खत्म होगी थर्ड डिग्री!: अब ऐसे 'सच' उगलेंगे अपराधी, फटाफट केस सुलझाने में मदद करेगा मॉडस ऑपरेंडी ब्यूरो
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विस्तार
पुलिस एवं केंद्रीय जांच एजेंसियां, किसी केस में आरोपी से सच उगलवाने के लिए ज्यादातर 'थर्ड डिग्री' यानी टॉर्चर का तरीका इस्तेमाल करती हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय अब एक ऐसे मैकेनिज्म पर काम कर रहा है, जिसमें थर्ड डिग्री के लिए कोई जगह नहीं होगी। क्रिमिनल से सच उगलवाया जाएगा, लेकिन एक नए तरीके से। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, देश की पुलिस जांच पद्धति में आमूलचूल परिवर्तन होना चाहिए। अब जांच थर्ड डिग्री पर नहीं, बल्कि डाटा और इनफॉर्मेशन की डिग्री पर निर्भर होना चाहिए। यह परिवर्तन लाना है तो डाटाबेस बनाने पड़ेंगे। डिजिटल फॉरेंसिंक में भी दक्षता हासिल करनी पड़ेगी।
एनआईए के डीजी कुलदीप सिंह ने कहा, आतंकियों की जड़ों पर प्रहार किया जा रहा है। आने वाले समय में सभी राज्यों की राजधानियों में एनआईए का दफ्तर खुल जाएगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए स्वीकृति प्रदान कर दी है। एनआईए में सीएपीएफ का कोटा तय होगा। बतौर कुलदीप सिंह, जम्मू-कश्मीर में धर्म के नाम पर जुटाई गई राशि को आतंकियों की मदद के लिए खर्च किया गया है। इस बाबत एनआईए ने काफी सबूत जुटाए हैं।
बनेगा राष्ट्रीय डाटाबेस
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह गुरुवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के 13वें स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जांच एजेंसी के अधिकारियों को पुरस्कार भी प्रदान किए। इस दौरान शाह ने कहा कि एनआईए को मादक पदार्थ, हवाला, हथियारों की तस्करी, जाली मुद्राएं, बम धमाके, टेरर फंडिंग और टेररिज्म इन सात क्षेत्रों में एक राष्ट्रीय डाटाबेस बनाने का काम दिया गया है। इसकी बहुत अच्छे तरीके से शुरुआत भी हुई है। अगर यह राष्ट्रीय डाटाबेस बनता है, तो इससे न केवल राष्ट्रीय एजेंसियों बल्कि देश की पुलिस एजेंसियों को भी केस सुलझाने में काफी मदद मिलेगी। वे हाल ही में लोकसभा में एक बिल लेकर गए थे, जिसमें जेलों को भी इसके साथ जोड़ने का काम किया है।
शाह ने इस बात की ओर इशारा करते हुए कहा, आने वाले वक्त में टॉचर्र जैसा कुछ नहीं होगा। जांच एजेंसी अपने संसाधनों के जरिए इतने सबूत जुटा लेंगी कि आरोपी चाह कर भी झूठ नहीं बोल सकेगा। इसी कड़ी में दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक 2022, लाया गया है। यह विधेयक संसद के दोनों सदनों में पारित हो गया है। शाह ने इस बाबत सदन में कहा था कि यह नागरिकों की गोपनीयता को जोखिम में नहीं डालता। यह विधेयक आपराधिक मामलों में पहचान और जांच के उद्देश्य से दोषियों व अन्य व्यक्तियों के बायोमेट्रिक विवरण एकत्र करने एवं रिकॉर्ड को संरक्षित करने के लिए अधिकृत करने का प्रयास करता है। विधेयक का मकसद, अभियोजन एजेंसियों को वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराने के साथ-साथ पुलिस, फोरेंसिक टीम की क्षमता निर्माण करना है। हमारा कानून अन्य देशों की तुलना में सख्ती के मामले में 'बच्चा' (कुछ नहीं) है। दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा व अमेरिका जैसे देशों में अधिक कड़े कानून हैं।
यही वजह है कि उनकी सजा की दर बेहतर है। वहां पर दोष सिद्धी इसलिए ज्यादा है, क्योंकि वहां जांच एजेंसियों को वैज्ञानिक तरीके से जांच करने का अधिकार मिला हुआ है। पुलिस और फोरेंसिक टीम की कैपेसिटी बिल्डिंग करना, इस बिल का उद्देश्य है। थर्ड डिग्री का इस्तेमाल कम से कम करके दोष सिद्धि के लिए 'वैज्ञानिक सबूत' प्रॉसिक्यूशन एजेंसी को उपलब्ध कराना इस बिल का मकसद है।
एनआईए अधिकारियों से शाह ने कहा, एक मॉडस ऑपरेंडी ब्यूरो बन रहा है। उसमें भी एनआईए को जो नए लड़कों को टेररिज्म के साथ जोड़ने की मॉडस ऑपरेंडी है, उसकी स्टडी करने में बीपीआरएंडी की मदद करनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार सीआरपीसी, आईपीसी और एविडेंस एक्ट में भी आमूलचूल परिवर्तन करना चाहती है। ये बहुत पुराने कानून हैं। इनमें समयानुकूल बदलाव जरूरी है।
उन्होंने कहा कि मैं एनआईए के प्रशिक्षण पर बहुत बल देता था और मुझे आनंद है कि जुलाई 2021 में एनआईए के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद के साथ एक करार किया गया है। एनआईए को विश्व की अन्य शक्तिशाली एजेंसियों के समान विकसित करने और उसके पेशेवर कौशल को बढ़ाने के लिए दो विशेषज्ञों के एक सेल की भी स्थापना की गई है।
एनआईए को दिए और अधिकार
एनआईए के डीजी कुलदीप सिंह ने कहा, जब सभी राज्यों में एनआईए का कार्यालय खुल जाएगा तो मामलों की जांच में भी तेजी आएगी। एनआईए ने आतंकियों की जड़ें खत्म करने का प्रयास किया है। उन्हें कहां से मदद मिलती है, ये पता लगाया गया है। जम्मू कश्मीर में आतंकियों को कई जगह से आर्थिक मदद मिलती रही है। इनमें कुछ धमार्थ संगठन भी शामिल हैं। वे लोग धर्म के नाम पर राशि एकत्रित करते हैं और उसे आतंकियों की मदद पर खर्च कर देते हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान से कहां पर किसे क्या मदद मिली है, इसका पता लगाया गया है। आरोपियों पर कार्रवाई भी हुई है। खालिस्तान संगठन को आतंकी समूह और उसके प्रमुख को आतंकी घोषित किया गया है। उनके स्लीपर सेल कहां-कहां पर हैं, ये मालूम हो गया है। अब उन पर कार्रवाई हो रही है। उन्हें जल्द ही बेनकाब कर दिया जाएगा।
भारत के बाहर किसी भी आतंकी हमले में जहां भारतीय हताहत हुआ हो, उस मामले में जांच करने के अधिकार एनआईए को दिए गए हैं। एनआईए को अब अंतरराष्ट्रीय एजेंसी के रूप में भी स्वीकृति दिलाने का लक्ष्य लेकर उसे सिद्ध करना चाहिए। नए संशोधन में हमने एनआईए को घुसपैठ, विस्फोटक पदार्थ और साइबर अपराध के अधिकार भी दिए हैं। पहले एनआईए को आतंकवादी संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित करने का अधिकार था। अब भारत में पहली बार हमने संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने का अधिकार एनआईए को दिया है। अब तक 36 व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित कर दिया गया है। यह एक नए प्रकार की शुरुआत है।
विशेषकर टेरर फंडिंग के साथ-साथ वामपंथी उग्रवादी संगठनों की फंडिंग की जड़ तक पहुंचने के कुछ केस एनआईए को दिए गए हैं। आशा है कि उसे जम्मू-कश्मीर की तरह इसमें भी बड़ी सफलता मिलेगी। टेरर फंडिंग संबंधित 105 मामले दर्ज हुए हैं। 876 आरोपियों के खिलाफ 94 चार्जशीट दाखिल की गईं, 796 आरोपियों को अरेस्ट भी कर लिया गया है। उसमें से 100 आरोपियों को दोषी भी ठहराया गया है। शाह ने कहा, यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।