{"_id":"62176dbc3fadce2dfc5bba94","slug":"hc-upholds-goa-speaker-s-order-dismissing-pleas-seeking-disqualification-of-12-mlas","type":"story","status":"publish","title_hn":"बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला: कांग्रेस को झटका, गोवा में 12 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग खारिज ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला: कांग्रेस को झटका, गोवा में 12 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग खारिज
Thu, 24 Feb 2022 05:06 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 24 Feb 2022 05:06 PM IST
सार
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता अध्यक्ष द्वारा पारित किए गए आदेशों में हस्तक्षेप का मामला नहीं बना पाए हैं, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।
विज्ञापन
गोवा- 12 विधायकों की अयोग्यता का मामला
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने गुरुवार को गोवा विधानसभा अध्यक्ष के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें 2019 में अपनी पार्टियों से सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल होने वाले 12 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग वाली दो याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। इनमें से दस विधायकों ने कांग्रेस छोड़ दी थी, जिसमें कहा गया था कि यह भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की राजनीति को बढ़ावा देगा जो लोगों के जनादेश को धन से बदल देता है।
विज्ञापन
भाजपा ने किया फैसले का स्वागत
दूसरी ओर भाजपा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि लोकतंत्र और संवैधानिक जनादेश बदनाम अभियान पर हावी है। गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गिरीश चोडनकर ने पार्टी के 10 विधायकों के खिलाफ अदालत में अयोग्यता याचिका दायर की थी, जो जुलाई 2019 में भाजपा में शामिल हो गए थे। उन्होंने कहा था कि ये विधायक अपनी मूल पार्टी (कांग्रेस) की सदस्यता से अयोग्य घोषित किए जाने के पात्र हैं, जिससे संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता को लागू करने का मामला बनता है।
विज्ञापन
एमजीपी विधायक ने भी दायर की थी याचिका
महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के विधायक सुदीन धवलीकर ने भी उसी आधार पर अपनी पार्टी के विधायकों के खिलाफ एक याचिका दायर की थी, जो उसी वर्ष क्षेत्रीय पार्टी को विभाजित करके भाजपा में शामिल हो गए थे। गोवा विधानसभा अध्यक्ष राजेश पाटनेकर ने पिछले साल 20 अप्रैल को चोडनकर और धवलीकर द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
विज्ञापन
चोडनकर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने हाई कोर्ट के समक्ष दलील दी थी कि स्पीकर ने संविधान की दसवीं अनुसूची के पैराग्राफ चार की व्याख्या करने में गलती की है। उन्होंने तर्क दिया था कि अनुसूची मूल राजनीतिक दल के विलय के संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए दोहरी परीक्षा पर विचार करती है।
गुरुवार को जस्टिस मनीष पितले और जस्टिस आर एन लड्ढा की खंडपीठ ने कहा कि दोनों याचिकाएं खारिज की जाती हैं। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता अध्यक्ष द्वारा पारित किए गए आदेशों में हस्तक्षेप का मामला नहीं बना पाए हैं, हम मानते हैं कि याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं को अध्यक्ष द्वारा सही ढंग से खारिज कर दिया गया था।