फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   health plans of children in India, decreasing average length, even in intellectual level: report

बच्चों की स्वास्थ्य योजनाओं में कमी के कारण घट रही औसत लंबाई, बौद्धिक स्तर में भी गिरावट: रिपोर्ट

Tue, 09 Jul 2019 01:40 PM IST
अमित शर्मा अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: अमित शर्मा Updated Tue, 09 Jul 2019 01:40 PM IST
विज्ञापन
health plans of children in India, decreasing average length, even in intellectual level: report
सांकेतिक चित्र - फोटो : Social Media

‘सेव दि चिल्ड्रेन्स ग्लोबल चाइल्डहुड रिपोर्ट 2019’ की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया था कि भारत में बच्चों का स्वास्थ्य बेहद कमजोर स्थिति में है। इसके कारण न सिर्फ बच्चों की औसत लंबाई घट रही है, बल्कि उनके बौद्धिक स्तर में भी गिरावट आ रही है। शिशु मृत्यु दर का आंकड़ा कुछ सुधार के बावजूद आज भी भारत के छोटे-छोटे पड़ोसी देशों की तुलना में खराब स्थिति में है। 

विज्ञापन


अगर केन्द्रीय बजट अनुमान 2019-20 के आलोक में इसे देखें तो देश के इस मोर्चे पर पिछड़ने की वजह भी समझ में आ जाती है। दरअसल केंद्र सरकार की योजनाओं में बच्चों की प्राथमिकता लगातार कम हुई है। बच्चों के लिए आवंटित धनराशि में ही कटौती नहीं हुई है, बल्कि कई महत्त्वपूर्ण योजनाओं को भी ख़त्म कर दिया गया है। इसका सीधा असर बच्चों की क्षमता पर पड़ रहा है जो आने वाले कल में देश का भविष्य बनने वाले हैं।

विज्ञापन

2010-11 में बच्चों के लिए 109 योजनाएं

हक फाउंडेशन की एक रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि वर्ष 2010-11 में बच्चों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से 109 योजनाएं चल रही थीं और इसके लिए केन्द्रीय बजट का कुल 4.06 फीसदी बजट का आवंटन किया गया था, जबकि वर्ष 2014-15 तक बच्चों के लिए योजनाओं की संख्या केवल 91 रह गईं और इसके लिए बजट 4.52 फीसदी निर्धारित किया गया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

2015-16 तक 23 योजनाएं बंद

वर्ष 2015-16 में योजनाओं की संख्या 86 हो गई और इसके लिए बजट भी 3.26 फीसदी कर दिया गया। वर्ष 2016-17 में भी कई योजनाओं को ख़त्म कर दिया गया और योजनाओं की संख्या महज 82 रह गई जो बच्चों के मामले में सबसे ज्यादा उपेक्षा वाला समय कहा जा सकता है। 

वर्ष 2017-18 में बच्चों के लिए 84 योजनायें चल रही थीं। वर्ष 2018-19 में 3.24 फीसदी बजट के साथ 89 और मौजूदा वित्त वर्ष 2019-20 में 3.29 फीसदी बजट के साथ 90 योजनाएं चल रही हैं। 

हक फाउंडेशन की सह-निदेशक प्रीती सिंह ने अमर उजाला को बताया कि बच्चों की उपेक्षा के कारण उनके स्वास्थ्य पर बेहद नकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। बच्चों की औसत लंबाई कम हो रही है और वे छोटे कद के रह जा रहे हैं। उनका कक्षा में शैक्षणिक और खेलों में प्रदर्शन भी प्रभावित हो रहा है जो सीधे-सीधे उनके खानपान में कमी का असर कहा जा सकता है। भविष्य को ध्यान में रखकर बच्चों के स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि इसकी जिम्मेदारी सरकार के साथ-साथ समाज के लोगों को भी उठानी चाहिए क्योंकि अक्सर कई उच्च शिक्षित और साधन सम्पन्न माता-पिता भी अलग-अलग कारणों से बच्चों का ध्यान नहीं रख पाते जिसकी वजह से उनके अंदर भी पोषक तत्त्वों की कमी हो जाती है। 

भारत में बच्चों की स्थिति बदतर

दुनिया की महाशक्ति बनने को आतुर भारत की स्थिति इसके भविष्य बच्चों के मामले में बेहद कमजोर दिखाई पड़ती है. ‘सेव दि चिल्ड्रेन्स ग्लोबल चाइल्डहुड रिपोर्ट 2019’ की रिपोर्ट के मुताबिक़ बच्चों के स्वास्थ्य के मामले में भारत दुनिया के 176 देशों में 113वें नम्बर पर आता है। यहां बच्चों की स्थिति इसके छोटे-छोटे पड़ोसी देशों से भी बदतर है। 

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वर्ष 2000 में प्रति एक हजार जीवित पैदा हुए बच्चों के मामले में शिशु मृत्यु दर 88 थी। वर्ष 2017 में यह 39 रह गई है, लेकिन इस कमी के बाद भारत की स्थिति इस मोर्चे पर कमजोर है क्योंकि पड़ोसी देश श्रीलंका में प्रति हजार जीवित जन्मे बच्चों की शैशवावस्था में होने वाली मृत्यु दर महज 8.8 फीसदी है। 

चीन में यह आंकड़ा 9.3, भूटान में 30.8, नेपाल 33.7, बांग्लादेश में 32.4 फीसदी है। हालांकि, इस मामले में भारत की स्थिति पाकिस्तान से कुछ बेहतर है, जहां आज भी 74.9 बच्चों की मौत हो जाती है।

घटती औसत लंबाई बड़ी चिंता की वजह  

बच्चों की लंबाई को सीधे उनके पोषण से जोड़कर देखा जाता है। अगर बच्चों को उचित पोषक आहार पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते हैं तो उनकी लंबाई अन्य बच्चों की तुलना में कम रह जाती है। भारत के 38 फीसदी बच्चों की लंबाई सामान्य से कम रह जाती है। 

इस मामले में भी भारत पाकिस्तान के 40.8 फीसद के आलावा बाकी अन्य पड़ोसी देशों से पीछे है। चीन के केवल 6 फीसदी बच्चे कम लंबाई के हो रहे हैं, जबकि नेपाल के 13.8 फीसदी, श्रीलंका के 17.3 फीसदी, बांग्लादेश के 17.4 फीसदी और भूटान के 19.1 फीसदी बच्चे अपेक्षाकृत कम लंबाई के हो रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक सभी बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने की योजना के बाद भी आठ वर्ष से 16 वर्ष के बीच का हर पांचवां बच्चा स्कूली शिक्षा से वंचित है। भारत ने बालविवाह के मामले में काफी जागरूकता हासिल की है और इस कुप्रथा को कम करने में अच्छी सफलता हासिल की है। रिपोर्ट के मुताबिक़ अठारह वर्ष से कम आयु के बच्चियों की शादी अब आधी रह गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed