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हांगकांग हमारा आंतरिक मामला, बाहरी ताकतों को हस्तक्षेप की अनुमति नहीं: चीनी राजदूत
Wed, 04 Sep 2019 08:33 AM IST
शिल्पा ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिल्पा ठाकुर
Updated Wed, 04 Sep 2019 08:33 AM IST
सार
- चीन ने हांगकांग को अपना आंतरिक मुद्दा बताया है।
- वहां लोकतंत्र के समर्थन में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को उसने हिंसक अपराध कहा।
- उसने कहा कि कुछ बाहरी ताकतें चीन के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप कर रही हैं।
- चीन ने कहा हांगकांग पर कोई संप्रभुता का मुद्दा नहीं है।
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सुन विडोंग
- फोटो : ANI
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर मामले पर पाकिस्तान का साथ देने वाले चीन ने हांगकांग को अपना आंतरिक मुद्दा बताया है। वहां लोकतंत्र के समर्थन में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को उसने हिंसक अपराध कहा है।
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भारत में चीनी राजदूत सुन विडोंग का कहना है कि कुछ बाहरी ताकतें चीन के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप कर रही हैं। और जानबूझकर हिंसक अपराधों को शांतिपूर्ण विरोध कह रही हैं। यह समान रूप से दोहरा मानक है।
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उन्होंने कहा कि हांगकांग का मामला चीन का आंतरिक मामला है और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त एक तथ्य है। हांगकांग पर कोई संप्रभुता का मुद्दा नहीं है। हम किसी भी बाहरी ताकत को हांगकांग के मामलों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं देंगे।
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Sun Weidong: Hong Kong affairs are purely China’s internal affairs & this is a fact recognised internationally. There is no sovereignty issue over Hong Kong at all. We will not let any external forces to interfere in Hong Kong affairs or draw parallel to other issues. (3/9) https://t.co/IApsJ9mHeZ
— ANI (@ANI) September 4, 2019
इससे पहले चीन ने हांगकांग पर जी-7 देशों द्वारा जारी साझा बयान के प्रति असंतोष व्यक्त किया था। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने बीजिंग में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा था, "हांगकांग मामले में जी-7 नेताओं के बयान का हम पुरजोर विरोध करते हैं।"
शुआंग ने कहा था, "हम ये कई बार कह चुके हैं कि हांगकांग पूरी तरह चीन का आंतरिक मामला है। और किसी विदेशी सरकार, संगठन या फिर किसी व्यक्ति को इसमें हस्तक्षेप करने की जरुरत नहीं है।"
बता दें हांगकांग में सरकार विरोधी प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प देखने को मिल रही हैं।
क्या है ये कानून?
जिस विवादास्पद प्रत्यर्पण विधेयक का ये लोग विरोध कर रहे हैं, उसके अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपराध करके हांगकांग आ जाता है को उसे जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए चीन भेज दिया जाएगा। हांगकांग की सरकार इस मौजूदा कानून में संशोधन के लिए फरवीर में प्रस्ताव लाई थी। कानून में संशोधन का प्रस्ताव एक घटना के बाद लाया गया। जिसमें एक व्यक्ति ने ताइवान में अपनी प्रमिका की कथित तौर पर हत्या कर दी और हांगकांग वापस आ गया।हांगकांग की अगर बात की जाए तो यह चीन का एक स्वायत्त द्वीप है। चीन इसे अपने संप्रभु राज्य का हिस्सा मानता है। वहीं हांगकांग की ताइवान के साथ कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। जिसके कारण हत्या के मुकदमे के लिए उस व्यक्ति को ताइवान भेजना मुश्किल है।
अगर ये कानून पास हो जाता है तो इससे चीन को उन क्षेत्रों में संदिग्धों को प्रत्यर्पित करने की अनुमति मिल जाएगी, जिनके साथ हांगकांग के समझौते नहीं हैं। जैसे संबंधित अपराधी को ताइवान और मकाऊ भी प्रत्यर्पित किया जा सकेगा। फिलहाल सरकार ने कानून को लंबित कर दिया है। लेकिन ये साफ नहीं कहा है कि वह दोबारा इसे नहीं लाएगी।