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Home Ministry: UAPA कानून के तहत सिमी पर प्रतिबंध पांच साल और बढ़ा, गृह मंत्रालय ने लिया बड़ा फैसला
Mon, 29 Jan 2024 05:04 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Mon, 29 Jan 2024 05:04 PM IST
सार
UAPA के तहत सिमी पर प्रतिबंध पांच साल और बढ़ाने का फैसला लिया गया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला आतंकवाद के खिलाफ पीएम मोदी की जीरो टॉलरेंस नीति को दिखाता है। भारत की सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि 'सिमी' ने नेपाल, बांग्लादेश और पकिस्तान तक अपना जाल फैला रखा है।
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गृह मंत्री अमित शाह (वीडियो ग्रैब)
- फोटो : social media
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विस्तार
गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) के तहत स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI या सिमी) पर प्रतिबंध पांच साल और बढ़ाने का फैसला लिया गया है। गृह मंत्रालय ने बताया कि सिमी को यूएपीए कानून के तहत 'गैरकानूनी संगठन' (Unlawful Association) घोषित किया गया है। कानून के तहत सिमी पर लगाया गया प्रतिबंध पांच साल औग जारी रहेगा। फैसले के बारे में गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- एक्स पर जारी एक बयान में लिखा कि यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को दिखाता है।
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति
गृह मंत्रालय के मुताबिक पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। गृह मंत्रालय के मुताबिक स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) को आतंकवादी कृत्यों में संलिप्त पाया गया है। संगठन के सदस्यों को शांति और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा माना गया है। SIMI को सरकार ने देश की संप्रभुता, सुरक्षा और भारत की अखंडता के लिए भी खतरा माना गया है। खतरे को देखते हुए गृह मंत्रालय ने कहा कि सिमी पर 2029 तक प्रतिबंध जारी रहेगा।
दो दशकों से अधिक समय में सरकार ने दिखाई दृढ़ इच्छाशक्ति
सोमवार को हुए अहम फैसले के बारे में गृह मंत्रालय ने कहा कि सिमी पर पहली बार प्रतिबंध 2001 में लगाया गया था। अटल बिहार वाजपेयी की तत्कालीन सरकार के बाद हर पांच साल में प्रतिबंध बढ़ाया जाता रहा है। सोमवार को जारी अधिसूचना में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि सिमी की विध्वंसक गतिविधियां जारी हैं। SIMI अपने कार्यकर्ताओं को फिर से संगठित कर रहा है जो अभी भी कानूनी एजेंसियों के चंगुल से बाहर हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक राष्ट्र-विरोधी भावनाओं को प्रचारित करना और उग्रवाद का समर्थन देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए हानिकारक है। सिमी से जुड़े लोग देश की धर्मनिरपेक्षता के ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचाने की ताक में हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में भी गया SIMI का मामला
इससे पहले जुलाई, 2023 में सिमी पर बैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई। हालांकि, अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को बाद में अपील करने की निर्देश दिया। इसके बाद बीते छह महीने में इस मामले पर सुनवाई नहीं हुई है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार सिमी से पहले भी कई संगठनों पर प्रतिबंध लगा चुकी है। लगभग 56 साल पहले बने कानून- UAPA के तहत प्रतिबंधित कुल 13 संगठन इस सूची में शामिल हैं। इसके अलावा अब तक 42 आतंकवादी संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।
PFI से पहले 12 संगठनों पर प्रतिबंध
गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त 13 संगठनों में सिमी के अलावा पूर्वोत्तर और कश्मीर में हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे कई संगठन भी शामिल हैं। प्रतिबंधित 13 संगठनों की सूची पर एक नजर-
1. स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI)
2. यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA)
3. नेशनल डेमोक्रेटिक्स फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB)
4. मणिपुर के मैतेई चरमपंथी संगठन (इसके तहत सात और छोटे संगठनों को नाम भी शामिल हैं)
- पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) और इसका राजनीतिक संगठन रिवॉल्युनेशरी पीपुल्स आर्मी (RPF)
- यूनाईटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) और इसका आर्म्स विंग मणिपुर पीपल्स आर्मी (MPA)
- पीपुल्स रिवॉल्युनेशरी पार्टी ऑफ कांग्लीपीक (PREPAK) और इसका आर्म्स विंग रेड आर्मी
- कांग्लीपीक कम्युनिस्ट पार्टी (KCP)
- कंगलेई याओल कंबा लुपी (KYKL)
- कोआर्डिनेशन कमेटी (CorCom)
- अलायंस फॉर सोशलिस्ट यूनिटी कांग्लीपीक (ASUK)
5. ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्सेज (ATTF)
6. नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT)
7. हायरुइउट्रेप नेशनल लिबरेशलन काउंसिल (HNLC)
8. लिबरेशन टाइर्ग्स ऑफ तमिल एलम (LTTE)
9. नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (Khaplang)
10. इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF)
11. जमात-ए-इस्लामी (JeI), जम्मू कश्मीर
12. जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (मोहम्मद यासीन मलिक)
13. सिख फॉर जस्टिस (SFJ)
क्या है सिमी, देश के लिए खतरा क्यों मानती है सरकार
