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हिंदी पत्रकारिता दिवस: जानें हिंदी के पहले समाचार पत्र और उन पत्रकारों के बारे में, जिन्होंने हिला दी थी ब्रिटिश हुकूमत

Sun, 30 May 2021 03:35 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Sun, 30 May 2021 03:35 PM IST
सार

हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले पं. जुगल किशोरशुक्ल ने तब शायद कल्पना भी नहीं की होगी कि हिंदी पत्रकारिता  का जो पौधा उन्होंने रोपा है, वह एक दिन विशाल वटवृक्ष बन जाएगा। आइए हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर आपको ‘उदंत मार्तन्ड’ और उस समय के उन पत्रकारों के बारे में बताते हैं, जिन्होंने अपनी कलम से हिला दी ब्रिटिश हुकूमत...

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Hindi Journalism Day: Learn about the first hindi newspaper Udant Martand journalist British rule  pt jugal kishore shukla
हिंदी पत्रकारिता दिवस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदी भाषा में 'उदन्त मार्तण्ड' के नाम से पहला समाचार पत्र 30 मई 1826 को कलकत्ता (अब कोलकाता) से निकाला गया था। इसलिए इस दिन को हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है। कानपुर के पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने इसे कलकत्ता (अब कोलकाता) से एक साप्ताहिक समाचार पत्र के तौर पर शुरू किया था। हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले पं. जुगल किशोर ने तब शायद कल्पना भी नहीं की होगी कि हिंदी पत्रकारिता  का जो पौधा उन्होंने रोपा है, वह एक दिन विशाल वटवृक्ष बन जाएगा। आइए हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर आपको ‘उदंत मार्तन्ड’ और उस समय के उन पत्रकारों के बारे में बताते हैं, जिन्होंने अपनी कलम से हिला दी ब्रिटिश हुकूमत...

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औपनिवेशिक ब्रिटिश भारत में हिंदुस्तानियों के हक की बात करना बहुत बड़ी चुनौती बन चुका था। उस दौर में पेशे से वकील कानपुर निवासी पं.जुगल किशोर शुक्ल हिंदी भाषी लोगों तक खबरों को पहुंचाने के लिए पहले हिंदी समाचार पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' की शुरुआत की थी। यह साप्ताहिक अखबार था, जो हर हफ्ते मंगलवार को पाठकों तक पहुंचता था। 
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हिंदी का नहीं था एक भी समाचार पत्र
परतंत्र भारत की राजधानी कलकत्ता में अंग्रजी शासकों की भाषा अंग्रेजी के बाद बांग्ला और उर्दू का प्रभाव था। इसलिए उस समय अंग्रेजी, बांग्ला और फारसी में कई समाचार पत्र निकलते थे, लेकिन हिंदी भाषा का एक भी समाचार पत्र मौजूद नहीं था। अलबत्ता 1818-19 में कलकत्ता स्कूल बुक के बांग्ला समाचार पत्र ‘समाचार दर्पण’ में कुछ हिस्से हिंदी में भी होते थे। 
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'उदन्त मार्तण्ड' एक साहसिक प्रयोग
उस काल में 'उदन्त मार्तण्ड' एक साहसिक प्रयोग था। इस साप्ताहिक समाचार पत्र के पहले अंक की 500 प्रतियां छापी गईं। कोलकाता में हिंदी भाषी पाठकों की कमी की वजह से उसे ज्यादा पाठक नहीं मिल सके। दूसरी बात कि हिंदी भाषी राज्यों से दूर होने के कारण उन्हें समाचार पत्र डाक द्वारा भेजना पड़ता था। डाक दरें बहुत ज्यादा होने की वजह से इसे हिंदी भाषी राज्यों में भेजना भी आर्थिक रूप से महंगा सौदा हो गया था। 'उदन्त मार्तण्ड' का शाब्दिक अर्थ है ‘समाचार-सूर्य‘। अपने नाम के अनुरूप ही उदन्त मार्तण्ड हिंदी की समाचार दुनिया के सूर्य के समान ही था। 

