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President Election: 25 जुलाई को ही शपथ क्यों लेते हैं राष्ट्रपति? आम चुनाव से कितना अलग है महामहिम का चुनाव

Tue, 14 Jun 2022 11:51 AM IST
जयदेव सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जयदेव सिंह Updated Tue, 14 Jun 2022 11:51 AM IST
सार

15 जून को चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नामांकन की अंतिम तारीख 29 जून है। मतदान 18 जुलाई को होगा। नतीजे 21 जुलाई को आएंगे। इसके बाद 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नए राष्ट्रपति को शपथ दिलाएंगे।

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राष्ट्रपति चुनाव। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का एलान हो चुका है। बुधवार को इसे लेकर अधिसूचना भी जारी हो जाएगी। 25 जुलाई को देश के नए राष्ट्रपति शपथ ले लेंगे। बीते 45 साल में ये लगातार 10वां मौका होगा जब 25 जुलाई को देश के नए राष्ट्रपति शपथ लेंगे। 

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 25 जुलाई को ही क्यों शपथ लेते हैं राष्ट्रपति? 1977 से पहले किस राष्ट्रपति ने किस तारीख को शपथ ली थी? कितने राष्ट्रपति अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके? कौन से उप-राष्ट्रपति ऐसे जिन्होंने संभाली कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी? आइये जानते हैं…

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क्या हमेशा 25 जुलाई को ही शपथ लेते रहे हैं राष्ट्रपति?

नहीं, ऐसा नहीं है। देश में 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र लागू हुआ। उसी दिन डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने। डॉक्टर प्रसाद 12 साल तक इस पद पर रहे। 13 मई 1962 को डॉक्टर राधाकृष्णन देश के दूसरे राष्ट्रपति बने। उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। 

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पांच साल बाद 13 मई 1967 को डॉक्टर जाकिर हुसैन देश के तीसरे राष्ट्रपति बने। डॉक्टर हुसैन अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। 3 मई 1969 को उनका निधन हो गया। हुसैन के निधन के बाद उप-राष्ट्रपति वीवी गिरि कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। इसके बाद होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 

वीवी गिरि के इस्तीफे के बाद उस वक्त सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद हिदायतउल्ला कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त हुए। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद 24 अगस्त 1969 को वीवी गिरि नए राष्ट्रपति बने। गिरि ने अपना कार्यकाल पूरा किया। 

गिरि के बाद 24 अगस्त 1974 को फखरुद्दीन अली अहमद नए राष्ट्रपति बने। अहमद कार्यकाल पूरा नहीं कर पाने वाले दूसरे राष्ट्रपति बने। 11 फरवरी 1977 को उनका निधन हो गया। अहमद के निधन के बाद उप-राष्ट्रपति बीडी जत्ती कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। 

इसके बाद चुनाव हुए। चुनाव के बाद 25 जुलाई 1977 को नीलम संजीव रेड्डी देश के नए राष्ट्रपति बने। तब से लेकर अब तक हर राष्ट्रपति ने अपना कार्यकाल पूरा किया है। हर राष्ट्रपति के पांच साल कार्यकाल 24 जुलाई को पूरा होता है। इसी वजह से 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति शपथ लेते हैं। तब से अब तक नौ राष्ट्रपति 25 जुलाई को शपथ ले चुके हैं। 

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राष्ट्रपति चुनाव का पूरा गणित। - फोटो : Amar Ujala

कौन से उप-राष्ट्रपति ऐसे जिन्होंने संभाली राष्ट्रपति की जिम्मेदारी? 

देश के पहले उप-राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन उप-राष्ट्रपति और राष्ट्रपति दोनों पदों पर रहने वाले पहले नेता बने थे। उनके बाद जाकिर हुसैन, वीवी गिरि भी इस पद पर पहुंचे। बीडी जत्ती उप-राष्ट्रपति रहने के दौरान पांच महीने से ज्यादा वक्त तक कार्यवाहक राष्ट्रपति रहे। हालांकि, कभी भी राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित नहीं हुए। 

आर वेंकट रमण, शंकर दयाल शर्मा और के आर नारायणन तीनों पहले उप-राष्ट्रपति और उसके बाद राष्ट्रपति पद पर रहे। तीनों का कार्यकाल एक के बाद एक रहा। के आर नारायणन के बाद कोई भी उप-राष्ट्रपति राष्ट्रपति के पद पर नहीं पहुंचा। 

राष्ट्रपति का चुनाव आम चुनाव से कितना अलग होता है?

 आम चुनाव में ईवीएम मशीन का इस्तेमाल होता है। वहीं, राष्ट्रपति चुनाव के लिए बैलट पेपर का इस्तेमाल होता है। इसकी वजह है राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया का आम चुनाव से अलग होना। दरअसल आम चुनाव में वोटर को अपनी पसंद के उम्मीदवार को चुनना होता है। उस उम्मीदवार के सामने की बटन दबने पर उसका वोट संबंधित उम्मीदवार को मिल जाता है। 

राष्ट्रपति चुनाव में वोटर एक से ज्यादा उम्मीदवार को वोट कर सकता है। इसके लिए उसे वरीयता देनी होती है। यानी, सबसे पसंदीदा उम्मीदवार के सामने उसे एक लिखना होता है। दूसरी पसंद वाले के सामने दो और अगर तीसरा उम्मीदवार भी है तो उसके सामने वो तीन लिख सकता है। 

अगर वोटर चाहे तो सिर्फ एक उम्मीदवार को भी वोट कर सकता है। इसके लिए भी उसे अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने एक लिखना होगा। ईवीएम को आम चुनाव में इस्तेमाल के हिसाब से बनाया गया है। अगर इनका इस्तेमाल राष्ट्रपति चुनाव में भी करना है तो पहले इसमें तकनीकि तौर पर बदलाव करने होंगे। इसी वजह से राष्ट्रपति का चुनाव बैलट पेपर से होता है। 

राष्ट्रपति चुनाव में वोटर्स को चुनाव आयोग की ओर से एक विशेष पेन दी जाती है। उसी पेन से उम्मीदवारों के आगे वोटर को नंबर लिखने होते हैं। एक नंबर उसे सबसे पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के आगे डालना होता है। ऐसे दूसरी पसंद वाले उम्मीदवार के आगे दो लिखना होता है। अगर आयोग द्वारा दी गई विशेष पेन का इस्तेमाल नहीं होता तो वह वोट इनवैलिड हो जाता है। 

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राष्ट्रपति चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

कब तक पूरी होगी राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया?

 15 जून को चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नामांकन की अंतिम तारीख 29 जून तक है।  मतदान 18 जुलाई को होगा। वहीं नतीजे 21 जुलाई को आएंगे। इसके बाद 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नए राष्ट्रपति को शपथ दिलाएंगे। 

राष्ट्रपति चुनाव में वोट कौन डालता है? 

राष्ट्रपति का चुनाव में लोकसभा, राज्यसभा के सभी सांसद और सभी राज्यों के विधायक वोट डालते हैं। इन सभी के वोट की अहमियत यानी वैल्यू अलग-अलग होती है। यहां तक कि अलग-अलग राज्य के विधायक के वोट की वैल्यू भी अलग होती है। एक सांसद के वोट की वैल्यू 700 होती है। वहीं, विधायकों के वोट की वैल्यू उस राज्य की आबादी और सीटों की संख्या पर निर्भर होती है। राज्यसभा के 12 मनोनीत सांसद इस चुनाव में वोट नहीं डाल सकते हैं।

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