वैक्सीन 'घोटाला': अपने जानकारों को स्वास्थ्यकर्मी और फ्रंट लाइन वर्कर बता कर लगवाया टीका, पता चलने पर केंद्र ने लगाई रोक
- अब देशभर में हेल्थ वर्कर और फ्रंट लाइन वर्कर के वैक्सीनेशन पर रोक के बाद फूट रहा संगठनों का गुस्सा
- अलग-अलग संगठनों ने कहा कि अगर किसी को वैक्सीन लग भी गयी तो हमारी डोज क्यों बंद की जाए
- स्वास्थ्य मंत्री को लिखी चिट्ठी कि दोबारा शुरू किया जाए टीकाकरण का रजिस्ट्रेशन
विस्तार
पूरे देश में कोरोना की दूसरी सबसे खतरनाक लहर चल रही है। बावजूद इसके केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक ऐसा आदेश जारी कर दिया है, जिससे पूरे देश का हेल्थ वर्कर और फ्रंटलाइन वर्कर जबरदस्त नाराज हैं। यह नाराजगी है उस चिट्ठी में लिखे आदेश की उन लाइनों से जिसमें कहा गया है कि अब हेल्थ वर्कर और फ्रंट लाइन वर्कर का कोरोना टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। केंद्र सरकार की इस चिट्ठी के बाद देशभर के हेल्थ वर्कर और फ्रंटलाइन वर्कर के अलग-अलग संगठनों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर अपनी नाराजगी दर्ज की है। इन संगठनों का आरोप है की वैक्सीन लगाने में गलती स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार डॉक्टर और अधिकारियों ने की है, तो उसकी सजा दिन-रात मेहनत करने वाले और मरीजों की सेवा करने वाले हेल्थ वर्कर और फ्रंटलाइन वर्करों को क्यों दी जा रही है।
अपने घरवालों और रिश्तोदारों को लगवाया टीका
दरअसल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सूचना मिल रही थी कि देश में फ्रंटलाइन वर्कर और हेल्थ वर्कर के नाम पर पूरे देश में संबंधित महकमा इस दायरे में ना आने वाले लोगों को भी वैक्सीन लगा रहा था। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक हेल्थ वर्कर और फ्रंट लाइन हेल्थ वर्कर की संख्या अचानक 24 फीसदी तक पहुंच गई। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जब इसका सर्वे किया तो पता चला कि बहुत से हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्करों को तो वैक्सीन की डोज ही नहीं लगी। अगर लगी तो पहली डोज के बाद दूसरी डोज ही नहीं लग पाई। मामले की तह में जब मंत्रालय और संबंधित अधिकारी गए तो पता चला कि राज्यों में जिम्मेदार अधिकारियों और जिम्मेदार महकमे ने स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर की जगह पर अपने जानने वालों को हेल्थ और फ्रंट लाइन वर्कर बताकर वैक्सीन लगवा दी। यही वजह रही की सभी हेल्थ और फ्रंट लाइट वर्कर्स को अभी तक वैक्सीन ही नहीं लग सकी।
जिम्मेदारों पर हो कानूनी कार्रवाई
एम्स नई दिल्ली के नर्सिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश काजला ने केंद्र सरकार के इस आदेश पर जबरदस्त आपत्ति दर्ज की है। हरीश काजला ने कहा जब देश में कोरोना की दूसरी सबसे खतरनाक लहर चल रही है, उस दौर में केंद्र सरकार के इस आदेश से न सिर्फ स्वास्थ्यकर्मियों का बल्कि फ्रंटलाइन वर्करों का मनोबल गिर रहा है। एम्स नर्सिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि वह अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा करते हैं। ऐसे में अगर उनका रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा, तो वह अपना टीकाकरण कैसे कराएंगे। हरीश ने पूरे देश के राज्यों के स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार अधिकारियों और डॉक्टरों को घेरते हुए कहा कि यह जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की और विभाग की थी कि जिनका टीकाकरण हो रहा है, उनके बारे में सही सही जानकारी विभाग को हो। लेकिन ऐसा हुआ नहीं क्योंकि जिम्मेदारों ने अपने जानने वालों को का टीकाकरण कर दिया। नर्सिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी, न कि हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर का टीकाकरण रजिस्ट्रेशन रोकना चाहिए था।
तत्काल प्रभाव से आदेश वापस ले सरकार
ऑल इंडिया नर्सिंग फेडरेशन और ऑल इंडिया सेंट्रल हेल्थ एंप्लाइज एसोसिएशन के सदस्य सुरेंद्र कहते हैं केंद्र सरकार को अपने फैसले पर विचार करना चाहिए। क्योंकि यह वक्त अपनी कमजोरियों और खामियों को दुरुस्त करने का है, न कि चलती हुई व्यवस्था को रोक देने का। एम्स नर्सिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश काजला ने कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार के इस फैसले पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा है और उनसे मांग की है कि इस आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। ताकि दिन-रात मरीजों की सेवा करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंट लाइन वर्कर का टीकाकरण सुचारू रूप से हो सके। उन्होंने यह भी मांग की है कि जिन अधिकारियों और जिम्मेदारों की वजह से ऐसे आदेश को पारित करना पड़ा उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।