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CAPF कैडर अफसरों की बात सुनेगा गृह मंत्रालय, सीआरपीएफ-बीएसएफ को दो सितंबर तक रखना होगा अपना पक्ष

Thu, 27 Aug 2020 03:00 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 27 Aug 2020 03:00 PM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 जुलाई को अपने फैसले में केंद्रीय गृह मंत्रालय से कहा था कि वह डीओपीटी के नियमानुसार 30 जून 2021 तक केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में कैडर समीक्षा पूरी करे। इसके लिए कैडर अफसरों को अपनी बात कहने का मौका दिया जाए...

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Home Ministry will listen to CAPF cadre officers on cadre issue, CRPF-BSF will give representation till September 2
गृह मंत्रालय - फोटो : ANI (File Photo)

विस्तार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में कैडर अफसरों की बात सुनने के लिए गृह मंत्रालय ने एक कमेटी गठित की है। इस कमेटी में केंद्रीय गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव (आईएस-1) और एसके साही (पुलिस 2 डिवीजन) को शामिल किया गया है। सीआरपीएफ अफसरों को 31 अगस्त और बीएसएफ अफसरों को 2 सितंबर तक अपना पक्ष रखना है।

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अभी इन अधिकारियों को अपने-अपने मुख्यालय में री-प्रेजेंटेशन देना है। बाद में जब री-प्रेजेंटेशन गृह मंत्रालय की कमेटी के पास पहुंचेगा तो यह निर्णय लिया जाएगा कि कैडर अधिकारियों को बुलाया जाए या नहीं।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 जुलाई को अपने फैसले में केंद्रीय गृह मंत्रालय से कहा था कि वह डीओपीटी के नियमानुसार 30 जून 2021 तक केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में कैडर समीक्षा पूरी करे। इसके लिए कैडर अफसरों को अपनी बात कहने का मौका दिया जाए।

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बता दें कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कैडर अधिकारी और सैकड़ों पूर्व अफसरों को यह शिकायत रही है कि प्रमोशन एवं वित्तीय फायदों में उनके साथ भेदभाव हो रहा है। जिस तरह से केंद्र सरकार की दूसरी संगठित सेवाओं में एक तय समय के बाद रैंक या फिर उसके समकक्ष वेतन मिलता है, वैसा सभी केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारियों को नहीं मिल पा रहा है।

बीस साल की सेवा के बाद आईपीएस अधिकारी आईजी बन जाता है, लेकिन कैडर अफसर उस वक्त कमांडेंट के पद तक पहुंच पाता है। कैडर अफसर 34-35 साल की नौकरी के बाद बड़ी मुश्किल से आईजी बनता है।

डीओपीटी ने 2008-09 के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों में ओजीएएस यानी 'आर्गेनाइज्ड ग्रुप ए सर्विस' के तहत सेवा नियम बनाने के आदेश जारी किए थे। अभी तक सीआरपीएफ, बीएसएफ और दूसरी कई सेवाओं में सर्विस रूल नहीं बनाए गए हैं।


इतना ही नहीं, इन कैडर अधिकारियों को समय पर गैर-कार्यात्मक वित्तीय उन्नयन (एनएफएफयू) और गैर-कार्यात्मक चयन ग्रेड (एनएफएसयू) का लाभ मिल जाए, इसके लिए आरआर यानी रिक्रूटमेंट रूल में भी संशोधन नहीं किया गया। इसके चलते कैडर अधिकारी प्रमोशन और आर्थिक फायदों से वंचित हैं। यही वजह है कि देश के पांच बड़े अर्धसैनिक बलों के अफसर इस मुद्दे को लेकर अदालत में पहुंच गए थे।

 

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