'सम्राट अशोक'और 'गुरु गोविंद सिंह' की जन्मभूमि के लोगों में घट रहा खून
- बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बेहाल
- माताएँ अपने बच्चों को दूध पिलाने में भी बहुत पीछे है
- कैंसर को लेकर जागरूक नहीं महिलाएं, खून की भी कमी
- नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़ों में दिखी ऐसी तस्वीर
विस्तार
सम्राट अशोक और गुरु गोविंद सिंह की जन्मभूमि के लोगों की रगों में खून घटने लगा है। बिहार की महिलाओं से लेकर पुरुषों और बच्चों तक में खून की कमी हो रही है। यही नहीं इस धरती की मम्मियां तो अपने नवजात को दूध भी पिलाने में बहुत पीछे हैं। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को लेकर जागरूकता न के बराबर है। आलम यह है कि इस बीमारी की जांच के लिए महिलाएं कैंसर स्क्रीनिंग सेंटर नहीं जाती।
बिहार में लाख दावों के बाद भी स्वास्थ्य की सेवाएं बेपटरी हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के हालिया जारी हुए आंकड़ों के मुताबिक कुछ ऐसी ही तस्वीर उभर कर सामने आई है। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी कुछ मामलों प्रदेश ने पिछले पांच सालों में बढ़त बनाई है।
महिलाओं से लेकर बच्चों तक में खून की कमी
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक पांच माह तक के 69 फीसदी से ज्यादा बच्चों में खून की कमी पाई गई। जबकि पांच साल पहले के इसी सर्वे में यह संख्या कम थी। पिछले सर्वे में 63 फीसदी बच्चों में खून की कमी थी। इसी तरह से 15 से 49 साल की 63 फीसदी से ज्यादा महिलाओं में खून की कमी पाई गयी। जबकि 15 से 19 साल की 65 फीसदी से ज्यादा किशोरियों में भी खून की अल्पता थी।
यही नहीं, केंद्र और राज्य सरकार की तमाम नीतियों के बाद भी प्रदेश की 63 प्रतिशत से ज्यादा गर्भवती महिलाएं खून की कमी से जूझ रहीं थी। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अलका सहगल के मुताबिक इसका सीधा असर होने वाले बच्चे की सेहत पर पड़ता है।
औसतन हर तीसरे आदमी में खून की कमी
बिहार में महिलाओं की तुलना में पुरुषों में खून की कमी तो नहीं है लेकिन आंकड़ों के मुताबिक हर तीसरा आदमी खून की कमी से जूझ रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक तकरीबन 30 फीसदी 15 से 49 साल तक के पुरुष एनिमिक हैं। जबकि 15 से 19 साल तक के 34 फीसदी किशोर भी खून की कमी से जूझ रहे हैं।
पहले ज्यादा माएं दूध पिलाती थी, अब कम हो गईं
बिहार में माताओं ने जन्म के एक घंटे बाद अपने होने वाले बच्चों को दूध पिलाना कम कर दिया है। 2015-16 में आए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि पहले जहां 34 फीसदी से ज्यादा माताएं जन्म के एक घंटे में बच्चों को दूध पिलाती थीं वहीं अब यह आंकड़ा कम हो गया है। हालिया जारी आंकड़ों के मुताबिक अब 31 फीसदी माताएं ही जन्म के एक घंटे में नवजात को दूध पिलाती हैं।
न फोलिक एसिड और न आयरन की दवा
गर्भवती महिलाएं न तो फोलिक एसिड की दवाएं लेती हैं और न ही आयरन की दवाएं लेती हैं। हालांकि आंकड़ों के मुताबिक दवाओं को लेने का प्रतिशत पिछली बार जारी हुए सर्वे की तुलना में इस बार बढ़ा है। पिछली बार जहां यह 2.3 फीसदी था वहीं इस बार यह आंकड़ा 9.3 फीसदी है।
कैंसर को लेकर जागरूकता न के बराबर
कैंसर की जागरूकता को लेकर प्रदेश की महिलाएं सजग नहीं हैं। सर्वाइकल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और ओरल कैंसर के प्रति 1 फीसदी से भी कम महिलाओं में जागरूकता है। यानीकि 99 फीसदी से ज्यादा बिहार की महिलाएं कैंसर की जांच के लिए कभी अस्पताल गयीं ही नहीं।