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Tamil Nadu: बच्चों में पोर्नोग्राफी की लत पर मद्रास हाईकोर्ट ने जताई चिंता; जानिए मामले पर क्या बोला कोर्ट
Fri, 12 Jan 2024 11:05 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Fri, 12 Jan 2024 11:05 PM IST
सार
बच्चों में बढ़ रही पोर्नोग्राफी की लत को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की लत करियर को तबाह कर देती है।
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Madras High Court
- फोटो : PTI
विस्तार
बच्चों में बढ़ रही पोर्नोग्राफी की लत को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि आजकल के बच्चे पोर्न देखने जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। समाज को उन्हें डांटने के बजाए समझाने के लिए परिपक्व होना चाहिए। हालांकि कोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही को भी रद्द कर दिया, जिस पर अपने मोबाइल फोन के जरिए बच्चों से जुड़ी पोर्न सामग्री डाउनलोड करने का आरोप था। जस्टिस एन आनंद वेंकटेश ने गुरुवार के अपने आदेश में कहा, अधिनियम की धारा 67-बी के तहत अपराध तब बनता है जब आरोपी व्यक्ति ने बच्चों को यौन कृत्य में चित्रित करने वाली सामग्री प्रकाशित, प्रसारित या बनाई हो।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आईटी एक्ट की धारा को व्यापक रूप से वर्णित किया गया है, लेकिन यह उस मामले को शामिल नहीं करता जहां किसी व्यक्ति द्वारा अपने मोबाइल फोन पर बच्चों की पोर्नोग्राफी डाउनलोड की है। हालांकि कोर्ट ने बच्चों के पोर्नोग्राफी देखने पर चिंता व्यक्त की है। गौरतलब है कि पोर्नोग्राफी देखने से बच्चों पर नेगेटिव असर पर रहा है, जिससे उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि बच्चे इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। उन्हें सजा देने के बाद समाज को उन्हें समझाना चाहिए। साथ ही कहा कि उन्हें इस लत से छुटकारा पाने के लिए सलाह देनी चाहिए। न्यायाधीश ने कहा कि जागरूकता की शुरुआत स्कूल से होनी चाहिए, क्योंकि इस तरह की चीजों के सम्पर्क में बच्चे उसी दौर में आते हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि अगर वह अभी भी इस लत से पीड़ित है, तो उसे काउंसलिंग में भाग लेना चाहिए।साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस तरह की लत अन्य आदतों को जन्म देती है, जो व्यक्ति के करियर में बाधा का काम करती हैं।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आईटी एक्ट की धारा को व्यापक रूप से वर्णित किया गया है, लेकिन यह उस मामले को शामिल नहीं करता जहां किसी व्यक्ति द्वारा अपने मोबाइल फोन पर बच्चों की पोर्नोग्राफी डाउनलोड की है। हालांकि कोर्ट ने बच्चों के पोर्नोग्राफी देखने पर चिंता व्यक्त की है। गौरतलब है कि पोर्नोग्राफी देखने से बच्चों पर नेगेटिव असर पर रहा है, जिससे उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
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सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने कहा कि बच्चे इस गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। उन्हें सजा देने के बाद समाज को उन्हें समझाना चाहिए। साथ ही कहा कि उन्हें इस लत से छुटकारा पाने के लिए सलाह देनी चाहिए। न्यायाधीश ने कहा कि जागरूकता की शुरुआत स्कूल से होनी चाहिए, क्योंकि इस तरह की चीजों के सम्पर्क में बच्चे उसी दौर में आते हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि अगर वह अभी भी इस लत से पीड़ित है, तो उसे काउंसलिंग में भाग लेना चाहिए।साथ ही कोर्ट ने कहा कि इस तरह की लत अन्य आदतों को जन्म देती है, जो व्यक्ति के करियर में बाधा का काम करती हैं।
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