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Haryana Polls 2024: हरियाणा के चुनाव मैदान में 100 से ज्यादा बागी, भाजपा-कांग्रेस में किसे लगेगी चोट?
Sun, 15 Sep 2024 01:47 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 15 Sep 2024 01:47 PM IST
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हरियाणा विधानसभा चुनाव
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संवाद
विस्तार
हरियाणा विधानसभा चुनाव में इस बार सत्ता तय करने में बागियों की भूमिका अहम हो सकती है। भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों को मिलाकर इस बार यहां सौ से ज्यादा नेताओं, विधायकों-मंत्रियों ने पाला बदल लिया है। जजपा जैसे छोटे दल के वर्तमान विधायकों तक ने पाला बदल लिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार हरियाणा में किसी पार्टी की हार या जीत तय होने में उनके प्रमुख उम्मीदवारों से ज्यादा बागी उम्मीदवारों-नेताओं की भूमिका अहम हो सकती है।
कांग्रेस को इस बार हरियाणा में सत्ता में वापसी की बड़ी उम्मीदें हैं। भाजपा के खिलाफ 10 साल का एंटी एनकमबेंसी फैक्टर, जाटों-किसानों-पहलवानों की कथित नाराजगी भी भाजपा के खिलाफ जा सकती है। वहीं, कांग्रेस जाटों के एकमुश्त समर्थन की उम्मीद कर रही है। ऐसे में उसकी दावेदारी मजबूत हो गई है। लेकिन इसके बाद भी टिकट बंटवारे के बाद कांग्रेस में मचा घमासान पार्टी नेतृत्व के लिए परेशानी का कारण बन गया है।
कहा जा रहा है कि अब तक कांग्रेस के 50 से अधिक छोटे-बड़े नेताओं ने पाला बदल कर लिया है। हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में लगभग तीन दर्जन पर कांग्रेस को अपने ही बगावती नेताओं-उम्मीदवारों की बगावत का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस के 42 नेता किसी दूसरे दल या स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ये नेता कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं।
भाजपा भी परेशान
बगावत का सबसे ज्यादा सामना भाजपा को करना पड़ रहा है। टिकट गलत बांटने के आधार पर अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं पर आरोप लगाते हुए पार्टी के विधायकों-मंत्रियों ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। यहां तक कि पार्टी संगठन में उच्च पदों पर बैठे नेताओं ने पार्टी का साथ छोड़ उसे बगले झांकने के लिए मजबूर कर दिया है। भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व विधायक सुखविंदर मांडी ने 14 सितंबर को ही पार्टी का दामन छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया। इससे किसान मतदाताओं के बीच नकारात्मक संदेश जा सकता है जिसका भाजपा को नुकसान हो सकता है।
भाजपा ओबीसी समुदाय के मतदाताओं पर अपना सबसे ज्यादा दांव लगा रही है, लेकिन पार्टी की ओबीसी यूनिट के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री किरण कंबोज ने चुनाव के बीच पार्टी को अलविदा कह उसे शर्मसार कर दिया है। इस तरह पार्टी पदाधिकारियों के टिकट कटने से उनकी नाराजगी भाजपा को भारी पड़ सकती है।
सूत्र बताते हैें कि अपने अनुशासन के लिए जानी जाने वाली भाजपा हरियाणा में बागी नेताओं के कारण परेशान है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित भाजपा के कई केंद्रीय नेता बागी नेताओं को फोन कर उन्हें मनाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बागी नेताओं के रुख में कोई नरमी नहीं आ रही है। इस चुनाव में भाजपा के लिए इसे अब तक का सबसे बड़ा नकारात्मक फैक्टर माना जा रहा है।
आम आदमी पार्टी ने दोनों दलों को छकाया
दरअसल, बागियों को पनाह देने में आम आदमी पार्टी ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। भाजपा-कांग्रेस को छोड़कर आने वाले नेताओं को आम आदमी पार्टी ने खूब दिल खोलकर टिकट बांटे हैं। यही कारण है कि जहां शुरुआत में यह कहा जा रहा था कि आम आदमी पार्टी को हरियाणा की सभी सीटों के लिए उम्मीदवार ही नहीं मिल पाएंगे, वहीं, अब स्थिति यह है कि पार्टी ने राज्य की सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषक कुमार राकेश ने अमर उजाला से कहा कि दूसरे दलों से आए आम आदमी पार्टी के कई उम्मीदवार मजबूत पृष्ठभूमि के हैं और अपने क्षेत्र में बड़ी संख्या में मतदाताओं को प्रभावित करने की क्षमता भी रखते हैं। चूंकि, विधानसभा चुनावों में किसी पार्टी की हार या जीत बहुत कम वोटों के अंतर से होती रहती है, इन बागियों की भूमिका किसी हार या जीत का परिणाम तय करने में महत्त्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल, इन बागियों के कारण किसे ज्यादा नुकसान हुआ, यह तो आठ अक्टूबर को ही पता चलेगा जब चुनाव परिणाम हमारे सामने होंगे।