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साइबर क्राइम पर बड़ा वार करने की तैयारी में जुटा गृह मंत्रालय
Mon, 26 Oct 2020 10:59 PM IST
गौरव पाण्डेय
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 26 Oct 2020 10:59 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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केंद्रीय गृह मंत्रालय, साइबर क्राइम पर बड़ा वार करने की तैयारी में जुटा है। कई ऐसे कानूनी प्रावधान किए जा रहे हैं, जिनके दायरे से आरोपियों का बच निकलना मुश्किल हो जाएगा। इस बार केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि साइबर क्राइम की जड़ तक पहुंचने की रणनीति बनाई जा रही है। सरकारी विभागों और लोगों के पर्सनल डाटा में सेंध लगाना आसान नहीं होगा।
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मंत्रालय ने इंडियन साइबर क्राइम कोर्डिनेशन सेंटर स्कीम के तहत साइबर एंड इंर्फोमेशन सिक्योरिटी सेंटर को मजबूती प्रदान करने का काम शुरू किया है। सेंटर को बहुत जल्द सात नए निदेशक और इतने ही अंडर सेक्रेटरी लेवल के अधिकारी मिलने जा रहे हैं। खास बात ये है कि इन सभी पदों की योग्यता का स्तर, आईटी एवं प्रोग्रामिंग जैसी कई दूसरी तकनीकी विशेषज्ञता के अनुसार तय किया गया है।
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मंत्रालय ने इस बाबत सभी अंशभागियों से सुझाव मांगे थे। अधिकांश संगठनों ने अपने सुझाव दे दिए हैं। निदेशक और अंडर सेक्रेटरी लेवल के सभी अधिकारियों को पे मैट्रिक्स स्तर 13 के अंतर्गत वेतन और दूसरे फायदे मिलेंगे। जनरल सेंट्रल सर्विस के ग्रुप 'ए' में आने वाले ये अधिकारी प्रशासनिक और तकनीकी, दोनों क्षेत्रों में विशेषज्ञ होंगे। शुरुआती दौर में इनकी नियुक्ति डेप्युटेशन पर की जाएगी।
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इनके लिए कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर डिग्री अनिवार्य योग्यता रखी गई है। आईटी और प्रोग्रामिंग में कम से कम दस साल का अनुभव जरूरी बताया गया है। इनकी नियुक्ति के दौरान यूपीएससी से सलाह ली जाएगी। मंत्रालय की साइबर विंग के एक अधिकारी के मुताबिक, अब यह सेंटर महज तकनीकी रूप से ही नहीं, अपितु कानूनी तौर पर भी मजबूत बनेगा।
अब किसी भी केस की जांच, नई तकनीक और कानूनी पहलू के मद्देनजर होगी। यह प्रयास रहेगा कि साइबर अपराध जब शुरुआती दौर में हो, तभी आरोपियों तक पहुंचा जाए। मौजूदा समय में जब अपराध हो जाता है तब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सचेत होती हैं। नए सिस्टम में ऐसा नहीं होगा। वहां अपराध होने से पहले कम से कम एक विशेष क्षेत्र में अलर्ट मिल जाए, ऐसे सिस्टम पर काम हो रहा है।
चूंकि साइबर अपराध एक मिनट में पूरी होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए लंबी तैयारी करनी पड़ती है। कहां से पासवर्ड चुराना है और सरकारी महकमे या बैंक आदि की डिटेल कैसे निकालनी है, इन सबका एक लंबा होमवर्क होता है। नए सिस्टम के जरिए वे सभी संगठन, जिनकी चूक की वजह से साइबर अपराध की कोई घटना होती है, जिम्मेदार होंगे।