फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   High Court is not administratively subordinate to the Supreme Court cannot issue mandates

सुप्रीम कोर्ट: हाई कोर्ट प्रशासनिक तौर पर शीर्ष अदालत के अधीन नहीं, परमादेश नहीं कर सकते जारी

Fri, 04 Feb 2022 09:59 PM IST
कुमार संभव राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार संभव Updated Fri, 04 Feb 2022 09:59 PM IST
सार

एक्टिविस्ट घनश्याम उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि हाई कोर्ट द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के कारण हाई कोर्ट की प्रधान पीठ 'केवल नाम' के लिए काम कर रही है, जिससे वादियों और वकीलों को कठिनाई हो रही है। 

विज्ञापन
High Court is not administratively subordinate to the Supreme Court cannot issue mandates
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दोहराया कि हाई कोर्ट प्रशासनिक तौर पर सर्वोच्च न्यायालय के अधीन नहीं है। शीर्ष अदालत को हाई कोर्ट के प्रशासनिक क्षेत्र को प्रभावित करने वाले निर्देश देने का अधिकार नहीं है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्य कांत की पीठ ने कहा, 'हम हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को परमादेश (मेंडमस) जारी नहीं कर सकते। हाई कोर्ट प्रशासनिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के अधीनस्थ नहीं हैं।'

विज्ञापन


शीर्ष अदालत बॉम्बे हाई कोर्ट के उस प्रशासनिक सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा थी, जिसमें कोविड-19 मामलों में उछाल को देखते हुए अदालत के कामकाज के समय को दोपहर 12 बजे से दोपहर तीन बजे तक सीमित कर दिया गया था। 
विज्ञापन


एक्टिविस्ट घनश्याम उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में कहा गया था कि हाई कोर्ट द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के कारण हाई कोर्ट की प्रधान पीठ 'केवल नाम' के लिए काम कर रही है, जिससे वादियों और वकीलों को कठिनाई हो रही है। याचिका में कहा गया था कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों को खतरे में डाला जा रहा है और यह 'बड़ी चिंता व सार्वजनिक महत्व' का मामला' है।
विज्ञापन
विज्ञापन


शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान पीठ को सूचित किया गया कि हाई कोर्ट पहले ही सामान्य कामकाजी घंटों में वापस आ गया है। इसलिए पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए मसले को संबोधित कर लिया गया है। 
पीठ ने कहा, 'हम नहीं जानते कि बार कैसे प्रतिक्रिया देगा और स्थानीय स्थितियां क्या हैं। आपकी शिकायत काफी हद तक पूरी हो गई है। अब आगे के मुद्दों के लिए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से संपर्क कर सकते हैं।' 


बॉम्बे हाईकोर्ट के जज के रूप में अपना न्यायिक करियर शुरू करने वाले जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पुणे जैसे दूरदराज के स्थानों से कितने कर्मचारी हाईकोर्ट में काम करते हैं। उन्होंने कहा, 'बॉम्बे हाई कोर्ट में कर्मचारी बहुत दूरी तय करके आते हैं। वे 'डेक्कन क्वीन' द्वारा पुणे से आते हैं और लौटते हैं। मेरे निजी सचिव सुबह छह बजे घर से निकलते थे और सुबह 9:30 बजे अदालत पहुंचते थे। उसी तरह उन्हें घर लौटने में रात के नौ बज जाते थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed