 43 प्रतिशत की वृद्धि होना क्षेत्र के लिए एक बेहतर प्रयास है। मान्यता प्राप्त कॉलेज की संख्या 2015 में 6241 से आज 2024 में 9807 हुई है। इसी प्रकार से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों की संख्या में नई शिक्षा नीति आने के बाद दोगुनी से अधिक 120 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
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नई शिक्षा नीति के उद्देश्य पर डाला प्रकाश
वीडी शर्मा ने कहा, नई शिक्षा नीति से छात्रों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के साथ शिक्षा स्तर में सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। केद्र सरकार का नई एजुकेशन पॉलिसी का उद्देश्य शिक्षा को रोजगार के साथ जोड़ना है, ताकि विद्यार्थियों को आवश्यक कौशल व ज्ञान मिल सके। जिससे छात्रों को कई विकल्प व अवसर मिल सके। विश्वविद्यालय के छात्रों को अब कई विकल्प मिल रहे हैं। अब 1 साल में सर्टिफिकेट, 2 साल में डिप्लोमा और 3 साल में डिग्री प्राप्त होगी।
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शर्मा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, नई शिक्षा नीति में वह सब कुछ है, जो वर्तमान परिदृश्य में छात्रों को आज जानने की आवश्यकता है। शिक्षा तंत्र को सुधार कर वैश्विक बनाने के लिए यह नीति लाई गई है। गरीब, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का पूरा प्रयास किया गया है। लड़कियों, दिव्यांगों के लिए भी अलग से प्रावधान किए गए हैं। 1986 के बाद 34 वर्षों बाद नई शिक्षा नीति लाने की प्रक्रिया को प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने शुरू किया। आज प्रधानमंत्री पीएम मोदी विश्वस्तरीय शिक्षण संस्थान के निर्माण की प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं।
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नई शिक्षा नीति लाने की प्रक्रिया 2015 से शुरू हुई थी, जिसमें ढाई लाख ग्राम पंचायतों, 6600 विकासखंड, 6000 नगरीय निकाय और 6 हजार 76 जिलों से करीब दो लाख सुझावों के बाद यह नई शिक्षा नीति लाने का कार्य किया गया है। नई शिक्षा नीति व्यक्ति के समग्र विकास, सभी को सुलभ शिक्षा देने और भारत में ज्ञान आधारित समाज बनाने की परिकल्पना को साकार करने के लिए बनाया गया है। केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति में खेल आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
एनसीईआरटी द्वारा तैयार किया गया ढांचा
उन्होंने कहा, एनसीईआरटी द्वारा नई शिक्षा नीति के तहत जो पाठ्यक्रम, शिक्षा ढांचा तैयार किया गया है, वह बदलते समय के साथ छात्रों को शिक्षा देने के अनुकूल करने और 21वीं सदी की आवश्यकताओं को पूरा करने का कार्य करेगा। इनमें कला, विज्ञान, मानविकी विज्ञान को स्थान मिला है। इसमें मातृभाषा आधारित शिक्षा के महत्व को स्वीकार किया गया है। शिक्षा मातृभाषा, स्थानीय भाषा और क्षेत्रीय भाषा में स्किल डेवलपमेंट का पूरा समायोजन किया गया है। 2022 में उच्च शिक्षा संस्थानों में कुल फैकल्टी की संख्या में 12.1 प्रतिशत की वृद्धि एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही महिला फैकल्टी की संख्या में 29.1 की वृद्धि भी हुई है। 2014-15 में उच्च शिक्षा में 3.2 करोड़ नामांकन था, जो वर्ष 2022 में बढ़कर 4.6 करोड़ हुआ है। महिला नामांकन में 30.4 प्रतिशत की वृद्धि होना यह दर्शाता है कि नई शिक्षा नीति लैंगिक समानता में भी वृद्धि हुई है।
नई शिक्षा नीति से छात्रों की संख्या में वृद्धि
भाजपा सांसद ने कहा कि इस शिक्षा नीति के लागू होने से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की संख्या में भी 50.1 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। नई शिक्षा से अनुसूचित जाति की महिला नामांकन में 61 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति में नामांकन में 75 और कुल महिला नामांकन में 96.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पूर्वांचल के क्षेत्र में भी महिलाओं की नामांकन संख्या में लगभग 43 प्रतिशत की वृद्धि होना क्षेत्र के लिए एक बेहतर प्रयास है। मान्यता प्राप्त कॉलेज की संख्या 2015 में 6241 से आज 2024 में 9807 हुई है। इसी प्रकार से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों की संख्या में नई शिक्षा नीति आने के बाद दोगुनी से अधिक 120 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।