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भारत पर भी युद्ध की तपिश: वैश्विक आपूर्ति शृंखला होगी प्रभावित; तेल आपूर्ति, सोना-चांदी की कीमत पर पड़ेगा असर

Sun, 01 Mar 2026 05:11 AM IST
Pavan आशुतोष भाटिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशुतोष भाटिया, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Sun, 01 Mar 2026 05:11 AM IST
सार

विशेषज्ञों का मानना है, युद्ध लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 26 लाख बैरल तेल रोजाना होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से मंगवाता है। जनवरी-फरवरी में भारत में हर महीने होने वाले आयात का लगभग 50 फीसदी हिस्सा इसी मार्ग से आया है। इसके बंद होने से भारत के साथ वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर असर पड़ेगा।

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Heat of war also affect India: global supply chains and oil supplies, gold-silver prices will be impacted
ईरान-अमेरिका-इस्राइल जंग का भारत पर भी असर! - फोटो : ANI

विस्तार

इस्राइल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध भारत के लिए भी बड़ा संकट पैदा कर सकता है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद कर दिया है, लंबे समय तक यही स्थिति रहने पर भारत की करीब 40 से 60 फीसदी तक कच्चे तेल की आपूर्ति पर संकट खड़ा हो सकता है, जो इसी रास्ते से आता है।
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घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ने पर माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका सीधा असर आम आदमी की थाली पर पड़ सकता है। आर्थिक गतिविधियां सुस्त पड़ सकती हैं और व्यापार घाटा बढ़ सकता है। शेयर बाजार पर भी असर पड़ सकता है। बाजार में बड़ी बिकवाली और गिरावट देखने को मिल सकती है। निवेशक सुरक्षित विकल्प में सोना और चांदी खरीदना पसंद करते हैं। इनकी कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।
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डिजिटल खतरा बढ़ा
लाल सागर और फारस की खाड़ी में समुद्र के नीचे से गुजरने वाली इंटरनेट केबल भारत को यूरोप और अमेरिका से जोड़ती हैं। युद्ध में इन केबल को नुकसान पहुंचने की आशंका जाहिर की जा रही है। ऐसा हुआ, तो भारत में बैंकिंग, आईटी सेवाओं और संचार पर खतरा मंडरा सकता है।


निर्यात पर पड़ेगा प्रभाव
भारत के निर्यात का 10% से ज्यादा हिस्सा होर्मुज मार्ग से होता है। इसमें बासमती चावल, चाय, मसाले, ताजे फल, सब्जियां व इंजीनियरिंग सामान हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा, हवाई मार्गों में बदलाव हो रहे हैं। समुद्री व्यापार में अनिश्चितता बढ़ गई है। समुद्री मार्ग लंबे समय बंद रहता है, तो शिपमेंट केप ऑफ गुड होप से भेजने पड़ेंगे, यूरोप-अमेरिका के लिए 15-20 दिन अधिक लगेंगे। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष ए. शक्तिवेल ने कहा, हमारे माल की खेप में देरी हो सकती है।

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भारतीयों की सुरक्षा, चाबहार भी जद में
खाड़ी देशों में रहने वाले 89 लाख प्रवासी भारतीय विदेशी आय का मुख्य स्रोत हैं। इनकी सुरक्षा व जरूरत पर निकासी सरकार के लिए चुनौती होगी। भारत की चाबहार बंदरगाह परियोजना अब सीधे युद्ध की जद में है। अस्थिरता से अरबों डॉलर निवेश और व्यापारिक संपर्क योजनाओं पर असर तय है। शिपिंग इंश्योरेंस प्रीमियम में वृद्धि हो सकती है।

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