कोरोना वायरस: मद्रास हाईकोर्ट का अखबारों के प्रकाशन पर रोक से इनकार
मद्रास हाईकोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए अखबारों के प्रकाशन पर रोक से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जीवंत मीडिया एक संपत्ति की तरह है। कोरोना वायरस के चलते जारी लॉकडाउन के मद्देनजर प्रिंट व इलेक्ट्रॉानिक मीडिया को दी गई छूट के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की गई थी जिस पर ये फैसला दिया गया।
याचिकाकर्ता ने अर्जी दी थी कि अखबारों से लोगों में कोरोना वायरस फैल सकता है, और इसके प्रकाशन पर महामारी जारी रहने तक रोक लगाई जानी चाहिए। लेकिन अदालत ने इस दलील को नामंजूर कर दिया।
अदालत ने कहा कि बहुत कम संभावना या आशंका के आधार पर अखबार का प्रकाशन नहीं रोका जा सकता। जस्टिस ए किरुबकरन और जस्टिस आर हेमलता की बेंच ने कहा कि ये न सिर्फ प्रकाशक और संपादक बल्कि अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत पाठकों के मूलभूत अधिकारों का भी हनन होगा।
अदालत ने कहा कि एक जीवंत मीडिया किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए संपत्ति की तरह है। पूर्व में, आजादी की लड़ाई के दौरान इसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक विचार के निर्माण में जबरदस्त भूमिका निभाई थी।
इसके अलावा आपातकाल के अंधकार युग (1975-77) के दौरान मीडिया ने प्रशंनीय भूमिका निभाई थी। इस बात को इंगित करते हुए कि प्रिंट मीडिया ने जनता के विचारों को आवाज दी है, अदालत ने कहा कि इसने वॉचडॉग के रूप में भी काम किया है जिसने प्रशासन में उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार का भी खुलासा किया है।
अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के 10 जनवरी 2020 के आदेश का भी जिक्र किया जिसमें अनुराधा भसीन बनाम भारत सरकार के बीच केस चला था और मीडिया की स्वतंत्रता कायम रखी गई थी।