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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पराली जलाना नहीं रोका तो देश 100 साल पीछे चला जाएगा

Wed, 06 Nov 2019 10:11 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Wed, 06 Nov 2019 10:11 PM IST
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hearing in supreme court about delhi pollution
वायु प्रदूषण

पराली की वजह से दिल्ली एनसीआर में बने दमघोंटू माहौल से राहत दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा आदेश सुनाया है। शीर्ष अदालत ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के छोटे व मझोले धान किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि देने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं। 

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अदालत ने राज्य सरकारों को सात दिनों के भीतर किसानों को राशि देने के लिए कहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इसका भुगतान केंद्र सरकार करेगी या फिर राज्य सरकार, यह फैसला बाद में लिया जाएगा। अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्य सरकारें फंड की कमी का बहाना बनाकर इससे बच नहीं सकतीं। 
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राज्य सरकार खरीदेंगी मशीनें 

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को पराली के सही ढंग से निस्तारण के लिए मशीनें खरीदने को कहा है ताकि छोटे व मझोले किसान इसका इस्तेमाल कर सकें। किसानों के उपयोग के लिए इसका परिचालन खर्च भी सरकार को ही वहन करना होगा। 

किसानों को सजा देना समाधान नहीं 

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने किसानों के चलान काटने पर भी आपत्ति जताई। पीठ ने कहा, 'आप गरीब किसानों को सजा देना चाहते हैं। किसानों को सजा देना कोई समाधान नहीं है। पूरा पंजाब, हरियाणा, यूपी और दिल्ली इसके लिए जिम्मेदार है। हम पूरी मशीनरी को बदलने जा रहे हैं।'

...तो देश सौ साल पीछे चला जाएगा 

कोर्ट के समक्ष दलील दी गई कि दो लाख किसानों को पराली जलाने से रोकना संभव नहीं है। मगर अदालत ने इसे खारिज कर दिया और कहा, 'अगर पराली जलाना एकमात्र रास्ता है, तो अब इसे बंद होना होगा। पराली जलने को रोकना होगा। अगर हम इसे नहीं रोकते हैं तो देश 100 साल पीछे चला जाएगा।'

राज्य सरकारों को कड़ी फटकार 

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने बुधवार को सुनवाई करते हुए सरकारों को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने पूछा कि क्या आप लोगों को प्रदूषण से मरने के लिए छोड़ देंगे? क्या आप इस देश को सौ साल पीछे ले जा रहे हैं? अधिकारियों पर नाराजगी जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन पर तुरंत कार्रवाई करने तक की चेतावनी दे डाली। 

शीर्ष अदालत ने पंजाब सरकार को अपनी ड्यूटी नहीं निभाने पर भी कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने पंजाब सरकार से कहा, 'आप अपनी ड्यूटी पूरी करने में बुरी तरह से फेल हुए हैं।' जस्टिस मिश्रा ने आदेश देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि अब कोई पराली न जले। 
 

पंजाब के मुख्य सचिव पर तो जस्टिस मिश्रा इस कदर गुस्सा गए कि उन्हें तुरंत निलंबित करने की चेतावनी भी दे डाली। जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि हर किसी को पता है कि इस साल भी पराली जलाई जा रही है। आखिर सरकार ने इस संबंध में पहले से तैयारी क्यों नहीं की गई और क्यों मशीनें पहले मुहैया नहीं कराई गई? उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि पूरे साल में कोई भी कदम नहीं उठाया गया। अदालत ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि आप महंगे टॉवरों में बैठते हो और राज करते हो। आपको कोई चिंता नहीं है और आपने लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया है। 
 

सत्ता में रहने का अधिकार नहीं 

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों को कड़ी फटकार लगाते हुए उनके सत्ता में बने रहने पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकारों को लोगों की चिंता नहीं है, तो उन्हें सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। आप एक कल्याणकारी सरकार के विचार को भूल चुके हैं। आपको गरीब लोगों की चिंता नहीं है, यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। 

जीने-मरने का सवाल 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सवाल करोड़ों लोगों की जिंदगी और मौत का है। हमें इसके लिए सरकारों को जिम्मेदार बनाना होगा। पीठ ने उड़ानों के रूट बदले जा रहे हैं, लोग अपने घरों में भी सुरक्षित नहीं हैं। क्या आपको शर्म नहीं आती? हमें यह भी पता नहीं चल पा रहा है कि लोग प्रदूषण की वजह से किन-किन बीमारियों से ग्रस्त हो चुके हैं। 

सरकारें खुद पराली क्यों इकट्ठा नहीं करती : 

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकारों से पूछा कि पराली जलाना कोई समाधान नहीं है। सरकारी मशीनरी आखिर क्यों इसे नहीं रोकती? राज्य सरकारें खुद ही क्यों नहीं किसानों से यह पराली खरीदती है? 

फंड नहीं है, तो हमें बताएं 

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव से पराली जलाने से रोकने के लिए फंड की उपलब्धतता के बारे में भी पूछा। उन्होंने पूछा, 'क्या आपके पास फंड है? अगर नहीं तो हमें बताएं, इस मुद्दे से निपटने के लिए हम आपको फंड मुहैया कराएंगे।'



 
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