कोरोनावायरस से कैसे कोशिकाएं होती हैं प्रभावित, साबुन से हाथ धोना कितना कारगर
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कोरोनावायरस से दुनियाभर में चार हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और एक लाख 22 हजार से ज्यादा लोग अब तक इससे संक्रमित हो चुके हैं। चीन के वुहान शहर से फैलना शुरू हुआ यह जानलेवा वायरस अब लगभग पूरी दुनिया में पहुंच चुका है। इसकी तबाही की गवाही रोज ही सामने आ रही है। कोरोनावायरस का कहर सबसे ज्यादा चीन, इटली और ईरान में दिखाई दे रहा है।
भारत में इस वायरस से संक्रमित होने वालों की संख्या बढ़कर 73 तक पहुंच गई है। इनमें 17 विदेशी भी शामिल हैं। भारत सरकार ने एहतियात बरतते हुए 15 अप्रैल तक सभी देशों के पर्यटक वीजा को निलंबित कर दिया है।
नुकीली बनावट के कारण नाम पड़ा कोरोना
कोरोनावायरस का नामांकरण उसके नुकीले बनावट के कारण किया गया है। यह नुकीली बनावट वायरस के सबसे बाहरी भाग में होती है। यह वायरस तैलीय वसा के अणुओं द्वारा ढके होते हैं। जिन्हें साबुन के संपर्क से अलग किया जा सकता है।
कमजोर कोशिकाओं के द्वारा शरीर में घुस रहा है कोरोनावायरस
कोरोनावायरस नाक, मुंह या आंखों के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। इसके बाद ये वायरस श्वसन तंत्र के कोशिकाओं पर हमला कर एसीई2 नाम के एक प्रोटीन का उत्पादन करता है। माना जाता है कि इस वायरस की उत्पत्ति चमगादड़ से हुई है क्योंकि इसमें भी ऐसा ही प्रोटीन पाया जाता है।
मानव कोशिका से विषक्त आरएनए को जारी करता है कोरोनावायरस
यह वायरस अपने मेम्ब्रेन को मानव शरीर के कोशिका के मेम्ब्रेन के साथ जोड़कर संक्रमित करता है। एक बार जब मानव शरीर के कोशिका में कोरोनावायरस घुस जाता है तब यह उसके केंद्रक से एक अनुवांशिक तत्व को अलग करता है। इसे आरएनए नाम दिया गया है। आरएनए विभिन्न प्रकार के प्रोटीनों को जोड़ने का भी कार्य करता है। यह कोशिका के कोशिका द्रव्य में पाया जाता है लेकिन उसकी नाभिक के अंदर बहुत कम पाया जाता है।
कोशिकाओं को प्रभावित करता है कोरोनावायरस
कोरोनावायरस का जीनोम बहुत कम है। जबकि मानव शरीर का जीनोम इससे कई गुना बड़ा है। संक्रमित कोशिशा आरएनए को प्रभावित करती है और एसीई2 नाम के एक प्रोटीन को बनाती है। इससे शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।
एंटीबायोटिक्स का प्रयोग कर रहे हैं चिकित्सक
एंटीबायोटिक्स किसी भी वायरस के खिलाफ प्रभावी नहीं होता। यह सिर्फ बैक्टीरिया के खिलाफ काम करता है। एंटीबायोटिक्स को रोकथाम या उपचार के साधन के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि कोरोना से प्रभावित मरीजों को एंटीबायोटिक्स दिया जा रहा है क्योंकि अगर उन्हें कोई अन्य बैक्टीरिया का संक्रमण हो तो वह खत्म हो जाए।
शरीर में विषाक्त प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है
जैसे-जैसे शरीर में संक्रमण बढ़ता है कोशिकाओं से दूषित प्रोटीन का निर्माण बढ़ जाता है। इससे शरीर में कोरोना के वायरस और ज्यादा बनते हैं। इसके बाद नए वायरस शरीर की अन्य कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं।
जानिए साबुन से हाथ धोना कितना कारगर
कोरोनावायरस के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए तरह-तरह के एहतियाती कदम उठा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ वेल्स स्कूल ऑफ केमिस्ट्री के प्रोफेसर पाल थोरार्डसन के दावा किया है कि साबुन द्वारा हाथ को साफ कर कोरोना के वायरस से बचा जा सकता है।
कोरोनावायरस में तीन प्रमुख अवयव होते हैं। पहला आरएनए, दूसरा प्रोटीन और तीसरा वसा है। यह वायरस इन तीन अवयवों से मिलने से बना है। वसा कोरोना के वायरस के चारों ओर एक सुरक्षात्मक परत बनाता है और इसके अन्य अवयवों को साथ रखने में मदद करता है। लेकिन, वसा की बाहरी परत इस वायरस की सबसे कमजोर कड़ी है।
इस वायरस के अंदर कोई ऐसी मजबूत कड़ी नहीं है जो आरएनए, प्रोटीन और वसा को आपस में जोड़कर रख सके। इसलिए इस वायरस को बिना किसी नुकसानदायक केमिकल की मदद स तोड़ा जा सकता है।
कोरोनावायरस 50 से 200 नैनोमीटर के बीच होते हैं। खांसी और छींक की छोटी बूंदें सतह पर आते ही सूख जाती है लेकिन, इसके वायरस सक्रिय होते हैं। ये वायरस लकड़ी, कपड़े और त्वचा पर कई दिनों तक सक्रिय रह सकते हैं। इसके विपरीत स्टील, चीनी मिट्टी के बर्तन और टेफ्लॉन जैसे सतहों पर यह ज्यादा समय तक सक्रिय नहीं रहते हैं।
साबुन कैसे है प्रभावी
ज्यादातर लोग हर 2-5 मिनट में एक बार अपने चेहरे को छूते हैं। जब वायरस आपके हाथ में चिपका हो तब आप अगर अपना चेहरा छू लें तो उन्हें संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में हाछ को सिर्फ पानी से धोना पर्याप्त नहीं है क्योंकि कोरोनावायरस चिपचिपा होता है और पानी से साफ नहीं होता है।
वहीं, साबुन का पानी में वसा जैसे पदार्थ होते हैं जिन्हें एम्फीफाइल कहा जाता है। साबुन वायरस और त्वचा की सतह के बीच के पकड़ को कमजोर करता है। साबुन के पानी से हाथ धोने से वायरस की बाहरी परत में सेंध लगती है और वायरस पानी के साथ मिलकर हाथ से निकल जाता है।
