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Maharashtra: यौन शोषण पीड़िता के गर्भ रखने की इच्छा पर बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी, ये उसका अधिकार है

Thu, 05 Sep 2024 03:37 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 05 Sep 2024 03:37 PM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यौन शोषण पीड़िता की किशोरी के गर्भ रखने की इच्छा पर कहा कि ये उसका अधिकार है, उसे गर्भ रखना है या गर्भपात कराना है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने गुरुवार को 17 वर्षीय यौन शोषण पीड़िता की गर्भ रखने की अनुमति भी दी है।

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Her right to choice: HC on teen sexual abuse survivor’s wish to continue pregnancy
बॉम्बे हाई कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को 17 वर्षीय यौन शोषण पीड़िता को गर्भावस्था जारी रखने की अनुमति दी, यह देखते हुए कि वह उसकी प्रजनन स्वतंत्रता और पसंद के अधिकार के प्रति जानकार है। मामले में न्यायमूर्ति ए एस गडकरी और नीला गोखले की खंडपीठ ने कहा कि किशोरी ने शुरू में गर्भावस्था को समाप्त करने की मांग की थी, लेकिन बाद में उसने अपने बच्चे को जन्म देने का फैसला किया क्योंकि वह उस व्यक्ति से शादी करना चाहती थी जिसने कथित तौर पर उसके साथ दुर्व्यवहार किया था।
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'याचिकाकर्ता गर्भावस्था को जारी रखने की हकदार'
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि हम याचिकाकर्ता के प्रजनन स्वतंत्रता, शरीर पर उसकी स्वायत्तता और उसकी पसंद के अधिकार के प्रति सचेत हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर किशोरी चाहे तो वह 26 सप्ताह की गर्भावस्था को चिकित्सकीय तरीके से समाप्त करने की अनुमति देती है। पीठ ने कहा, हालांकि, चूंकि उसने गर्भावस्था को जारी रखने की अपनी स्वेच्छा और इच्छा भी व्यक्त की है, इसलिए वह ऐसा करने की पूरी हकदार है।
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पीड़िता के बुखार होने पर हुआ गर्भावस्था का खुलासा
बता दें कि पीड़िता किशोरी और उसकी मां को गर्भावस्था के बारे में तब पता चला जब उसे बुखार की जांच के लिए ले जाया गया। इसके बाद में 22 वर्षीय एक व्यक्ति के खिलाफ उसका यौन शोषण करने का मामला दर्ज किया गया। जिसके बाद पीड़िता ने गर्भपात कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।
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किशोरी ने सहमति से संबंध बनाने की स्वीकारी थी बात
हालांकि, बाद में किशोरी ने दावा किया कि वह उस व्यक्ति के साथ सहमति से संबंध में थी और उनका इरादा शादी करके बच्चे को पालना था। वहीं नाबालिग लड़की का सरकारी जेजे अस्पताल में डॉक्टरों की एक टीम की तरफ से मेडिकल जांच की गई, जिसने हाईकोर्ट को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कहा गया कि भ्रूण में कोई असामान्यता नहीं थी, लेकिन नाबालिग होने के कारण वह बच्चे को जन्म देने के लिए उचित मानसिक स्थिति में नहीं थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि किशोरी और उसकी मां दोनों ने गर्भावस्था को जारी रखने और इसे रखने की इच्छा जताई है।


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