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2003 में कांग्रेस वाजपेयी सरकार के खिलाफ लाई थी अविश्वास प्रस्ताव, जानिए तब क्या हुआ था

Sun, 18 Mar 2018 10:45 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 18 Mar 2018 10:45 AM IST
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here is what happened when congress moved no confidence motion against NDA government in 2003
अटल बिहारी वाजपेयी

सोमवार को वाईएसआर कांग्रेस और तेलुगू देशम पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। इससे पहले साल 2003 में भी अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर कांग्रेस अगस्त 2003 में वाजपेयी सरकार के खिलाफ प्रस्ताव लेकर आई थी क्योंकि उन्होंने रक्षा मंत्रालय में जॉर्ज फर्नांडिस को फिर से शामिल किया था। उस समय वाजपेयी के समर्थन में वोट ज्यादा थे लेकिन विपक्षी नेताओं ने इस मौके को नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) के अंदर बहुत से बदलाव करने के तौर पर देखा।

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क्या हुआ


वाजपेयी के नेतृत्व में पहली ऐसी गैर-कांग्रेसी सरकार बनी थी जिसने अपने कार्यकाल को पूरा किया था। एनडीए ने बहुत ही आराम से विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव के दौरान हुई वोटों की गिनती में हरा दिया। एनडीए को 312 वोट मिले जबकि विपक्ष 186 वोटों पर सिमट गया। एआईडीएमके (तमिलनाडु)  की जे जयललिता और फारुक अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस (जम्मू और कश्मीर) ने खुद को इस वोटिंग से अलग रखा। वहीं बहुजन समाज पार्टी ने सरकार के पक्ष में वोट दिया था। उस समय विपक्ष की नेता और कांग्रेस अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी ने सदन में चर्चा शुरू की थी। उन्होंने हिंदी में अपना भाषण दिया और वाजपेयी सरकार को कई मोर्चों पर अस्थिर बताया था।

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इस चर्चा में जॉर्ज फर्नांडिस, लालकृष्ण आडवाणी, प्रियदर्शन दासमुंशी, मणिशंकर अय्यर सहित दूसरे नेताओं ने हिस्सा लिया था। वाजपेयी ने जॉर्ज का पक्ष लेते हुए उन्हें भारत का अब तक का सबसे अच्छा रक्षा मंत्री करार दिया था। यह चर्चा देर रात तक चली थी और वाजपेयी ने रात के 11 बजे अपना पक्ष रखा था। अपने जवाब में उन्होंने सोनिया को ताना मारते हुए कहा था कि चुनावी पारी के लिए मैदान में आइए।
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प्रभाव

वाजपेयी की चुनौती का प्रभाव यह पड़ा कि उस साल चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। इसके अलावा अगले साल लोकसभा चुनाव होने थे। जहां कांग्रेस ने दिल्ली पर जीत दर्ज की वहीं इसका प्रभाव मध्य पद्रेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनावों पर भी पड़ा। भाजपा यहां बेशक जीत गई लेकिन उसकी सीटें कम हो गईं। इसके बाद साल 2004 में हुए चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व में यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) को जीत मिली। इसके बाद साल 2009 में फिर से यूपीए सत्ता पर काबिज हुई थी। साल 2008 में सीपीएम यूपीए सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाई थी। यह प्रस्ताव अमेरिका के साथ हुए परमाणु समझौते की वजह से लाया गया था। हालांकि कुछ वोटों के अंतर से यूपीए की सरकार गिरने से बच गई। 

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