{"_id":"5f1cf1028ebc3e9f6070c139","slug":"high-percentage-of-rapid-antigen-negative-test-come-positive-in-rtpcr-testing-method","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना: रैपिड एंटीजन टेस्ट के ज्यादातर मामले गलत, आरटी-पीसीआर में आ रहे संक्रमित","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
कोरोना: रैपिड एंटीजन टेस्ट के ज्यादातर मामले गलत, आरटी-पीसीआर में आ रहे संक्रमित
Sun, 26 Jul 2020 08:27 AM IST
Tanuja Yadav
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sun, 26 Jul 2020 08:27 AM IST
विज्ञापन
corona in india
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना की टेस्टिंग प्रक्रिया रैपिड एंटीजन टेस्ट को लेकर कई बातें सामने आ रही हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक रैपिड एंटीजन में आने वाले ज्यादातर नकारात्मक टेस्ट आरटी-पीसीआर से करने पर सकारात्मक आ रहे हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां आरटी-पीसीआर पर निर्भरता बढ़ रही है।
विज्ञापन
मुंबई की दो बड़ी सार्वजनिक प्रयोगशालाओं से मिले डाटा के मुताबिक 65 फीसदी कोरोना संक्रमित लोग जिनकी रिपोर्ट रैपिड एंटीजन टेस्ट में निगेटिव आई थी, उनकी आरटी-पीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। हालांकि दिल्ली जैसे राज्य में इसका उल्टा है, यहां रैपि़ड एंटीजन टेस्ट की सफलता दर महाराष्ट्र की तुलना में अच्छी है।
विज्ञापन
18-21 जुलाई के बीच दिल्ली में 15 फीसदी सिम्प्टोमैटिक कोरोना मरीज ऐसे थे जिनकी रिपोर्ट रैपिड एंटीजन टेस्ट में निगेटिव आई थी लेकिन आरटी-पीसीआर टेस्टिंग में वो पॉजिटिव पाए गए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 18-21 जुलाई के बीच 3.6 लाख लोगों का टेस्ट रैपिड एंटीजन से हुआ था, इनमें से छह फीसदी मरीज ही कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे।
विज्ञापन
2,294 मरीजों की रिपोर्ट निगेटिव आई थी, जिनका बाद में आरटी-पीसीआर टेस्ट किया गया और कुल 15 फीसदी मरीज कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए। यही वजह है कि तमिलनाडु में हर दिन 113 अस्पतालों के 50,000 कोरोना संदिग्ध मरीजों का टेस्ट किया जाता है और ये टेस्ट आरटी-पीसीआर विधि के जरिए ही किया जाता है।
तमिलनाडु के स्वास्थ्य सचिव जे राधाकृष्णन ने कहा कि हमारे पास आरटी-पीसीआर की उपलब्धता अच्छी मात्रा में है, इसलिए संदिग्ध लोगों का टेस्ट इसी प्रक्रिया के जरिए किया जा रहा है। बंगलूरू में 20 जुलाई से रैपिड एंटीजन टेस्टिंग की जा रही है और अब तक 8,500 लोगों का टेस्ट किया जा चुका है।
हालांकि बंगलूरू में किए जा रहे रैपिड एंटीजन टेस्ट का कोई विश्लेषण नहीं किया गया है। दिल्ली के एक स्वास्थ्य अधिकारी के मुताबिक रैपिड एंटीजन टेस्ट, आरटी-पीसीआर की तुलना में कम संवेदनशील हैं लेकिन इसके जरिए एक घंटे में कोरोना की रिपोर्ट आ जाती है। इसलिए इस टेस्ट को स्क्रीनिंग के लक्ष्य से ही इस्तेमाल किया जा रहा है।
पिछले 24 घंटों में दिल्ली में 14,810 रैपिड एंटीजन टेस्ट और 5,250 आरटी-पीसीआर टेस्ट किए जा चुके हैं। तेलंगाना के हैदराबाद और दूसरे शहरों में कोरोना की कुल टेस्ट किए गए मामलों 60-70 फीसदी रैपिड एंटीजन की मदद से किए गए हैं। हालांकि तेलंगाना में ज्यादा झूठे टेस्ट का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है।
तेलंगाना के स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि रैपि़ड एंटीजन टेस्ट में आने वाले निगेटिव लोगों में सात फीसदी मामले ही ऐसे हैं, जिनका आरटी-पीसीआर टेस्ट पॉजिटिव आया है।
आरटी पीसीआर टेस्ट
रिअल टाइम पॉलीमरेज चेन रिएक्शन या पीसीआर टेस्ट कोरोना की टेस्टिंग का महत्वपूर्ण आयाम है। पॉलीमर वे एंजाइम होते हैं जो डीएनए की नकल बनाते हैं। इसमें कोरोना संक्रमित व्यक्ति के स्वैब सैंपल से डीएनए की नकल तैयार कर संक्रमण की जांच की जाती है।
इसकी जांच वायरस के डीएनए से किया जाता है। अगर मिलान सही मिलता है तो व्यक्ति में कोरोना की पुष्टि हो जाती है। लेकिन यह बहुत अत्याधुनिक लैब में ही किया जा सकता है। पीसीआर टेस्ट में चार से छह घंटे का समय लग सकता है। इस टेस्ट में भी एक बार में संक्रमण का पता नही चलता है, जिसे दो या तीन बार टेस्ट कर जांचा जाता है।
रैपिड टेस्टिंग किट
इस टेस्ट के लिए नाक में एक पतली से नली से सैंपल लिया जाता है। नाक से लिए गए उस लिक्विड को टेस्ट किट में डाला जाता है। ये किट थोड़ी ही देर में बता देती है कि जिसका सैंपल डाला गया है वो कोरोना वायरस से संक्रमित है या नहीं। ये किट उसी तरह होती है, जैसे प्रेग्नेंसी टेस्ट किट होती है। सैंपल डालने के बाद अगर 2 रेड लाइन आती है तो इसका मतलब है कि व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव है और अगर सिर्फ एक लाइन आती है तो मतलब व्यक्ति कोरोना नेगेटिव है।