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गांधीनगर में गृह मंत्री: अमित शाह बोले- सहकारिता की आत्मा को बचाए रखने का काम कर रहा गुजरात, यह बात भी कही
Sat, 28 May 2022 09:34 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sat, 28 May 2022 09:34 PM IST
सार
उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन आजादी के समय से ही स्वावलंबन और स्वदेशी, इस दो स्तंभों के आधार पर मोरारजी देसाई और सरदार पटेल ने गांधी जी के नेतृत्व में इसकी शुरुआत की थी।
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Amit Shah
- फोटो : ANI
विस्तार
गांधीनगर में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि गुजरात सहकारिता आंदोलन का आज पूरे देशभर में सफल मॉडल माना जाता है। कोई भी क्षेत्र हो गुजरात सहकारिता की आत्मा को बचाए रखने का काम करा है। देशभर में बहुत कम प्रांत बचे हैं जहां सहकारिता बहुत अच्छे तरीके से चलती हो, इसमें हमारा गुजरात एक है। उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन आजादी के समय से ही स्वावलंबन और स्वदेशी, इस दो स्तंभों के आधार पर मोरारजी देसाई और सरदार पटेल ने गांधी जी के नेतृत्व में इसकी शुरुआत की थी।
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केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को बताया कि केंद्र सरकार और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) मिलकर जल्द ही देश के लगभग 65 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को कंप्यूटराइज करना शुरू करेंगी। शाह सहकार से समृद्धि कार्यक्रम में बोल रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
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केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा, सरकार पैक्स को बहुउद्देशीय बनाने के लिए काम कर रही है। नई सहकार नीति को लेकर भी सरकार ने सुझाव मांगे हैं। सहकारिता की सभी इकाइयों का एक बहुत बड़ा डाटा बैंक भी बनाया जाएगा। शाह ने कहा, देश में सहकारिता क्षेत्र से जुड़े लोगों की लंबे समय से मांग थी कि केंद्र में सहकारिता के लिए अलग मंत्रालय बनाया जाए। पीएम मोदी ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए देश के पहले सहकारिता मंत्रालय की शुरुआत की। उनकी यह पहल अगले 100 साल तक सहकारिता आंदोलन को नया जीवन देने वाली है।
सहकारिता को लेकर बजट में किए गए कई प्रावधान
शाह ने कहा, मंत्रालय बनने के साथ ही इस साल के बजट में कई कदम उठाए गए। देश की सहकारी चीनी मिलों की कई सालों से समस्या थी कि अधिक मुनाफा किसानों को अंतरित करने पर कर लगता था। मोदी सरकार ने बजट में उस व्यवस्था को समाप्त कर किसानों को 8,000 करोड़ रुपये से अधिक का फायदा पहुंचाया। सहकारिता की सभी इकाइयों पर लगने वाले सरचार्ज को भी 12 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया। इसके अलावा क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट के तहत सहकारी बैंकों को मान्यता नहीं थी, लेकिन भारत सरकार ने फैसला किया कि क्रेडिट गारंटी फंड की सभी योजनाओं को सहकारी बैंकों के माध्यम से नीचे तक पहुंचाया जाए।
ऑर्गेनिक कृषि उत्पादों की मार्केटिंग के लिए अमूल के साथ नई पहल
शाह ने कहा, ऑर्गेनिक कृषि उत्पादों की मार्केटिंग के लिए वर्तमान में कोई व्यवस्था नहीं है, लेकिन भारत सरकार ने अमूल के तत्वाधान में एक पहल की है। सरकार बहु राज्यीय सहकारी सोसायटी कानून में भी संशोधन करने जा रही है। सहकारिता मंत्रालय बनाने के बाद इस नई शुरूआत से जो बदलाव आएगा उससे हमारी भर्ती, खरीद और ऑडिट सिस्टम आदि में भी पारदर्शिता आएगी। इससे देश की जनता में सहकारिता आंदोलन की विश्वसनीयता बढ़ेगी और सहकारिता आंदोलन एक नए प्राण लेकर पीएम मोदी की 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान के लिए तैयार होगा।
गुजरात का सहकारिता आंदोलन देशभर के लिए सफल मॉडल
शाह ने कहा, गुजरात का सहकारिता आंदोलन देशभर में सहकारिता के लिए सफल मॉडल माना जाता है। गुजरात ने सहकारिता की आत्मा को बचाए रखने का काम किया है। देश में बहुत कम राज्य ऐसे हैं जहां पैक्स से लेकर एपैक्स तक सहकारिता अच्छे तरीके, सिद्धांतों के अनुरूप और पारदर्शिता के साथ चलती हो, उनमें गुजरात शामिल है। आजादी के समय से स्वदेशी और स्वावलंबन के दो स्तंभों के आधार पर सरदार पटेल और मोरारजी देसाई ने गांधीजी के नेतृत्व में सहकारिता आंदोलन की शुरुआत की और बाद में त्रिभुवनदास पटेल और बैकुंठभाई मेहता से लेकर अनेक कार्यकर्ता इसके साथ जुड़ते गए। उन्होंने पूरा जीवन सहकारिता को मजबूत बनाने में लगा दिया और उनके द्वारा बोया गया वो बीज आज एक वटवृक्ष बनकर देश और दुनिया के सामने खड़ा है।