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Mumbai: हाईकोर्ट ने आरक्षण नियमों पर सुनाया फैसला, दिव्यांगों को नहीं मिलेगा एससी/एसटी जैसे प्रयासों का अधिकार

Wed, 12 Feb 2025 05:08 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 12 Feb 2025 05:08 PM IST
सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक दिव्यांग सिविल सेवा अभ्यर्थी धर्मेंद्र कुमार की याचिका को खारिज कर दिय़ा। अभ्यर्थी ने अपनी याचिका में एससी/एसटी अभ्यर्थियों को मन चाहा बार परीक्षा में शामिल होने के नियम को भेदभाव पूर्ण बताया था। 

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HC junks plea against provision of unlimited attempts for SC/ST candidate in civil services exam News In Hindi
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक दिव्यांग सिविल सेवा अभ्यर्थी धर्मेंद्र कुमार की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने कुमार को झटका देते हुए उनकी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ओबीसी उम्मीदवारों की तुलना एससी/एसटी उम्मीदवारों से नहीं की जा सकती, क्योंकि दोनों के लिए अलग-अलग आरक्षण मानदंड हैं। पीठ ने कहा कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) संविधान द्वारा पहचानी गई अलग श्रेणियां हैं, और उनके लिए आरक्षण मानदंड को मनमाना नहीं कहा जा सकता है। 
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बता दें कि यह फैसला 4 फरवरी को हुआ, जब ओबीसी श्रेणी से आने वाले 38 वर्षीय धर्मेंद्र कुमार ने अपनी याचिका में दावा किया कि एससी/एसटी अभ्यर्थियों के लिए सिविल सेवा परीक्षा में असीमित प्रयास की अनुमति देना भेदभावपूर्ण है। कुमार ने नौ बार सिविल सेवा परीक्षा दी और हर बार परीक्षा पास करने में असफल रहे है। 
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मामले में कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि एससी/एसटी श्रेणियों के लिए अलग नियम हैं क्योंकि ये संविधान में अलग वर्ग के रूप में पहचानी जाती हैं, जबकि ओबीसी को अन्य श्रेणी माना गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि दिव्यांगजन को एक अलग वर्ग के रूप में माना जाता है, लेकिन इस श्रेणी में ओबीसी या एससी/एसटी के उम्मीदवारों को समान लाभ नहीं मिल सकता।
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कोर्ट ने आरक्षण के रूप रेखा का किया जिक्र
साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दिव्यांगजन एक अलग श्रेणी हैं, और यह समांतर आरक्षण (horizontal reservation) है, जो वर्गीय आरक्षण (vertical reservation) जैसे एससी/एसटी और ओबीसी को प्रभावित नहीं करता। अदालत ने कहा कि यदि कोई दिव्यांग व्यक्ति एससी/एसटी श्रेणी से संबंधित है, तो वह ओबीसी या अन्य श्रेणी के उम्मीदवार से अलग स्थिति में होगा, और इसलिए उसे अन्य श्रेणी के उम्मीदवारों के समान लाभ नहीं मिल सकता।


एक नजर सिविल सेवा की परीक्षा में आरक्षण के नियमों पर
अब बात अगर सिविल सेवा परीक्षा के नियमोें की करें तो अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) इस परीक्षा को जितनी बार चाहे उतनी बार दे सकते है। ओबीसी श्रेणी (अन्य पिछड़ा वर्ग) और पीडब्ल्यूबीडी (बेंचमार्क विकलांगता वाले व्यक्ति) श्रेणी के अभ्यर्थियों को सिविल सेवा परीक्षा में नौ प्रयास करने की अनुमति है। यानी इन दोनों श्रेणियों के लोग नौ बार तक सिविल सेवा परीक्षा दे सकते हैं। वहीं सामान्य ओपन श्रेणी (जेनरल) के अभ्यर्थियों को केवल छह बार इस परीक्षा में शामिल हो सकते है। 
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