पाकिस्तान के बलूच, अहमदिया और म्यांमार के रोहिंग्या को भी मिल सकती है भारत की नागरिकता
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बुधवार को गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सीएए के तहत पाकिस्तान के बलूच, अहमदिया और म्यांमार के रोहिंग्या को भी भारत की नागरिकता मिल सकती है। सीएए में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो इन लोगों को भारत की नागरिकता देने वाली राह में बाधा बनता हो।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के बलूचिस्तान में रहने वाले बलूच, अहमदिया और म्यांमार के रोहिंग्या भी भारत की नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। इन लोगों को द सिटिजनशिप एक्ट 1955 के अंतर्गत आवेदन करना होगा। आवेदन में यह देखा जाएगा कि ये लोग द सिटिजनशिप एक्ट 1955 में दी गई सभी योग्यताएं पूरी करते हैं या नहीं। यदि ये लोग सभी योग्यताओं पर खरे उतरते हैं, तो उन्हें भी दूसरे लोगों की तरह भारत की नागरिकता मिल सकती है। गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत संयुक्त राष्ट्र संघ की उन बातों का पालन करता है, जिसमें शरणार्थियों की देखभाल करने की बात कही गई है।
भारत अपने इस दायित्व से दूर नहीं जा सकता है। हमारे देश में दो लाख से अधिक श्रीलंकाई, तमिल और तिब्बती लोग, 15 हजार से अधिक अफगानी, 20-25 हजार रोहिंग्या और दूसरे विभिन्न देशों के हजारों शरणार्थी भारत के अलग अलग हिस्सों में रह रहे हैं। यह उम्मीद की जाती है कि जब इन देशों में स्थिति ठीक होगी, तो ये लोग वापस लौट जाएंगे। हालांकि शरणार्थियों को लेकर भारत ने यूएन कन्वेंशन ऑफ 1951 और यूएन प्रोटोकॉल ऑफ 1967 पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। भारत इसके लिए भी बाध्य नहीं है कि वह इन लोगों को नागरिकता का प्रस्ताव दे।
नेचुरलाइजेशन के मामले में सभी देशों की तरह भारत भी अपने स्वयं के कायदे-कानून रखता है। सीएए की वजह से उस प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं आएगा, जिसके तहत प्रवासी को भारत की नागरिकता के लिए आवेदन करना होता है। पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले मुस्लिमों को भारत की नागरिकता दी गई है।
योग्यता पूरी करने वाले को मिल सकती है नागरिकता
सूत्रों के अनुसार, यदि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुस्लिम मौजूदा प्रक्रिया के तहत योग्य पाए जाते हैं, तो उन्हें भी भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी। 2014 में भारत और बांग्लादेश के बीच जब बॉर्डर एग्रीमेंट हुआ, तब 50 एन्क्लेव को बांग्लादेश से भारत में शामिल किया गया था। इसके चलते 14,864 बांग्लादेशी नागरिकों को भारत की नागरिकता दी गई थी। इनमें बहुत से लोग मुस्लिम थे। तीन देशों के अवैध प्रवासी मुस्लिमों को सीएए के जरिए वापस उनके देश भेजा जाएगा, इस बाबत भी गृह मंत्रालय ने अपनी राय स्पष्ट कर दी है।
सीएए में ऐसी प्रक्रिया भी नहीं है कि किसी व्यक्ति को उसके धर्म या देश के आधार पर जबरन वापस उसके देश में भेजा जाएगा। इसके लिए फॉर्नर्स एक्ट 1946 और द पासपोर्ट (एंट्री टू इंडिया) एक्ट 1920 का पालन होगा। इन्हीं दो कानूनों के तहत किसी को एंट्री देना, रहने की इजाजत देना, भारत में घूमने की आज्ञा देना और उन्हें भारत से बाहर निकालना, ये सभी संभव होगा। यह शर्त सभी प्रवासी लोगों पर एक समान रूप से लागू होगी। इसमें व्यक्ति का धर्म या देश, किसी शर्त का हिस्सा नहीं बनेंगे।
कोई भी ऐसा नागरिक जो अवैध तरीके से भारत में रह रहा है, उसके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होती है। यह कार्रवाई स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अथॉरिटी की विस्तृत जांच पड़ताल के बाद ही की जाती है। ये एजेंसियां ही उस व्यक्ति की अवैध प्रवासी होने की पहचान करती हैं।
ऐसे विदेशी को उसके देश के दूतावास की तरफ से बाकायदा उचित यात्रा दस्तावेज जारी किए जाते हैं। जब उस व्यक्ति को उसके देश में भेजा जाता है, तो वहां के अधिकारी उसे रिसीव करते हैं। पिछले छह साल में 2830 पाकिस्तानी नागरिक, 912 अफगानी और 172 बांग्लादेशियों को भारत का नागरिक बनाया गया है।