Haryana: सीएम सैनी की अग्नि परीक्षा के ‘240' घंटे, एडीजीपी-एएसआई आत्महत्या मामले को इस तरह से संभाला
नायब सैनी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके सामने एडीजीपी और एएसआई सुसाइड केस, ये किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं थे। वजह, दोनों ही मामलों को राजनीतिक और जातीय रंग देने की कोशिशें हुई।
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हरियाणा सरकार, जिसकी सांसें '240' घंटे तक अटकी रही, उसे गुरुवार को राहत मिली है। वजह, एएसआई संदीप कुमार लाठर, पंचतत्व में विलीन हो गए। मुख्यमंत्री नायब सैनी से हुई बातचीत और आश्वासन के बाद संदीप के पैतृक गांव जुलाना में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। प्रदेश के नए डीजीपी ओपी सिंह सहित कई अफसर, संदीप के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इससे पहले एडीजीपी वाई पूरन कुमार, जिन्होंने सात अक्तूबर को सुसाइड कर लिया था, बुधवार को उनका परिवार भी शव के पोस्टमार्टम के लिए तैयार हो गया। उसी दिन पूरण कुमार का दाह संस्कार भी कर दिया गया। नायब सैनी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके सामने एडीजीपी और एएसआई सुसाइड केस, ये किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं थे। वजह, दोनों ही मामलों को राजनीतिक और जातीय रंग देने की कोशिशें हुई। सीएम सैनी ने केंद्र से भी इस मुद्दे पर बातचीत की। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि उक्त मामले में मुख्यमंत्री सैनी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से भरपूर मदद मिली। नतीजा, 240 घंटे बाद सैनी ने दोनों केसों से पैदा हुई विकट स्थिति पर काबू पा लिया।
चंडीगढ़ के अलावा दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में तैनात रहे एक शीर्ष अधिकारी ने इस मामले में कई अहम बातों का खुलासा किया। अनौपचारिक चर्चा में उन्होंने बताया कि ये दोनों केस, मुख्यमंत्री सैनी के लिए बहुत अहम थे। पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में सबसे पहले बरवाला आश्रम कांड हुआ था। रामपाल और उसके साथियों को गिरफ्तार करने के लिए राज्य सरकार को पुलिस एवं केंद्रीय बलों के पांच हजार से अधिक जवानों को तैनात करना पड़ा था। इस दौरान 26 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि खर्च हुई। आश्रम में हुई हिंसक झड़प और आगजनी में कई अनुयायी मारे गए थे। 2016 में आरक्षण आंदोलन हुआ, जिसमें 30 लोगों की मौत हुई थी। प्रदेश में करीब 34 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके बाद 2017 में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बलात्कार मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद पंचकुला में हिंसा हो गई। हिंसा और आगजनी में 32 लोगों की मौत हुई। 118 करोड़ रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई।
आईपीएस वाई पूरण कुमार द्वारा सुसाइड किए जाने के बाद एक विशेष वर्ग को भड़काने का प्रयास हुआ। पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा सहित कांग्रेस पार्टी के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी पूरन कुमार के आवास पर पहुंचे थे। कई जगहों पर दलित समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। पंजाब के सीएम भगवंत मान सहित 'आप' के कई बड़े नेता भी पूरन कुमार के आवास पर पहुंचे। अधिकारी के मुताबिक, सीएम सैनी ने अपने हर फैसले से केंद्र को अवगत कराया। यूं कहें कि उनके हर फैसले में केंद्र की सलाह काम कर रही थी। जब आईपीएस पूरन कुमार ने सुसाइड किया तो उस वक्त उनकी आईएएस पत्नी, जापान के दौर पर सीएम सैनी के साथ थीं। विदेश से लौटते ही सीएम सैनी, पूरन कुमार के घर पहुंचे थे। उसके बाद उन्होंने अपने मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और गृह सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा से बातचीत की। साथ ही सीएम सैनी ने डीजीपी शत्रुजीत, जिन पर पूरन कुमार ने गंभीर आरोप लगाए थे, से बातचीत की।
सीएम को बताया गया कि वाई पूरन ने जिन दर्जनभर आईएएस और आईपीएस अफसरों का नाम अपने सुसाइड नोट में लिखा है, अगर उन पर तत्काल कोई कार्रवाई की जाती है तो मामला बिगड़ जाएगा। इससे कई अफसर आमने सामने हो जाएंगे। उसके बाद ही यह तय किया गया कि मामले की जांच एसआईटी करेगी। हालांकि यह फैसला चंडीगढ़ पुलिस का था, लेकिन अप्रत्यक्ष तौर से इसके पीछे हरियाणा सरकार काम कर रही थी।
