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अवैध खनन की सीबीआई जांच को रोकने से हाईकोर्ट का इनकार

Sat, 10 Sep 2016 12:06 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sat, 10 Sep 2016 12:06 AM IST
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High court denies to stop CBI probe for Illegal Mining
- फोटो : file photo

अवैध बालू खनन की सीबीआई जांच से घबराई उत्तर प्रदेश सरकार को शुक्रवार को हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने सीबीआई जांच वापस लेने की सरकार की रिकॉल अर्जी खारिज कर दी है। कहा है कि सीबीआई जांच फिलहाल जारी रहेगी। सीबीआई द्वारा कोर्ट में अपनी जांच रिपोर्ट भी दाखिल कर दी गई है। अदालत रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आवश्यक निर्देश देगी। मामले की सुनवाई के लिए 12 सितंबर की तिथि तय की गई है।

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मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने शुक्रवार सुबह दस बजे कोर्ट में बैठते ही अमर सिंह और अन्य दर्जनों की जनहित याचिका पर प्रदेश सरकार की रिकॉल अर्जी खारिज करने का आदेश सुनाया। इसके बाद सीबीआई के अधिवक्ता ने सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट दाखिल की। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।
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यूपी सरकार ने हाईकोर्ट द्वारा 28 जुलाई 2016 को दिए गए सीबीआई जांच के आदेश को एकतरफा बताते हुए वापस लिए जाने की अर्जी दी थी। महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने दलील दी कि कोर्ट का आदेश एकतरफा है। सीबीआई जांच का आदेश देने से पूर्व सरकार का पक्ष नहीं सुना गया। सरकार स्वयं अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।

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अवैध खनन से करोड़ों के राजस्व की क्षति

High court denies to stop CBI probe for Illegal Mining
हर जिले में पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है जो नियमित अवैध खनन की जांच कर रही है। कहीं से भी अवैध खनन की शिकायत नहीं है। जबकि याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट की रोक के बावजूद अवैध खनन जारी है। अधिकारी और खनन माफिया साठगांठ कर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की क्षति पहुंचा रहे हैं। सुप्रीमकोर्ट की स्पष्ट गाइड लाइन के बावजूद 31 मई 2012 के बाद भी न सिर्फ खनन पट्टे देने के लिए आवेदन मांगे गए बल्कि पुरानी लीज का नवीनीकरण और खनन की अनुमति दी गई। 

अमर सिंह और अन्य द्वारा दाखिल याचिकाओं में साक्ष्य के तौर पर अवैध खनन के फोटोग्राफ भी पेश किए गए। कोर्ट द्वारा दो वकीलों के एडवोकेट कमीशन भी अवैध खनन की पुष्टि की। याची के अधिवक्ता एमडी सिंह शेखर और एमसी चतुर्वेदी का कहना था कि यदि सरकार अवैध खनन नहीं होने का दावा कर रही है तो फिर वह सीबीआई जांच से डर क्यों रही है। जो कुछ भी है वह जांच से सामने आ जाएगा।

रोक के बावजूद जारी है खनन

High court denies to stop CBI probe for Illegal Mining

सीबीआई जांच का आदेश देने से पूर्व हाईकोर्ट ने खनन पर पूरी तरह से रोक लगाई थी। 28 जुलाई को जांच का आदेश देते हुए अदालत ने कहा कि किसी भी प्रकार के अवैध खनन पर रोक लगाई जाए। यदि उनको अधिकारियों तथा माफियाओं की सांठगांठ से खनन की शिकायत मिली तो अदालत जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई का आदेश देगी। इसके बावजूद अवैध खनन जारी है।

साठगांठ की जांच का आदेश

कोर्ट ने सीबीआई को अवैध खनन में अधिकारियों और खनन माफियाओं के बीच साठगांठ की जांच करने का आदेश दिया है। रिपोर्ट छह सप्ताह में देने का निर्देश था। शुक्रवार को सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी है।

अदालत ने इस पर लगाई थी रोक

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1- 31 मई 2012 के बाद निष्पादित लीज के आधार पर कोई खनन न किया जाए।

2- खत्म हो चुकी लीज का नवीनीकरण न किया जाए।

3- नया पट्टा न दिया जाए।

4- सीमित समय के लिए भी खनन की अनुमति नहीं।

5- पट्टे का समय नहीं बढ़ाया जाएगा।

6- किसी को भी फार्म एमएम 11 जारी नहीं किया जाएगा।

7- संबंधित जिलों के डीएम, एसएसपी और खनन अधिकारी की जिम्मेदारी होगी इन निर्देशों के पालन की।
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