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Jharkhand: कानून की किताब में छपाई में त्रुटि के लिए HC का पब्लिशर कंपनी को नोटिस, प्रतियां बेचने से रोक लगाई

Tue, 02 Jul 2024 01:50 AM IST
विशांत श्रीवास्तव अमर उजाला, न्यूज डेस्क, रांची
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, रांची Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Tue, 02 Jul 2024 01:50 AM IST
सार

भारतीय न्याय संहिता में त्रुटि करने पर झारखंड हाईकोर्ट ने पब्लिशर कंपनी को नोटिस जारी किया है। साथ ही सभी कॉपियों को ग्राहकों को ना बेचने के लिए कहा है। 

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HC issues notice to publication house for printing error in new law book
झारखंड हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

झारखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय न्याय संहिता में त्रुटि करने के लिए एक पब्लिशर कंपनी को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि कंपनी की गलती के कारण कानून के मायने ही बदल गए थे। 
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न्यायाधीश आनंद सेन और न्यायाधीश सुभाष चंद की खंडपीठ ने मेसर्स यूनिवर्सल लेक्सिसनेक्सिस द्वारा प्रकाशित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 (2) में मुद्रण की गलती को ध्यान में रखते हुए मामले में स्वत: संज्ञान लिया था।
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अदालत ने कहा- यह बड़ी त्रुटि है
अदालत ने बताया कि बीएनएस की धारा 103 (2) हत्या के लिए सजा से संबंधित है। राजपत्र अधिसूचना के अनुसार: "जब पांच या अधिक व्यक्तियों का समूह एक साथ मिलकर नस्ल, जाति या समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास, या किसी अन्य समान आधार पर हत्या करता है, तो ऐसे प्रत्येक सदस्य समूह को मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सज़ा होगी और जुर्माना भी देना होगा।"
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लेकिन यूनिवर्सल लेक्सिसनेक्सिस द्वारा प्रकाशित बेयर एक्ट्स में "समान" शब्द गायब है, जो कि कानून की व्याख्या में एक बड़ी त्रुटि है। 

कोर्ट ने गलती सही करने और प्रतियों को ना बेचने का आदेश दिया
अदालत ने प्रकाशन कंपनी को निर्देश दिया कि वह प्रकाशित की गई प्रतियों के लिए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए और उन्हें ग्राहकों को ना बेचे। पीठ ने घोषणा की कि मामले को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश द्वारा सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया है।


जजों ने कहा- इस तरह की त्रुटि वकीलों, अदालतों सहित सभी पक्षों के साथ अन्याय होगा

जजों ने आगे कहा, "ये प्रकाशन वकीलों, अदालतों, पुस्तकालयों, प्रवर्तन एजेंसियों और विभिन्न संस्थानों को दिए जाते हैं। इसलिए, इन कानूनों का कोई भी प्रकाशन त्रुटि मुक्त होना चाहिए। यहां तक कि एक छोटी सी टाइपोग्राफिक त्रुटि या चूक से काफी गलत मतलब निकल सकते हैं। ऐसी गलतियों के कारण वकीलों और अदालतों सहित सभी पक्षों के साथ अन्याय होगा।"
 
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