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बढ़ते तापमान के चलते दोगुनी रफ्तार से पिघल रहे हिमालय के ग्लेशियर 

Mon, 08 Feb 2021 05:29 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 08 Feb 2021 05:29 AM IST
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Himalayan glaciers melting at double speed due to rising temperature
ग्लेशियर

21वीं सदी की शुरुआत में ही बढ़ते तापमान के कारण हिमालय के ग्लेशियर दोगुनी रफ्तार से पिघल रहे हैं। यही नहीं हर साल आधी बर्फ पिघल रही है, जिसकी वजह से भारत समेत कई देशों के करोड़ों लोगों के लिए पानी की कमी का संकट पैदा हो गया है।

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जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित अध्ययन में दावा, भारत, चीन, नेपाल और भूटान में जलवायु परिवर्तन ग्लेशियरों को निगल रहा
40 वर्षों के उपग्रह के विश्लेषण के आधार पर अध्ययनकर्ताओं को पता चला है कि भारत, चीन, नेपाल और भूटान में जलवायु परिवर्तन हिमालय के ग्लेशियरों को निगल रहा है। यह दावा 2019 में प्रकाशित एक अध्ययन में किया गया है, जो जून, 2019 में जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित हुआ था। 
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अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2000 के बाद से हर साल तेजी से बर्फ पिघल रही है। 1975 से 2,000 के मुकाबले ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार दोगुनी हो चुकी है। अध्ययन के प्रमुख लेखक और अमेरिका में कोलंबिया विश्वविद्यालय में पीएचडी कर रहे जोशुआ मौरर ने कहा, इससे स्पष्ट है कि इस समय नियमित अंतराल में हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।
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इस आधार पर बीते चार दशकों में ग्लेशियरों ने अपने कुल वजन के एक चौथाई हिस्से को गंवा दिया होगा। अध्ययन में इस क्षेत्र के आंकड़ों का आकलन किया गया है, जो वर्तमान उपग्रहों से लिए गए डाटा पर आधारित है। अध्ययन में हिमालय से सटे पहाड़ों पामीर, हिंदुकुश या तियान शान इलाकों को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, कई अध्ययन यह बताते हैं कि इन इलाकों में भी ग्लेशियर इसी तरह से पिघल रहे हैं।

25 साल के मुकाबले 16 साल में एक डिग्री बढ़ा तापमान
अध्ययन में कहा गया है कि ग्लेशियरों के पिघलने में तापमान का बड़ा योगदान है। साल 1975 से 2,000 की तुलना में 2,000 से 2016 तक एक डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान दर्ज किया गया है।

80 करोड़ आबादी ग्लेशियरों पर ही निर्भर
अध्ययन के मुताबिक, दुनिया की करीब 80 करोड़ आबादी सिंचाई, जल विद्युत और पीने के पानी के लिए हिमालय के ग्लेशियरों पर निर्भर हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में आखिरकार पानी की कमी हो जाएगी।


2,000 किमी तक फैले 650 ग्लेशियरों के सैटेलाइट तस्वीरों को किया विश्लेषण
अध्ययनकर्ताओं ने पश्चिम से पूर्व की ओर 2,000 किमी तक फैले 650 ग्लेशियरों के सैटेलाइट चित्रों का विश्लेषण किया गया। इसके लिए एक थ्रीडी मॉडल बनाया गया, जिसमें समय के साथ ग्लेशियरों की बदलती ऊंचाई दर्शाई गई। उन्होंने पाया कि 1975 से वर्ष 2000 तक हर साल ग्लेशियर औसतन लगभग 0.25 मीटर बर्फ खो रहे थे, लेकिन वर्ष 2000 के बाद से बर्फ पिघलने की रफ्तार में तकरीबन आधा मीटर सालाना की तेजी आई।

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