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चिंताजनक: कहीं होम आइसोलेशन तो कहीं गलत इलाज बन रहा फंगस का कारण

Fri, 28 May 2021 06:30 AM IST
Jeet Kumar परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 28 May 2021 06:30 AM IST
सार

  • फंगस के पीछे हर वजह अनियंत्रित मधुमेह या फिर स्टेरॉयड से जुड़ी नहीं
  • जोधपुर एम्स के डॉक्टरों ने कहा, 10 में से 8 मरीजों ने खुद से लिया स्टेरॉयड
  • 100 में से 60 फंगस के रोगी 30 से 35 साल की आयु के

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home isolation treatment may causing fungus
ब्लैक फंगस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना संक्रमित या रिकवर मरीजों में फंगस काफी तेजी से फैल रहा है लेकिन अभी तक इसके ठोस कारण पता नहीं चले हैं। जबकि अलग-अलग शहर में फंगस के अलग ही कारण दिखाई दे रहे हैं।

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कहीं अस्पतालों में भर्ती मरीजों को अधिक स्टेरायॅड देने की वजह से वह फंगस की चपेट में आए हैं तो कहीं घरों में ऑक्सीजन लीक या पुराने सिलिंडर की वजह से ब्लैक फंगस मिला है।
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कहीं होम आइसोलेशन वालों में सबसे ज्यादा फंगस के मामले मिल रहे हैं तो कहीं गलत चिकित्सा या फिर व्हाट्सएप के जरिए प्रिस्क्रिप्शन लेने के बाद स्टेरॉयड युक्त दवाओं का सेवन करने जैसे मामले सामने आए हैं।
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जोधपुर स्थित एम्स के डॉ. अमित गोयल का कहना है कि उनके यहां फंगस के 10 में से आठ मरीज ऐसे हैं जिन्होंने ओपीडी आधारित स्टेरायॅड दवाओं का सेवन किया था।

यानी इन मरीजों ने फोन पर किसी से सलाह ली और उन्होंने एजिथोमाइसनि, मेड्रोल, विटामिन सी, जिंकोविट जैसी प्रचलित दवाएं लिख दी हैं और लोगों ने उनका सेवन कर लिया। जबकि इन्हें दवाओं के दुष्प्रभाव के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। न ही इन्हें पता था कि स्टेरॉयड दवाएं लेने के बाद दिन में दो बार मधुमेह की जांच आवश्यक है। एम्स जोधपुर में फंगस रोगियों की मृत्युदर 50 फीसदी तक दर्ज की जा चुकी है।

वहीं नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के पूर्व निदेशक डॉ. एनएन माथुर का कहना है कि उनके यहां 100 में से 60 फंगस के रोगियों की आयु 30 से 35 साल है जिनमें से कुछ को अनियंत्रित मधुमेह की शिकायत भी है। इन युवाओं में फंगस इसलिए भी बढ़ा क्योंकि होम आइसोलेशन में रहते हुए इन्होंने पैनिक होकर इंटरनेट, व्हाट्सएप के आधार पर दवाओं का सेवन किया।


डॉ. माथुर ने बताया कि उनके यहां अस्पताल में फंगस की मृत्युदर 45 फीसदी है जो कोरोना से 44 फीसदी अधिक है और ऑपरेशन दर 90 फीसदी तक है। इन दोनों ही अस्पतालों में डॉक्टरों ने कहा कि उनके यहां सबसे ज्यादा फंगस के मरीज होम आइसोलेशन वाले हैं जिन्हें अस्पतालों में बेड नहीं मिला तो वह अपने घर में ही उपचार लेने लगे थे।

करीब 20 से 30 फीसदी मरीज ऐसे भी हैं जो जानबूझकर अस्पताल नहीं गए। उनका मानना था कि अस्पताल अगर कोई जाएगा तो वह लौटकर वापस नहीं आएगा।

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