ये अलग बात है कि हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को केंद्र की तरफ से दिशा निर्देश मिलते रहे। धीरे धीरे पूरन कुमार के आवास पर राजनीतिक नेताओं का जमावड़ा लगने लगा। मामले को जातीय रंग देने का प्रयास किया जाने लगा। मुख्यमंत्री सैनी ने यह निर्णय लिया कि जब तक एसआईटी की रिपोर्ट नहीं आ जाती, वे अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री को अपने इस निर्णय में छोटा सा बदलाव करना पड़ा। जब पूरन कुमार की पत्नी, डीजीपी शत्रुजीत पर कार्रवाई के लिए अड़ गई तो सैनी को नरम एक्शन लेना पड़ा। कपूर को छुट्टी भेज दिया गया। ओपी सिंह को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया। इससे पहले रोहतक के एसपी नरेंद्र बिजराणियां को एसपी के पद से हटाया जा चुका था।
सूत्रों के मुताबिक, सीएम ने पूरन कुमार की आईएएस पत्नी अमनीत कुमार से गृह सचिव सुमिता मिश्रा की बातचीत कराई। नतीजा, आठ दिन बाद पूरन कुमार के पोस्टमार्टम के लिए अमनीत कुमार तैयार हो गईं। बुधवार को उनका अंतिम संस्कार भी हो गया। इस बीच रोहतक में एएसआई संदीप लाठर ने सुसाइड कर लिया। संदीप कुमार भी वाई पूरन केस की जांच से जुड़े थे। बताया जाता है कि जिस वक्त आईपीएस वाई पूरन की गाड़ी में से उनके निजी सुरक्षा अधिकारी 'सुशील कुमार' को गिरफ्तार किया गया, तब भी संदीप कुमार मौके पर मौजूद थे। यह भी कहा जा रहा है कि एएसआई संदीप लाठर ने 'सुशील कुमार' की लोकेशन पता लगाने में अहम भूमिका निभाई थी। चूंकि सुशील कुमार रोहतक में तैनात थे और जाट समुदाय से ताल्लुक रखते थे, मुख्यमंत्री सैनी ने इस बात की गहराई को समझने में देर नहीं लगाई। वे अगले ही दिन संदीप के घर पर पहुंच गए। उन्होंने परिवार को निष्पक्ष जांच का आश्चासन भी दिया। संदीप की पत्नी को नौकरी और बच्चों की पढ़ाई लिखाई में आर्थिक मदद का भरोसा दे दिया।
बुधवार को संदीप कुमार के सुसाइड को भी राजनीतिक एवं जातीय रंग देने का प्रयास हुआ। संदीप के परिजनों की तरफ से मांग की गई कि वे तब तक शव का पोस्टमार्टम नहीं कराएंगे, जब तक आईएएस अमनीत कुमार के खिलाफ केस दर्ज नहीं होता। सरकार की तरफ से लगातार सुशील के परिवार से संपर्क साधा जाता रहा। गुरुवार को संदीप के चचेरे भाई सत्यवान ने कहा, हमारी कोई मांग नहीं है। हम निष्पक्ष जांच चाहते हैं। सुसाइड नोट में जिन लोगों का जिक्र है, उसके मुताबिक कार्रवाई हो। दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
जिस वक्त पीजीआई रोहतक में संदीप का पोस्टमार्टम हो रहा था, तभी वहां पर केंद्रीय शहरी विकास एवं ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल भी पहुंच गए। सूत्रों का कहना है कि खट्टर अपने परिजन का हाल जानने के लिए पीजीआई पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने संदीप लाठर के परिवार वालों से भी बातचीत की। खट्टर ने कहा, दिवंगत आत्मा को प्रभु अपने श्रीचरणों में स्थान दें। परिवार को यह अथाह दुख सहन करने का साहस और संबल दें। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की। केंद्रीय मंत्री ने कहा, प्रदेश में दो दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं घटी हैं, जो नहीं घटनी चाहिए थीं। पहली घटना को कुछ लोगों व राजनीतिक दलों ने राजनीतिक रंग देने की कोशिश की।
खट्टर ने कहा, मामले को जातिगत रंग देने के प्रयास किए गए, जो उचित नहीं था। उन्होंने दोनों परिवारों व समाज के अग्रणी लोगों से आह्वान किया है कि इन घटनाओं को जातिगत या राजनीतिक रंग न दें। इन दोनों घटनाओं के केंद्र बिंदु में एक सामाजिक बुराई रही है, जो जांच का विषय है। इससे पहले पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा भी संदीप के घर पर पहुंचे थे। उन्होंने संदीप लाठर के निधन की खबर को बहुत दुःखद घटना बताया। हुड्डा ने कहा, हरियाणा के इस प्रकरण की गहराई से जांच होनी चाहिए। यह जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए। दोषी बचने नहीं चाहिए और निर्दोषों को फंसाया नहीं जाए। सरकार को उनके परिजनों से बात करके उनकी संतुष्टि सुनिश्चित करनी चाहिए। हरियाणा सरकार को संदीप के परिवार की हरसंभव मदद भी करनी चाहिए।