Report: 2020 में कोरोना नहीं, इन बीमारियों से गई देश में सबसे अधिक लोगों की जान, चौंका देगी आपको यह रिपोर्ट
देश में मौतों का तीसरा प्रमुख कारण जो कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों का 8.9 प्रतिशत है, उसे कोविड-19 के तहत वर्गीकृत किया गया है। 45 साल से ऊपर उम्र वालों की मौत दिल की बीमारी से हुई।
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वर्ष 2020 में देश में पंजीकृत कुल 81.15 लाख चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित मौतों में हृदय रोग, निमोनिया और अस्थमा ने सबसे अधिक 42 प्रतिशत लोगों की जान ली है। मौत के कारणों पर चिकित्सा प्रमाणन रिपोर्ट 2020 के अनुसार, भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त द्वारा तैयार रिपोर्ट बताती है कि कोविड-19 ने लगभग नौ प्रतिशत लोगों की जान ली। इस बीमारी से कुल 1,60,618 लोगों की मौत हुई। जहां संचार प्रणाली के रोगों ने 32.1 प्रतिशत लोगों की जान ली, वहीं श्वसन प्रणाली से संबंधित बीमारियों से 10 प्रतिशत लोगों की मौत हुई।
कोरोना वायरस से गई 9 फीसदी की जान
निमोनिया, अस्थमा और संबंधित बीमारियों से होने वाली मौतों को श्वसन तंत्र के रोगों के कारण होने वाली मौतों में दर्ज किया गया। तीसरा प्रमुख कारण जो कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों का 8.9 प्रतिशत है, उसे विशेष उद्देश्यों के लिए कोड: कोविड-19 के तहत वर्गीकृत किया गया था। कुछ संक्रामक और परजीवी रोग, जो मृत्यु का चौथा प्रमुख कारण थे, उसमें मुख्य रूप से सेप्टीसीमिया और तपेदिक थे। पांचवां प्रमुख कारण अंतःस्रावी, पोषण और मेटाबोलिक संबंधी रोग था जो कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों का 5.8 प्रतिशत रहा। इस श्रेणी के तहत मधुमेह और मेलिटस मौत का प्रमुख कारण थे।
45 साल से ऊपर उम्र वालों की मौत दिल की बीमारी से हुई
देश में मौतों का छठा प्रमुख कारण चोट, जहर, और बाहरी कारण (फ्रैक्चर, दवाओं का जहर और जैविक पदार्थ) रहे। यह कुल मौतों का 5.6 प्रतिशत था। नियोप्लाज्म (कैंसर) सातवां प्रमुख कारण था, जो कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों का 4.7 प्रतिशत रहा। कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मृत्यु में पुरुष 64 प्रतिशत और महिलाएं 36 प्रतिशत थीं। सबसे अधिक मौतें (कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों का 5,17,678 या 28.6 प्रतिशत) 70 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में हुई। 45 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लिए संचार प्रणाली के रोग (हृदय रोग) मौत का पहला प्रमुख कारण था।
कुल चिकित्सकीय प्रमाणित मौतों में (1 वर्ष से कम आयु) कुल 5.7 प्रतिशत शिशुओं की मौत हुई। सभी शिशुओं की मृत्यु का लगभग 71.7 प्रतिशत प्रसवकालीन अवधि के दौरान मुश्किलें पैदा होने से हुई। 15-24 वर्ष के आयु वर्ग में संचार प्रणाली से जुड़ी बीमारी से सबसे अधिक 18 प्रतिशत मौतें हुईं। इसके बाद चोट, जहर, और बाहरी कारणों से 15.7 प्रतिशत मौतें हुईं।