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Karnataka HC: अदालत ने जैन विश्वविद्यालय के छात्रों को दी राहत, कार्यवाही पर लगाई रोक, जानें क्या है मामला
Thu, 20 Jul 2023 09:54 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, बंगलूरू।
पीटीआई, बंगलूरू।
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 20 Jul 2023 09:54 PM IST
सार
छात्रों के खिलाफ कार्यवाही पर रोक की अनुमति बुधवार को दी गई, जबकि प्रोफेसरों के खिलाफ कार्यवाही पर रोक की अनुमति पांच जुलाई को दे दी गई थी।
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Karnataka High Court
- फोटो : PTI
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विस्तार
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक मामले में जैन विश्वविद्यालय के सात छात्रों और दो प्रोफेसरों को राहत देते हुए उनके खिलाफ कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें उन पर दलितों और बीआर अंबेडकर के खिलाफ 'अपमानजनक' नाटक करने का आरोप लगाया गया था।
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छात्रों के खिलाफ कार्यवाही पर रोक की अनुमति बुधवार को दी गई, जबकि प्रोफेसरों के खिलाफ कार्यवाही पर रोक की अनुमति पांच जुलाई को दे दी गई थी। प्रोफेसरों ने इस मामले में अलग से एक याचिका दायर की थी। छात्रों पर दलितों और बीआर अंबेडकर के खिलाफ अपमानजनक नाटक करने का आरोप है और समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक द्वारा दायर एक शिकायत के बाद उन पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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जैन मानित विश्वविद्यालय (Jain Deemed University) संस्थान के सात छात्रों ने आठ फरवरी, 2023 को अपने कॉलेज में एक व्यंग्यात्मक नाटक जो समाज में प्रचलित आरक्षण प्रणाली के इर्द-गिर्द घूमती है का प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन निमहंस कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया था और इस मामले में शिकायत 10 फरवरी को दर्ज की गई थी और उसी दिन एफआईआर दर्ज की गई थी।
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दायर की गई दो अलग-अलग याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एम नागाप्रसन्ना की एकल पीठ ने सुनवाई की। छात्रों द्वारा प्रस्तुत नाटक का प्रदर्शन जैन यूनिवर्सिटी यूथ फेस्ट-23 का हिस्सा था। याचिका के साथ एक कॉम्पैक्ट डिस्क में नाटक की रिकॉर्डिंग हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। हाईकोर्ट ने बुधवार को अंतरिम रोक लगाने के बाद याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी।
याचिका में कहा गया है, याचिकाकर्ताओं द्वारा किया गया मैड-एड एक प्रामाणिक राय की अभिव्यक्ति है जो एक व्यंग्य है। व्यंग्य साहित्य अनादिकाल से अस्तित्व में रहा है, जिसका अर्थ हास्य के माध्यम से किसी विचार, अवधारणा, नीति या यहां तक कि किसी व्यक्ति विशेष की आलोचना करके किसी बिंदु को उजागर करना है। असहमति या राय का ऐसा संचार भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत गारंटीकृत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत संरक्षित है। मामले के सिलसिले में छात्रों को पहले पुलिस ने गिरफ्तार किया था और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
मंगलूरू में पानी की बाल्टी में गिरने से बच्चे की मौत
शहर के कावूर में घर में खेलते समय पानी की बाल्टी में गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि झारखंड का प्रवासी मजदूर फिरोज अंसारी अपने परिवार के साथ कावूर मस्जिद के पास किराए के मकान में रहता है। बुधवार शाम उसकी 20 महीने की बेटी आयशा खेलते समय पानी की बाल्टी में गिर गई और दम घुटने से उसकी मौत हो गई।