आर्थिक तंगी के चलते बंद करना पड़ा था प्रकाशन

पंडित जुगल किशोर ने सरकार से बहुत अनुरोध किया कि वे डाक दरों में कुछ रियायत दें, जिससे हिंदी भाषी प्रदेशों में पाठकों तक समाचार पत्र भेजा जा सके, लेकिन ब्रिटिश सरकार इसके लिए राजी नहीं हुई। अलबत्ता, किसी भी सरकारी विभाग ने 'उदन्त मार्तण्ड' की एक भी प्रति खरीदने पर भी रजामंदी नहीं दी। पैसों की तंगी की वजह से 'उदन्त मार्तण्ड' का प्रकाशन बहुत दिनों तक नहीं हो सका और आखिरकार 4 दिसंबर 1826 को इसका प्रकाशन बंद कर दिया गया। 

आज हिंदी पत्रकारिता का दौर पूरी तरह बदल चुका है। पत्रकारिता में आर्थिक निवेश होने के कारण इसे उद्योग का दर्जा भी हासिल हो चुका है। हिंदी के पाठकों की संख्या की संख्या में भी लगातार इजाफा जारी है।

'प्रताप' ने बढ़ाई अंग्रेजों की चिंता
पत्रकारिता में क्रांतिकारिता का रंग गणेश शंकर विद्यार्थी ने भरा था। उन्होंने उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से 9 नवंबर 1913 को 16 पृष्ठ का ‘प्रताप’ समाचार पत्र शुरू किया था। यह काम शिव नारायण मिश्र, गणेश शंकर विद्यार्थी, नारायण प्रसाद अरोड़ा और कोरोनेशन प्रेस के मालिक यशोदा नंदन ने मिलकर किया था। चारों ने इसके लिए सौ-सौ रुपये की पूंजी लगाई थी। पहले साल से पृष्ठों की वृद्धि का सिलसिला बढ़ा तो फिर बढ़ता ही रहा। कुछ ही दिन बाद यशोदा नंदन और नारायण प्रसाद अरोड़ा अलग हो गए। शिव नारायण मिश्र और गणेश शंकर विद्यार्थी ने ‘प्रताप’ को अपनी कर्मभूमि बना लिया। विद्यार्थी जी के समाचार पत्र प्रताप से क्रांतिकारियों को काफी बल मिला। 

पत्रकारिता के कर्णधार

  • गणेश शंकर विद्यार्थी
  • झंडा गीत के लेखक श्याम लाल गुप्त पार्षद 
  • बाल कृष्ण शर्मा नवीन
  • महावीर प्रसाद द्विवेदी
  • हसरत मोहानी जिन्होंने साहित्य के जरिए अंग्रेजों पर चलाई कलम
  •  रमा शंकर अवस्थी, वर्तमान अखबार के संपादक

अंग्रेजों ने इन पत्र-पत्रिकाओं को किया था जब्त

भयंकर, चंद्रहास, अछूत सेवक, चित्रकूट आश्रम, लाल झंडा, वनस्पति, मजदूर ये सभी ऐसी पत्र व पत्रिकाएं हैं, जिन्हें अंग्रेजों ने जब्त कर जुर्माना वसूला था। 

20वीं शताब्दी के अखबार
19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में हिंदी के अनेक दैनिक समाचार पत्र निकले जिनमें हिन्दुस्तान, भारतोदय, भारतमित्र, भारत जीवन, अभ्युदय, विश्वमित्र, आज, प्रताप, विजय, अर्जुन आदि प्रमुख हैं। 20वीं शताब्दी के चौथे-पांचवे दशकों में  अमर उजाला, आर्यावर्त, नवभारत टाइम्स, नई दुनिया, जागरण, पंजाब केसरी,  नव भारत आदि प्रमुख हिंदी दैनिक समाचार पत्र सामने आए। 

राजा राममोहन राय का बंगाल गजट
हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत बंगाल से हुई और इसका श्रेय राजा राममोहन राय को दिया जाता है। राजा राममोहन राय ने ही सबसे पहले प्रेस को सामाजिक उद्देश्य से जोड़ा और भारतीयों के सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक हितों का समर्थन किया। उन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियों पर प्रहार किए और अपने पत्रों के जरिए जनता में जागरूकता पैदा की। राम मोहन राय ने कई पत्र शुरू किए, जिसमें साल 1816 में प्रकाशित बंगाल गजट अहम है, जो भारतीय भाषा का पहला समाचार पत्र था। लेकिन 30 मई 1826 को कलकत्ता से प्रकाशित 'उदन्त मार्तण्ड' हिंदी भाषा का पहला समाचार पत्र माना जाता है। 

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