कानूनी और सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक सिमी का गठन 46 साल पहले हुआ था। अप्रैल, 1977 में बने इस संगठन की जड़ें उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से जुड़ी हैं। अमेरिकी राज्य इलिनोय में रहने वाले प्रोफेसर मोहम्मद अहमदुल्लाह सिद्दीकी सिमी के संस्थापक बताए जाते हैं। भारत सरकार ने संगठन के कामकाज को गैरकानूनी और देश के लिए खतरनाक मानते हुए वर्ष 2001 में इस पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया था। गृह मंत्रालय और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की सख्ती के कारण SIMI से जुड़े सदस्य अंडरग्राउंड हैं। गतिविधियों पर प्रभावी तरीके से नकेल कसने में कामयाबी मिली है। शुरुआती दौर में इसे 'जमात-ए-इस्लामी' की छात्र इकाई समझा जाता था। हालांकि, 1981 में SIMI जमात से अलग हो गया। संगठन के मूल मकसदों में इस्लाम का प्रसार और देश में इस्लामिक कानून को प्रभावी बनाना है।
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आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति
गृह मंत्रालय के मुताबिक पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। गृह मंत्रालय के मुताबिक स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) को आतंकवादी कृत्यों में संलिप्त पाया गया है। संगठन के सदस्यों को शांति और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए खतरा माना गया है। SIMI को सरकार ने देश की संप्रभुता, सुरक्षा और भारत की अखंडता के लिए भी खतरा माना गया है। खतरे को देखते हुए गृह मंत्रालय ने कहा कि सिमी पर 2029 तक प्रतिबंध जारी रहेगा।
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दो दशकों से अधिक समय में सरकार ने दिखाई दृढ़ इच्छाशक्ति
सोमवार को हुए अहम फैसले के बारे में गृह मंत्रालय ने कहा कि सिमी पर पहली बार प्रतिबंध 2001 में लगाया गया था। अटल बिहार वाजपेयी की तत्कालीन सरकार के बाद हर पांच साल में प्रतिबंध बढ़ाया जाता रहा है। सोमवार को जारी अधिसूचना में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि सिमी की विध्वंसक गतिविधियां जारी हैं। SIMI अपने कार्यकर्ताओं को फिर से संगठित कर रहा है जो अभी भी कानूनी एजेंसियों के चंगुल से बाहर हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक राष्ट्र-विरोधी भावनाओं को प्रचारित करना और उग्रवाद का समर्थन देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए हानिकारक है। सिमी से जुड़े लोग देश की धर्मनिरपेक्षता के ताने-बाने को भी नुकसान पहुंचाने की ताक में हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में भी गया SIMI का मामला
इससे पहले जुलाई, 2023 में सिमी पर बैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल हुई। हालांकि, अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को बाद में अपील करने की निर्देश दिया। इसके बाद बीते छह महीने में इस मामले पर सुनवाई नहीं हुई है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार सिमी से पहले भी कई संगठनों पर प्रतिबंध लगा चुकी है। लगभग 56 साल पहले बने कानून- UAPA के तहत प्रतिबंधित कुल 13 संगठन इस सूची में शामिल हैं। इसके अलावा अब तक 42 आतंकवादी संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।
PFI से पहले 12 संगठनों पर प्रतिबंध
गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त 13 संगठनों में सिमी के अलावा पूर्वोत्तर और कश्मीर में हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे कई संगठन भी शामिल हैं। प्रतिबंधित 13 संगठनों की सूची पर एक नजर-
1. स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI)
2. यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA)
3. नेशनल डेमोक्रेटिक्स फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB)
4. मणिपुर के मैतेई चरमपंथी संगठन (इसके तहत सात और छोटे संगठनों को नाम भी शामिल हैं)
- पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) और इसका राजनीतिक संगठन रिवॉल्युनेशरी पीपुल्स आर्मी (RPF)
- यूनाईटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) और इसका आर्म्स विंग मणिपुर पीपल्स आर्मी (MPA)
- पीपुल्स रिवॉल्युनेशरी पार्टी ऑफ कांग्लीपीक (PREPAK) और इसका आर्म्स विंग रेड आर्मी
- कांग्लीपीक कम्युनिस्ट पार्टी (KCP)
- कंगलेई याओल कंबा लुपी (KYKL)
- कोआर्डिनेशन कमेटी (CorCom)
- अलायंस फॉर सोशलिस्ट यूनिटी कांग्लीपीक (ASUK)
5. ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्सेज (ATTF)
6. नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT)
7. हायरुइउट्रेप नेशनल लिबरेशलन काउंसिल (HNLC)
8. लिबरेशन टाइर्ग्स ऑफ तमिल एलम (LTTE)
9. नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (Khaplang)
10. इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF)
11. जमात-ए-इस्लामी (JeI), जम्मू कश्मीर
12. जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (मोहम्मद यासीन मलिक)
13. सिख फॉर जस्टिस (SFJ)
क्या है सिमी, देश के लिए खतरा क्यों मानती है सरकार
कानूनी और सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक सिमी का गठन 46 साल पहले हुआ था। अप्रैल, 1977 में बने इस संगठन की जड़ें उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से जुड़ी हैं। अमेरिकी राज्य इलिनोय में रहने वाले प्रोफेसर मोहम्मद अहमदुल्लाह सिद्दीकी सिमी के संस्थापक बताए जाते हैं। भारत सरकार ने संगठन के कामकाज को गैरकानूनी और देश के लिए खतरनाक मानते हुए वर्ष 2001 में इस पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया था। गृह मंत्रालय और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की सख्ती के कारण SIMI से जुड़े सदस्य अंडरग्राउंड हैं। गतिविधियों पर प्रभावी तरीके से नकेल कसने में कामयाबी मिली है। शुरुआती दौर में इसे 'जमात-ए-इस्लामी' की छात्र इकाई समझा जाता था। हालांकि, 1981 में SIMI जमात से अलग हो गया। संगठन के मूल मकसदों में इस्लाम का प्रसार और देश में इस्लामिक कानून को प्रभावी बनाना है।