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Drone: लद्दाख में आयोजित होंगे 'हिम-ड्रोन-ए-थॉन' और हिमटेक 2024, हाई एल्टीट्यूड इलाकों में सेना को मिलेगी मदद

Wed, 04 Sep 2024 11:01 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 04 Sep 2024 11:01 PM IST
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Him Drone a thon Ladakh Himtech 2024 High Altitude Areas Indian Army to get upper hand news and updates
भारतीय सेना। - फोटो : अमर उजाला
भारतीय सेना जल्द ही लद्दाख के हाई एल्टीट्यूड एरिया में HIM-DRONE-A-THON 2' और 'HIMTECH-2024' का आयोजन करने जा रही है। इनमें ड्रोन बनाने वाली कंपनियों को आमंत्रित किया गया है, जहां वे हाई एल्टीट्यूड एरिया में अपने ड्रोन उड़ा कर अपनी क्षमताओं का परिचय देंगी। भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड ने 'रक्षा आत्मानिर्भरता' विजन के तहत हाई एल्टीट्यूड एरिया (HAA) में मिलिट्री इक्विपमेंट्स पहुंचाने और इससे जुड़ी समस्याओं के समाधानों के लिए फिक्की के साथ मिल कर लेह में 'हिमटेक 2024' और 'हिम ड्रोन-ए-थॉन 2024' का आयोजन किया है। इनमें हिम-ड्रोन-ए-थॉन-2 लेह के पास वारी ला में 17-18 सितंबर को आयोजित होगा। इसके बाद 20-21 सितंबर को हिमटेक-2024 का आयोजन होगा। 

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आर्मी डिजाइन ब्यूरो के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल सीएस मान ने बताया कि भारतीय सेना सियाचिन ग्लेशियर की बर्फीली ऊंचाइयों से लेकर बीहड़ हिमालय तक तैनात है, जहां भारतीय सैनिक रोजाना मौसम की बेजोड़ प्रतिकूलताओं का सामना करते हैं। ड्रोन ऑपरेशन के लिए जब हवा हल्की हो जाती है और इंजन की परफॉरमेंस पर प्रतिकूल असर पड़ता है। वहीं, तेज हवाएं और ठंडा तापमान भी बेहद अहम कारक है। भारतीय सेना ऐसी परिस्थितियां का सामना करती है और उसे ऐसे सिस्टम की जरूरत है, जो इन परिस्थितियों में ठीक ढंग से काम कर सकें। उन्होंने कहा कि सियाचिन दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र है और ऐसी परिस्थितियां कहीं और नहीं हैं। ऐसे हालात का सामना करने के लिए स्वदेशी समाधान खोजे जा रहे हैं। यदि भारतीय कंपनियों के उत्पाद यहां सफल होते हैं, तो यह उनके लिए अंतर्राष्ट्रीय दरवाजे भी खुलेंगे और भारत को एक विश्वसनीय ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनाने में भी मदद मिलेगी। 

मेजर जनरल मान ने आगे कहा कि इस कार्यक्रम में कई भारतीय ड्रोन कंपनियां 14 कोर के तहत हाई एल्टीट्यूड एरिया में तैनाती के लिए नॉर्दर्न कमान के सामने अपने उत्पाद का प्रदर्शन करेंगी। हिम-ड्रोन-ए-थॉन कार्यक्रम को 4000-5000 मीटर की ऊंचाई पर वारी ला में आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम सभी स्वदेशी ड्रोन निर्माताओं के लिए खुला है और इसमें सर्विलांस ड्रोन, लोइटरिंग मुनिशन, लॉजिस्टिक्स ड्रोन, स्वार्म ड्रोन और पेलोड ड्रोन बनाने वाली कंपनियां हिस्सा लेंगी। अभी तक 25 से अधिक ड्रोन बनाने वाली कंपनियों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। खास बात यह होगी कि ड्रोन कंपनियों की क्षमताओं को साबित करने के लिए सुपर हाई-एल्टीट्यूड क्षेत्र में एक कंपटीशन भी आयोजित किया जाएगा। 



नॉर्दर्न कमांड के मेजर जनरल पीएस भट्टी ने जानकारी देते हुए कहा, "हाई एल्टीट्यूड एरिया में उड़ने वाले ड्रोन मैदानी इलाकों वाले ड्रोन से अलग होते हैं। मैदानी इलाकों में ड्रोन 5,000 फीट की ऊंचाई तक जा सकते हैं, जबकि पहाड़ी इलाकों में उन्हें उसी ऊंचाई पर लॉन्च किया जाता है। कई बार वे उड़ान नहीं भर पाते या कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और उनकी सहनशक्ति कम हो जाती है।  

इसके अलावा लेह में पहली बार HIMTECH 2024 का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य उत्तरी सीमाओं पर ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए टेक्नोलॉजी और सिस्टम डेवलप करना है। फिक्की के सहयोग से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में न केवल हाई एल्टीट्यूड एरिया के लिए बनाए गए नई पीढ़ी के इक्विपमेंट्स का प्रदर्शन किया जाएगा, बल्कि लेह को न्यू टेक्नोलॉजी डेवलपर्स, इंडस्ट्री और शिक्षाविदों के लिए नए बिजनेस डेस्टिनेशन के तौर पर भी पेश किया जाएगा। यह कार्यक्रम भारतीय उद्योगों को आधुनिक मानव रहित प्रणालियों, ऑल टैरेन मोबिलिटी सॉल्यूशंस, ऑटोनॉमस सिस्टम्स और एडवांस सोल्जर सिस्टम और टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। 
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