फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Historic moments that happened 60 years ago repeated at Vikram Sarabhai Space Center

यादें: काउंटडाउन नहीं, काउंटअप घड़ी से हुआ था पहला रॉकेट प्रक्षेपण, 60 साल पहले घटे ऐतिहासिक क्षण दोहराये

Mon, 27 Nov 2023 06:55 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम Published by: यशोधन शर्मा Updated Mon, 27 Nov 2023 06:55 AM IST
सार

इस विशेष आयोजन में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के पूर्व निदेशक 80 साल के काले को इसरो ने आमंत्रित किया था। काले ने बताया कि पहले प्रक्षेपण में यह गिनती एकदम सही समय पर रखना बेहद जरूरी था।

विज्ञापन
Historic moments that happened 60 years ago repeated at Vikram Sarabhai Space Center
VSSC - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

छह दशक पहले थुम्बा से हुए भारत के पहले साउंडिंग रॉकेट प्रक्षेपण के क्षण दोहराए गए। खास बात थी कि 21 नवंबर 1963 को हुए इस प्रक्षेपण का काउंटडाउन करने वाले प्रमोद पुरुषोत्तम काले ने फिर एक बार माइक्रोफोन थामा और रॉकेट प्रक्षेपण का 20 सेकंड का काउंटडाउन किया।

विज्ञापन


काले ने इस मौके पर कई रोचक बातें भी बताईं। जैसे, देश का पहला साउंडिंग रॉकेट प्रक्षेपण दिन में नहीं, सूर्यास्त के बाद हुआ था। इसके लिए घड़ी खुद काले ने बनाई, यह काउंटडाउन नहीं, काउंटअप करती थी। इसलिए उल्टी गिनती खुद काले ने पढ़ी और इसी के बाद भारत अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में काउंटअप यानी आगे ही बढ़ता गया।
विज्ञापन


इस विशेष आयोजन में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के पूर्व निदेशक 80 साल के काले को इसरो ने आमंत्रित किया था। काले ने बताया कि पहले प्रक्षेपण में यह गिनती एकदम सही समय पर रखना बेहद जरूरी था।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने प्रक्षेपण के बाद भी काफी वक्त इसे जारी रखा, ताकि प्रक्षेपण से अंतरिक्ष में बनी सोडियम वाष्प की तस्वीरें चार अलग-अलग अंतरिक्ष निगरानी केंद्रों से ली जा सकें। 1963 के प्रक्षेपण ने देश को अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाया, इसके महज 6 साल बाद 1969 में इसरो का जन्म हुआ।

साइकल पर रॉकेट वाले दिन किए याद
आयोजन के दौरान काले के कई सहकर्मी भी मौजूद थे। वह साथ बैठकर पुराने दिन याद करते करते नजर आए कि किस तरह साइकल पर रॉकेट के हिस्से ले जाकर उन्हें जोड़ते थे। फिर इन्हें साथ में लॉन्च भी किया। इस काम में शामिल रहे काले के कई सहकर्मी अब इस दुनिया में नहीं हैं।

पहले बैच में केवल कलाम एयरोनॉटिकल इंजीनियर
रॉकेट प्रक्षेपण के लिए विक्रम साराभाई के बनाए शुरुआती बैच में अहमदाबाद के रहने वाले काले शामिल थे। बैच को रॉकेट निर्माण, प्रक्षेपण और उपकरण बनाने के लिए जनवरी 1963 को प्रशिक्षण पर भेजा गया। काले ने बताया, उस बैच में एपीजे अब्दुल कलाम इकलौते एयरोनॉटिकल इंजीनियर थे।

आज अवसर भरपूर, सरकार का साथ भी शानदार
काले ने कहा कि आज युवा पीढ़ी के पास उनके समय के मुकाबले भरपूर अवसर हैं। बाधाएं बहुत कम बची हैं। शिक्षण संस्थानों और उद्योगों ने अंतरिक्ष विज्ञान में देश की प्रगति के लिए अहम योगदान दिया है। सरकार का भी शानदार साथ मिल रहा है।


चंद्रयान-3 व आदित्य एल1 ने घरेलू तकनीकी क्षमताएं साबित की
इस अवसर पर केंद्रीय विज्ञान व तकनीक मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने कहा कि चंद्रयान-3 और आदित्य एल1 मिशन की सफलता ने भारत की घरेलू तकनीकी क्षमताएं साबित की हैं। घरेलू तकनीकी क्षमता हासिल करना इसरो के पहले अध्यक्ष व भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के संस्थापक विक्रम साराभाई का सपना था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed