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Bombay High Court: पवार के खिलाफ ट्वीट करने वाले छात्र को एक महीने बाद मिली जमानत, बाकी एफआईआर में गिरफ्तारी से दी राहत

Tue, 21 Jun 2022 06:38 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Amit Mandal Updated Tue, 21 Jun 2022 06:38 PM IST
सार

भामारे को नासिक पुलिस ने ट्वीट पर उनके खिलाफ शिकायत के बाद 19 मई को गिरफ्तार किया था और तब से वह हिरासत में हैं।

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HC grants bail to student facing multiple FIRs for tweet about Pawar
छात्र को जमानत - फोटो : social media

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को नासिक के 22 वर्षीय फार्मेसी छात्र को जमानत दे दी, जिसे पिछले महीने राकांपा प्रमुख शरद पवार के खिलाफ एक कथित आपत्तिजनक ट्वीट के लिए गिरफ्तार किया गया था। न्यायमूर्ति नितिन जामदार की अगुवाई वाली एक पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय इस तथ्य को नहीं भूल सकता कि निखिल भामारे सिर्फ एक छात्र है और वह एक सोशल मीडिया पोस्ट के लिए एक महीने से अधिक समय से जेल में है। उस एक ट्वीट को लेकर भामारे पर राज्य के विभिन्न जिलों में छह प्राथमिकी दर्ज हैं।

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हालांकि ट्वीट में पवार का नाम नहीं है, लेकिन महाराष्ट्र पुलिस ने दावा किया है कि यह अपमानजनक है और यह धर्म या नस्ल के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देता है। भामारे को दो मजिस्ट्रेट अदालतों द्वारा पहली और छठी प्राथमिकी में जमानत दी गई थी, जबकि दूसरी और तीसरी प्राथमिकी में उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी और उन्होंने दो आदेशों को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। भामारे को चौथी और पांचवीं प्राथमिकी में गिरफ्तार किया जाना बाकी है।  
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चौथे और पांचवें मामले में गिरफ्तारी पर रोक 
न्यायमूर्ति जामदार ने कहा कि पीठ भामारे को उन दो मामलों में राहत दे रही जहां उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी, साथ ही पुलिस को उन्हें चौथे और पांचवें मामले में गिरफ्तार करने से रोक दिया है। अदालत ने कहा, यहां जनहित का एक तत्व शामिल है। वह एक छात्र है, जो एक महीने से अधिक समय से जेल में है। हम उसे सीआर नंबर दो और तीन में जमानत दे रहे हैं। साथ ही भामारे को उन मामलों में गिरफ्तार करने से पुलिस को रोक दिया जिनमें उन्हें गिरफ्तार किया जाना बाकी है।
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भामारे को नासिक पुलिस ने ट्वीट पर उनके खिलाफ शिकायत के बाद 19 मई को गिरफ्तार किया था और तब से वह हिरासत में हैं। याचिकाकर्ता के वकील सुभाष झा ने मंगलवार को तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले मामलों में, विशेष रूप से पत्रकार अर्नब गोस्वामी और अमीश देवगन द्वारा दायर किए गए मामलों में यह स्पष्ट कर दिया था कि एक अपराध के लिए किसी के खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जानी चाहिए।

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